गीत

रामेश्वर वैष्णव के कबिता आडियो

(राजनीतिज्ञो ने जो पशुता के क्षेत्र मे उन्नति की है उससे सारे पशु आतंकित है)

पिछू पिछू जाथे तेला छटारा पेलाथे गा
आघू म जो जाथे तेला ढूसे ला कुदाथे गा
पूछी टांग के कूदय मोर लाल बछवा
मोर लालू बछवा
जब जब वो बुजा हा गेरुआ ले छुटे हे
तब तब कखरो गा मुड कान फुटे हे
हाथ गोड ना सही तभो ले दांत टुटे हे
डोकरा अउ छोकरा ला खूदय,
पूछी टांग के कूदय मोर लाल बछवा
चिंग चडाग ले अस फलांग ले कूदय, मोर …..
खोरवा लहुट गे वो जउन ला जोहारे हे
डिंगरपुर ला कचार तको डारे हे
चारा जिहा देखे हे उन्हे मुह मारे हे
इन्ही आहु इन्ही आहु आहु
अउ कुच्छु नइ सुझय मोर लाल बछवा
उप्पर जा के वो थन ला चिचोरे हे
कोटना के पानी मा वो घिन ला उभोरे हे
रबडी मा सारी खानदान ला चिभोरे हे
खदबिद खदबिद खद
सब्बो के आंखी मुन्दय, मोर लाल बछवा
रामेश्वर वैष्णव

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