कविता

मोर महतारी (मेरी माँ)

मोला दसना म सुता केखोर्रा खटिया म सुतइया मोर महतारीआज तैं हलकड़ी छेना के दसना म सुते हसअपन दूनो आंखी ल मुंदे हसजमो मया मोह ले तैं छोड़ देहेहमन ले तैं मुंह ल मोड़ लेहेए मोर महतारीकइसे भुलाहूँ…नौ महीना कोंख म मोला तैं राखेहमन करा सुख दुख ल तैं भाखे जब आंखी ह खुलीस त […]

कविता

मोर भाखा

मोर भाखा सँग दया मया के सुग्घर हवै मिलाप रे । अइसन छत्तीसगढ़िया भाखा, कऊनो सँग झन नाप रे ।। येमा छइहाँ बम्हलई देबी, बानबरद गोर्रइयाँ के देंवता धामी राजिउलोचन सोमनाथ जस भुँइया के ये मां हावे भोरमदेव जस, तीरथ के परताप रे । अइसन छत्तीसगढ़िया भाखा, कऊनो सँग झन नाप रे ।। दमऊ खँजेरी […]