गीत

मन डोले रे मांग फगुनवा …. बादर के दिन म फागुन लावत हें भाई लक्ष्‍मण मस्‍तुरिहा

छत्‍तीसगढ़ के नामी कबि गीतकार साहित्‍यकार लक्षमण मस्‍तुरिहा कवि सम्‍मेलन म – आरंभ मा पढव : – साथियों मिलते हैं एक ब्रेक के बाद

कहानी

पलायन (कहिनी)

हमर छेत्र म बियासी होय के बाद विधाता ह रिसागे तइसे लागथे। बरसा के अगोरा म हमर आंखी पथरागे, बरस बे नई करीस। सब्बो धान-पान ह मरगे। गांव के जम्मो किसान बनिहार -भूतिहार मन रोजी-रोटी के तलास म गांव ले पलायन करगे। सब आने-आने सहर डाहर चल दिन हे। तुंहर समधी घर के मन घलो […]

कविता

लीम चउरा के पथरा : कबिता

लीम चउरा के पथरा बिकट चिक्कनखड़भूसरा रहिस होगे कइसे बड़ चिक्कनओ तो जानत हवय सबके अन्तर मन। पंच-पटइल बइठ नियाव करिससुन्ता सुम्मत के नवा रद्दा गढ़िस। उधो-माधो के भाग ह खुलिससरकारी योजना म साहेब दूनों के नाव लिखिस। मंगलू बुधियारिन के भांवर परिसइही मेर दूनो झन के पिरित सिरजिस।बिहने ले सांझ होथे गजब तमासाभौंरा-बांटी, बिल्लस […]

कहानी

बेटी दमाद के करनी : नान्‍हे कहिनी

”बरतिया किथे कईसे गउंटिया जानत हस, हमन राउत हाथ के पानी नी पीयन तेला। हमन बड़े कबीरहा हरन। हमन नई खान तोर जेवन ल। हमन छोटे नई होवन। गउंटिया हा हाथ जोर के खड़ा होगे। फेर बराती मन टस के मस नी होईन। लगिन के बेरा हा निकलत रिहिस। दमाद बाबू बराती मन ल किथे […]

कहानी

दू ठो नान्हे कहिनी

आदिमानव सुकारो के छुट्टी झटकुन हो जथे। रद्दा म खेलत-खेलत घर आथे अउ अपन बस्तर ल पठेरा म मड़हा के हडिया-कुडेड़ा ल मांजे बर बोरींग डाहर जाथे, रातकुन घर म पढ़ेबर बइठेन ताहन ओकर बबा ह पूछथे, तो गुरूजी मन का पढ़हईस गोई! त सुकारो ह लजावत कहिथे- आदिमानव के बारे म बतइसे। आदिमानव मन […]

कविता

डुमर डारा : कबिता

कोचके भौजी भइया लाकइबे जाके सब पाराआज मड़वा गड़ही भाई के काटे जाहा डुमर डारा। हरियर-हरियर छाय लागहीढेड़हा-ढ़ेड़हीन ल जागे लागहीसजाही मंगरोहन पिढुहा फुफुदीदी धरे पर्राभौजी के बहनी उड़ावय गर्राभड़त-भड़त थक गे समधीनचाबत हे बहेरा, हर्रा। लाली-लाली पहिने लुगरीदीखत हे सोन परी लिबिस्टिक लगाय समधीनपहिने सोनाटा घरी। आय हे सब भाई मनदेखे डिपरा खाल्हे पाराकहत […]

कविता

कबिता : चंदा

रोज रात के आवै चंदा,अउ अंजोर बगरावै चंदा।सुग्घर गोल सोंहारी बनके,कतका मन ललचावै चंदा।होतेच संझा चढ़ अगास मा,बादर संग इतरावै चंदा।डोकरा कस फेर होत बिहनिया,धीरे-धीरे जावै चंदा।तरिया पार के मंदिर ऊपर,चढ़के रोज बलावै चंदा।पीपर के डारा मा अटके,कभू-कभू बिजरावै चंदा दिनेश गौतमवृंदावन 72, श्रीकृष्णविहारजयनारायण काबरा नगर, बेमेतरा दुर्ग आरंभ म पढ़व :- कठफोड़वा अउ ठेठरी […]

कहानी

सरग सुख

मुकुल के जीव फनफनागे। अल्थी-कल्थी लेवत सोचिस, अलकरहा फांदा म फंदागेंव रे बबा। न मुनिया संग मेंछरई न दई -ददा के दुलार। ये सरग लोक घला भुगतउल हे। ओला लागिस कुछ बुता करतेंव, नांव कमातेंव, पढ़-गुन के हुसियार बनतेंव। वोहा देवदूत ला कथे- मोला लागथे, जिनगीच हर बने रिहिसे। एक झन पोठहा गौंटिया के एकलौता […]

फिलमी गोठ

अश्लीलता के सामूहिक विरोध जरूरी हे

फिलमी गोठ आधा-आधा कपड़ा पहिरे टुरी मन के दृश्य के बहिष्कार होना चाही। अभी एखर बर कुछु नई करेन त ये मान लन कि ये बाढ़ हा हम सब ला बोहा के ले जाही। हमर मन बर बताए अउ देखाए बर कुछ नई रहहि, ऊटपटांग लिखना फिलिम के कहानी म मौलिकता के अभाव दिखना, दृस्य […]