समीच्‍छा

सरग निसैनी म चघ लइका हांसत हे, बादर ले चंदा झांकत हे

पुस्तक समीक्छा सरग निसैनी (लइका गीत) डॉ. पीसी लाल यादव प्रकाशक- दूधमोंगरा, गण्डई, जिला राजनांदगांव मूल्य-10 रुपए ‘सरग निसैनी’ म लइका गीत के पंक्ति हावय। एक-एक गीत ऊपर गोड़ मड़ावत लइका बुध्दिमानी के सरग तक पहुंच जही। निसैनी के हर पंक्ति लइका के पसंद के हावय। अमली गीत लइका के दिल के गीत आय। झोफ्फा-झोफ्फा […]

गोठ बात

छत्तीसगढ़ी लोक कला के धुरी ‘नाचा’

‘जुन्ना समय अउ अब के नाचा म अब्बड़ फरक होगे हे। जुन्ना नाचा कलाकार मन रुपिया-पइसा के जगह मान सम्मान बर नाचयं गावयं। गरीबी लाचारी के पीरा भुलाके कला साधना म लगे राहयं, कला के संग जिययं अऊ मरयं। आज काल में नाचा म दिखावा जादा होथे कला साधना कमतियागे। फिलिम के गाना संग भद्दापन […]

गोठ बात

प्रकृति के नवा सिंगार अउ नवा बछर

सुशील भोले भईया ला सुनव यूट्यूब मा –   विडियो साभार – http://www.youtube.com/user/webmediablog भारतीय नव वर्ष माने चैत महीना के अंजोरी पाख के पहिली तिथि। मोला लगथे हमर ऋषि-मुनि मन प्रकृति के नवा सिंगार ल आधार मानके ए तिथि ल जोंगिन होहीं तइसे लागथे। काबर ते इही बखत प्रकृति ह पतझड़ के बाद नवा सिंगार […]

गोठ बात

सुन्ना कपार – उतरगे सिंगार

”मास्टरिन के बात ल सुन के मैं ह खुस होगेंव के देखव तो अब इंकर मन म जागे के चिनगारी उठत हे। जेन माइलोगिन निंदा-चारी के परवाह नई करके समाज अउ परिवार संग जुझथे वो ह अवइया कतेक माइलोगिन मन बर रद्दा बना देथे। कतको सिक्छित माइलोगिन मन ल कपार ल जुच्छा नि राखंय अउ […]

गोठ बात

शिवरीनारायण के मेला

इहां एक शिवलिंग हावय। ऐसे कहे जाथे के ये शिवलिंग म सवा लाख छिद्र हावय। येमा सिक्का डाले ले सिक्का के आवाज तो आथे फेर वो हर कहां जाथे ये रहस्य हावे। इहां माघ पूर्णिमा ले महाशविरात्रि तक मेला भरथे। शिवरीनारायण नाम में ही भक्त अउ भगवान के मिलन के बात हे, त एखर पौराणिक […]

कहानी

हमर होरी – कहिनी

काय करबे बिधाता के आघु मा काकरो थोरे चलना हे। जिनगी के मरम ला निभाना हे। तब रोवत होय ते हासत जिये बर परही। अइसने जेकर करम हा फुटहा रिथे तेहर होस संभाले तहाने जियत भर ले मुड़ धरके रोवत राह। कतको कमा ले पईसा-कौड़ी भरे-भरे परवार के रहात ले घलो जिनगी मा कोनो न […]

गोठ बात

जुन्ना सोच लहुटगे हमर रंग बहुरगे

सर्दी के मौसम के जाती अउ गरमी के आती के बेरा एक संधिकाल आय। ये संधिकाल के मौसम के ‘काय कहना?’ ठंड के सिकुड़े देह मौसम के गर्माहट म हाथ गोड़ फैलाए ले लग जथे। खेती के काम निपट जथे। चार महीना बरसात अउ चार महीना ठंड म असकटाए मनखे, खेती के काम ले थके […]

कविता

कबिता : होरी के उमंग नोनी……

होरी के उमंग नोनीमाते हावय चारों कोतीहोरी के उमंग नोनीरंग अउ गुलाल देखउत्ताधुर्रा मातत हे।खुसी अमरावत हावयघर-घर, गली-गलीलइका अउ सियान सबफाग गीत गावत हे।रंगगे होरी ह सिरतोहोरी के उछाह म वोमया-मया मया-मयाडहर पहर बगरत हे।तरिया सुहावत हावयअमरइया ममहावत हावयकोइली हा गुरतुर-गुरतुरराग ल अलापत हे।झूमत हावय रुखराईकरत हावय अगुवाईहोरी म गोरी हा कइसेजोड़ी सोरियावत हे।जुड़-जुड़ पानी […]

कविता

कबिता : होली के रंग म

लइका सियान जम्मो नर नारीउड़ाए गुलाल पिचकय पिचकारीसंगी साथी सबो कोन्हों संग मरंगे हाबे ग होली के रंग म। बजावत हे नंगाड़ा गावत हे गानादही ले ले मही ले ले गुवालिन के रागपहिरे हावे फुंदरा बाला नवा ढंग मरंगे हाबे ग होली के रंग म। बैरी भाव ल छोड़ के बिना मीत मितानहोलिका माई ल […]

गोठ बात

जानबा

ये दिन हा कतका धन्य हे के 14 फरवरी 2010 दिन इतवार म महावर धरमसाला धमतरी के बडक़ा ठउर म छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति रायपुर (छत्तीसगढ़) के सवजन ले 14वां वार्षिक साहित्य सम्मेलन 2010 के आयोजन करे गिस। ये सम्मेलन के रद्दा सबो साहित्यकार जुन्ना अउ नवा सन देखत रहिथे। एक बछर पाछू अइसन समागम बने […]