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व्‍यंग्‍य

कहानी

छंद सरसी

परम पूज्य बाबा गुरु घासीदास : सरसी छंद

जेखर जनम धरे ले भुँइया,बनगे हे सत धाम। उही पुरष के जनम दिवस हे,भज मनुवा सतनाम।।1।। बछर रहिस सतरह सौ छप्पन,दिवस रहिस सम्मार। तिथि अठ्ठारह माह दिसम्बर,सतगुरु लिन अँवतार।।2।। तब भुँइ मा सतपुरुष पिता के,परे रहिस शुभ पाँव। बालक के अविनाशी घासी,धरे रहिन हे नाँव।।3।। वन आच्छादित गाँव गिरौदा,छत्तीसगढ़ के शान। पावन माटी मा जनमे […]

महाकाव्‍य

श्री राम कथा (संक्षिप्‍त) पारवती के तपइसा

रानी मयना रहंय अकेल्ला, एक दिन अइसन मउका पाके। दाई के कोरा मा बइठिस, पारवती अंगना ले आके।।1।। देखिस पारवती ला रानी, चूमिस मुंह ला बड़ दुलार कर। लेइस छाती मा रपोट, अरझे माला के सुधार लर।।2।। देख देख सुकमार देह ला, बेटी के रानी दुख पाइस। सुरता करके गोठ मुनी के, आंखी मा आंसू […]

श्री राम कथा (संक्षिप्त) सती मरन

श्री राम कथा (संक्षिप्त) सती मोह

श्री राम कथा (संक्षिप्त) मंगला चरण

Shabdkosh शब्‍दकोश

उ-ऊ छत्‍तीसगढ़ी हिन्‍दी शब्‍दकोश

उ उँकर (सं.)  उकडू, पैरों के पंजों के बल बैठना। उँचान (सं.)  ऊँचाई। उँटवा (सं.)  ऊँट। उँटिहार (सं.)  ऊँटी दे.  लेकर गाड़ी के आगे-आगे चलने वाला व्यक्ति। उंडा (वि.)  औधा, मुँह के बल। उकठना (क्रि.)  बीती घटनाओं को सुना-सुना कर गाली-गलौज करना। उटकना (क्रि.)  दे.  उकठना उकेरना (क्रि.)  निकालना, रस्सी आदि की बटाई खोलना। उखरू […]

आ, इ, ई, छत्‍तीसगढ़ी हिन्‍दी शब्‍दकोश

अ – छत्‍तीसगढ़ी हिन्‍दी शब्‍दकोश

कहानी

नवा साल : कहानी

जोहत कका ह हमर तीर-तार भर म नामही मंदहा बढई के नांव ले जाने जाथे। फेर ओकर गुन ले जादा ऐब ह ओकर चिन्हारी बनगे हवय । ओला खाय बर अन्न भले झन मिलय फेर संझउती बेरा म ओला दारु होना चाही। घर म बडका बेटा ललित,मंझली बेटी किरन अउ छोटकू बेटा हेमंत के संग […]

नवा बछर के शुरुआत : कहानी

इस्कूल : छत्‍तीसगढ़ी कहानी

मुसवा के बिहाव