व्यंग्य

येदे पटवारी ला फेर मार परे हे काबर कि रावन नई जरे हे

संगी हो जोहार लेहु, हमर पटवारी भईया के गोठ ला आघू बतावत हवं, पटवारी भईया ला समाज सेवा करे के बिमारी ता हवय, कईसनो भी बुता हो ही वो हा नई करवं कहिके नई कहय, सरलग १० दिन भले लग जाये फेर बुता सामाजिक होना चाही, बिना खाए पिए लंघन भूखन रही के, करही।  अभी […]

व्यंग्य

मनखे के भाव

बड़ बिहनिया मुंदरहा ले बेर निकले के पहिली नागर ला खान मा धरे चौरसता ले आघू कोती अरहू कहिके हफरत नाहकत रेहेंव ततके मा एक ठन मोटर हा आके मोर सन हबरगे। बीच रसता मा मुहु केर्रा गिरेंव मोटर के आघू घलो पेचक गे। मोर उठते, मोटर ले एक झन उतरिस ललछरहा मेंहा देखत केहेंव […]

व्यंग्य

नई उतरिस बिच्‍छी के झार पटवारी साहेब ला परगे मार

जोहार लओ संगी हो हमर पटवारी भईया हा नवा-नवा उदिम लगावत रहिथे,थोकिन मा फेल घलोक हो जथे,ए बेरा ओ हा सोच डारिस पराकृतिक ह बने हवय, अनप घर मा एक ठक बोरड ला बनवा के लगा दिस, पटवारी के परकिरित चिकित्सा सनसथान, इंहा बिना दवई,सूजी,गोली के फोकट मा जम्मो बीमारी के इलाज होथे, समाज सेवा […]

व्यंग्य

अडहा बईद परान घाती : पटवारी साहेब जब डाग्‍डर बनिस

संगी हो जोहार लओ हमर पटवारी भईया हा जम्मो जमाना ला सुधारे के ठेका ले डारे हवय अपन परन के एकदम पक्का हवय,”परान जाये पर बचन न जाये तईसे,एही सुधारे के बुता मा कईयों बेर मार खा डारे हवे पर सुधरे नहीं,एक घांव हमर गांव मा राजीव दीक्षित आये रिहिसे,स्वदेशी आन्दोलन चलावे, तौन हा बता डारिस […]

व्यंग्य

फोकट के गियान झन दे सियान :पटवारी के गोठ-बात

संगी हो जोहर लओ काली के गोठ ला आगे बढ़ावत हौं संगी हो, हमर पटवारी भैया के किस्सा नई सिराय हवे, एखर तो एक ले एक किसा हवे, पटवारी ला पढ़े के बहुत सौउंख हवय, सबे तरह के पुस्तक ला पढ़थे, पुस्तक पढ़ना घलो एक ठक बीमारीच आये, घर ले पटवारीन हाँ बाजार भेजते साग […]

व्यंग्य

पईधे गाय कछारे जाए,पटवारी साहेब ला कोन समझाए.

संगी हो जोहार लओ देखथवं मेहा आज कल समाज सेवा बड चालू होगे हवय, जहाँ देखबे उहां समाज सेवा,ये दे समाज सेवा हा एक ठक बहुत बड़े बीमारी हवय,छुतहा रोग हे,कई झन बड सौख ले करथे कई झन अपन जी पिरान ला बचाए बर करथे,हमर एक झन मयारू मितान हवय,हमन ओला पटवारी भइया कहिके बलाथन, […]

व्यंग्य

किसीम किसीम के साहित सेवा अउ भोभला बर चना चबेना

संगी हो जय जोहार, में हाँ दू चार दिन पहिले ये बुलाग के सेवा ले हवं. एखर ले पहिले में हाँ नई जानत रहेवं काला बलाग कथे, जानेवं ता महूँ हाँ अपन गोठियाये के खजरी ला मेटाए बर ये दे बूता ला कर डारेवं, मोर डिमाग ले बुलाग के बूता हाँ बुलाग कम, बुलक दे […]

गोठ बात

कइसे होही छत्तीसगढ़िहा सबले बढ़िहा?

    ”सतरूहन या सतरोहन नाव त इसकूल म गुरुजी ह सुधार के शत्रुघन या शत्रुहन लिख देथे। अउ एक ठन छत्तीसगढ़ी नाव के राम नाम सत्त कर देथे। आज तक कोनो अइसना नाव लिखइया मनखे छत्तीसगढ़ म नई हे। भावना के छोड़ कोनो दूसर बात नो हे।”   छत्तीसगढिहा ल भाखा के रूप म […]

कविता

उठ जा बाबु आंखी खोल

उठ जा बाबु आंखी खोल होगे बिहनिया हल्ला बोल सूत उठ के बासी खा थारी धर के इस्कूल जा इस्कूल जा के पट्टी फॉर अऊ पेन्सिल ला कस के घोर मास्टर ला तैं गारी देबेचाक चोराके खीसा भरबेसरकारी पुस्तक ला तैं चीरबांटी खेलबे बनबे बीरपढ़े के बेर पेट पिराहीदांतों पिराही,मुडो पिराहीभात खा के दुक्की भागमनटोरा […]

कविता

जय ३६ गढ़ महतारी

जय जय ३६ गढ़ महतारीरिता होगे धान कटोराजुच्छा पर गे थारीफिरतु हाँ फिलिप होगेहवय बड़ लाचारीओकर घर चुरत हे बरा,सोहारीमोर घर माँ जुच्छा थारीजय जय ३६ गढ़ महतारी खेत खार बेचे के फैले हे महामारीलुट-लुट के नगरा कर दिसनेता अऊ बेपारीगंवईहा मेट हे दारू माबेचावत हे लोटा थारीजय जय ३६ गढ़ महतारीरिता होगे धान कटोराजुच्छा […]