कविता

जिनगी ल बचाव भइया : जितेन्द्र कुमार साहू ‘सुकुमार’ के कबिता

जिनगी बड़ कीमती हे बचाव भइयारही-रहिके मुंहू म आगी झन लगाव भइयातुहर पर्डरा दांत होही बिरबिट करियागुटखा, तम्बाकू झन खावव भइयाबड़ मेहनत करके सकेले हाबे पुरखा मनधनहाल धुंगिया म झन उड़ावव भइयाबेरा ले पहिली हो जहू तुमन डोकराअतेक जादा झन इतरावव भइयाये सबो नसा के गलत परभाव हरे ताव म अतेक झन चिचयाव भइयातुमर बढ़िया […]

व्यंग्य

नवा बैला के चिक्कन सिंग चल रे बैला टिंगे-टिंग : किरकेट के कहिनी

पूरा संसार म भारतीय क्रिकेट के नाम इहां तक होगे के आस्ट्रेलिया टीम के कप्तान रिकी पोंटिंग के हे लगिस कि भारत के बिना क्रिकेट में मजा नइए। सन् 2011 में फेर विश्वकप बर क्रिकेट मैच होही अउ भारत उपमहाद्वीप के चार देस लंका पाकिस्तान बंगलादेश अउ भारत में से एक ला मेजबानी करे के […]

व्यंग्य

सबके अपन रंग

पेड़ पौधा मन अपन रंग बदलथे लोग अपन सुवारथ बर खाये पीये के जीनिस ला रंगा के बेचत है। जीव जंतु मन अपन रंग बदलथे। टेटका मेचका मन अपन दुसमन ला चकमा देबर रंग बदलके वाला होथे। बिगर बुध्दिवाला मन अपन रंग बदल सकत हे, त बुध्दि वाला मनखे अपन रंग ला बदले बर काबर […]

कविता

श्यामू विश्वकर्मा के कबिता : मन के आंसू मन म पोंछ ले

मन के पीराकर देथे तन ल खोखलाचाहे होवय जवाननई छोड़य लईका-डोकरा।घुट-घुट के बेंगवाजइसे येती-ओती तलमलाथेनिकाल देबे कुंआ ले ये बेंगवाबिन पानी के फड़फड़ाथे॥तस मन के पीराबन के भाला तन ला कोचयमने हर बिमार पड़े हेत तन के पिरा कोन सोचय।ये मन के पिरा हर,मरत ले नई छुटयखाले चाहे कतको किरियामया हर नई टुटय॥नइये चिनहारी मया […]

गोठ बात

राघवेन्द्र अग्रवाल के गोठ बात : जान न जाइ नारि गति भाई

एक ठन गंवई रहय। उहां मनसे परेम लगा के रहत रहंय। एक दुसर के सुख-दु:ख म आवंय-जायं, माई लोगिन, बाब पिला मन घला संघरा गुठियावयं बतावयं, कोनो ल काकरो ऊपर सक-सुभा नि रहय, फेर परेम के पूरा ह काला अपन डहर तिर लिही तेला कोनो नि जानंय, इही कथें आयं, कहत बांय हो जाथे कहिके। […]

कविता

रघुबीर अग्रवाल पथिक के छत्तीसगढ़ी मुक्तक : चरगोड़िया

छत्तीसगढ़ के माटी मा, मैं जनम पाय हौं।अड़बड़ एकर धुर्रा के चंदन लगाय हौं॥खेले हौं ये भुँइया मा, भँवरा अउ बाँटी।मोर मेयारूक मइया, छत्तीसगढ़ के माटी॥ छत्तीसगढ़ मा हवै सोन, लोहा अउ हीरा।हवैं सुर, तुलसी, गुरु घासीदास, कबीरा॥हे मनखे पन, अउ अइसन धन, तबले कइसन।चटके हवै गरीबी जस माड़ी के पीरा॥ कहूँ खेत के धान, […]

कहानी

कलजुगहा बेटा : नान्हे कहिनी

रतिहा के दस बजे के बेरा दसरी डोकरी के खैरपा ल कोनो लाठी मं ठठाइस अऊ जोर-जोर ले गारी देवत चिल्लाइस त बेचारी ह खटिया ले उठिस। खैरपा ल खोलिस, तभे ओखर जवान बेटा ह मन्द के नसा म गिरत-हपटत भीतरी आइस। बेटा के मुंह ह मंद के दुर्गन्ध म बस्सात रहय। बेटा ह चिल्लाइस […]

गोठ बात

कारी गाय अउ ओखर दूध

 कारी गाय के बहुत महत्व हावय। कारी गाय के तो अतका महिमा हे के वोकर दूध अऊ कारी तुलसी के पत्ती ल छै महिना तक खाय त कैंसर तक ठीक हो जाथे अइसे काशी नगरी के प्रख्यात वैद राजेश्वर दत्त शास्त्री के कहना हे। एक समे रहिस जब मनसे प्रकृति के संग म रहय तेखर सेती […]

कविता

कबिता : नवा हे बिहान

मोर मयारु छत्तीसगढ़ गजब हे महान गा। धरती दाई के सेवा करे लइका, सियान गा॥ तन म पसीना ओगार के चोवा रुकोवत हे। खेत-खार म मोर नगरिहा, करम के बीजा बोवत हे॥ ये अड़हा किसान ल नइए गरब गुमान गा। धरती दाई के सेवा करे लइका, सियान गा॥ कोलकी-कोलकी बइला रेंग, बइला के सिंग म […]

कहानी

कहिनी : चलनी में दूध दुहे, अउ करम ला दोस दे

छत्तीसगढ़ के जुन्ना हाना ह बड़ प्रभावकारी खुद जीवन के उपयोगी होथे। चलनी में दूध ल दुहबे तब का फायदा होही? पूरा दूध जमीन ऊपर गिर जाही। ये नुकसान ल देख के आदमी अपन भाग्य ल दोस देथे। का करबो भाई! मोर किस्मत खराब हे। पूरा दूध भुइंया में गंवागे। अइसने एक गांव में दुकालू […]