कहानी

हाय रे मोर मंगरोहन कहिनी – डॉ. सत्यभामा आड़िल

बीस बछर होगे ये बड़े सहर मं रहत, फेर नौकर-चाकर मिले के अतेक परेसानी कभु नई होईस। रईपुर ह रजधानी का बनिस, काम-बूता के कमती नई। भाव बढ़गे काम करईया मन के। घर के काम बर घलो कोनो नई मिलय। कहूं मिलगे एकाध झन, त सिर ऊपर करके, जबान लड़ाके बराबरी मं बात करथें। उड़िया […]

कहानी

अंधरी के बेटा – विट्ठलराम साहू ‘निश्छल’

एक झन राजा रिहिस। ओ हा अपन राज म बजार लगवाय। ओखर फरमान रिहिस कि जऊन जिनिस हा सांझ के होवत ले नई बेचाही तौन जिनिस ला राजा के खजाना ले पइसा दे राख लेय जाय। एक झन मूरति बनईया करा राक्छसिन के मूरति बांचगे ओला कोन्हों नई लीन। जान-बूझ के माछी कौन खाय? पइसा […]

कहानी

नान्हें कहिनी गुरुजी के सीख – राघवेन्द्र अग्रवाल

”बेटा तें ह किसानी म झिन पर गा, ऐमा गुजारा नि होवय, कछेरी म बाबू बन जा त रटाटोर पइसा पाबे अउ हमर हालत सुधर जाही। ओकर बाबू कथे-ददा! ते किसानी ल अपन ढंग ले करत रहे, में ह तो किसानीच्च करिहा। ते देखबे तो कइसे हमर दसा ह नि सुधरही तेला। ए क दिन […]

कहानी

गुरुबाचा कहिनी – किसान दीवान

एक दिन अपन ल संवासे नी सकिस सुखरू। घातेच किलोली करके भतीजा के बिहा में संघरना जरूरी हे, ओखर दई-बाप नइए, अइसे ओखी करके, छुट्टी मा गिस। कन्हैयालाल मानेजर नंगत सुलहारिस, सेधे के लईक उल्था देईस। जल्दी तरक्की देय के वादा करिस। फेर सुखऊ मानबे नी करिस अउ आज दू हफ्ता होगे। नउकरी खोजत किंजरत […]

व्यंग्य

जोड़ी! नवलखा हार बनवा दे

”मोर चेहरा के उदासी ह परोसी मेंर घलो नइ दोबईस। मोला अतक पन उदास कभू नई देखे रिहीस होही। परोसी ल मैं अपन समसिया ल गोहरायेंव त कहिथे ”अरे, ओखर बर तैं संसो करत हस जी?” पहिली ले काबर नई बतायेस, चल आजे चल न मैं तोला हजार पांच सौ म बढ़िया हार देवा देथंव। […]

गोठ बात

हमन कहां जात हन – सुधा वर्मा

रामकुमार साहू के कविता संग्रह के भूमिका लिखत रहेंव त ओमा एक लेख ”तईहा के ला बइहा लेगे” ल पढ़त-पढ़त सोचेंव के ये लेख के जम्मों बात ल मैं ह अपन मड़ई म अलग-अलग रूप मा दे डरे हवं। फेर पढे क़े बाद उही सब बात ह दिल दिमाक मा आए ले धर लीस। गर्मी […]

कहानी

पढ़व, समझव अउ करव गियान के गोठ -राघवेन्द्र अग्रवाल

एक बखत के बात ये, संतखय्याम ह अपन एक झन चेला संग घनघोर जंगल के रद्दा ले जात रहिस हे। नमाज पढे क़े बेरा म दूनू गुरू-चेला नमाज पढ़े बर बइठिन तइसने उनला बघवा के गरजना सुने बर मिलिस अउ थोरेकच्च म देखिन के बघवा ह उंकरे डहर आवत हे। चेला ह डर के बारे […]

व्यंग्य

मोर सुआरी परान पियारी

”संसार के सब दाई-ददा हा बहू, बेटा, नाती -नतरा के सुख भोगे के सपना देखथे। ओ मन रात -दिन इही संसो म बुड़े रहिथे कि मोर औलाद ल कांही दु:ख-तकलीफ झन होवय। बने-बने कमावयं खावयं। बने ओनहा पहिरे। बने रद्दा म रेंगय। दुनिया म हमर नांव जगावंय। कहिके अपन मन भूख-पियास ल सहिके औलाद के […]

कहानी

तीजा के लुगरा – बन्धु राजेश्वर राव खरे

”सालपुर तीजहा लुगरा के गिरत दसा ल देखके एसो ओला नइ सहइस। लुगरा ल अपन तन म मन मार के लपेटे रिद्धहस फेर ओखर मन हर नंगत काच्चा होगे। ओखर ले नई रेहे गीस तब अपन भाई ल सुना दीस, मैं अभी पाठ के भाई होतेंव तब ये पुरखौती जहिजाद के दू बांटा होतीस। मैं […]