गोठ बात

नंदावत हे लोककला, चेत करइया नई हे…

गीतकार लक्ष्मण मस्तुरिहा से खास बात ‘देवार डेरा’, ‘चंदैनी गोंदा’, कारी बर लिखे गीत अऊ कवि सम्मेलन मा सोझेच अपन मन के बात कहइया गीतकार कवि लक्ष्मण मस्तुरिहा के कहना हे कि नवा राज बने नौ बछर बीतगे फेर छत्तीसगढ़ के लोककला के चिन्हारी करइया नई मिलीस। जतका बड़का आयोजन होइस ओमा दिल्ली, बम्बई के […]

कविता

छत्तीसगढ़ के राजिम धाम

बड़ भाग मानी मानुष तन।नंदिया तरिया कहत हे बन॥जग म होगे कुंभ नाम।मोर छत्तीसगढ़ के राजिमधाम॥ऋषि, मुनि के दरसन पाए।दूर-दूर ले मनसे आए।सरग ले भगवान कुंभ मेला आगे।सब नगर म मंगल छागे॥देख के महादेव कुंभ के गुन गाईचजेन नहाइच त्रिवेणी म तेन सरग पाइच॥इंहा सब सरग लागे।जगा-जगा मंगल गीत बाजे।महानदी सोढुर, खारून नदिया नाम।मोर छग […]

गोठ बात

दारू बंदी के रद्दा अब चातर होवत हे

 हमर प्रदेस मा चारो मुड़ा कारखाना उपर कारखाना लगत हावय, धान के कटोरा छत्‍तीसगढ़ मा किसानी जोंत के रकबा दिनो-दिन घटत जावत हावय। सहर ले लगे गांव-खेत मन ला बिल्डिंग हा लीलत हावय अउ जंगल-ड़ोंगरी के जमीन मन ला कारखाना हा लीलत हावय। बांचे खोंचे किसानी के जमीन हा कारखाना के चिमनी ले उड़ात करिया […]

कहानी

दाई अउ बबा के वेलेन्टाइन डे – कहिनी

”सुफेद बबा हा अतेक सुंदर बंसरी बजावय कि ओकर सोर दस कोस ले बगरे रहीस। का रामायन मण्डली, का नाचा मण्डली, कीर्तन, राम सप्ताह सबे जगह ले बबा बर बुलावा हा आवय। एती दाई ला बबा के बंसरी नई सुहावय। वइसने बबा ला घलो दाई के घेरी-बेरी दखल देवई हा नई सुहावय। दाई हा तो […]

कविता

कबिता : मोर अंगना मा बसंत आगे ना

आगे बसंत आगे ना, मोर अंगना मां बसंत आगे ना पियर-पियर आमा मउरे, लाली-लाली परसा फूले मन मंदिर महकन लागे ना, आगे बसंत आगे ना। मुच-मुचावय फगुनवा, मुच-मुचावय फगुनवा मन न ल महर-महर महकावय फगुनवा फगुनवा के रंग बरसाय बर बसंत आगे ना। महुवा के रस मन ला मतावन लागे ना बैरी बसंत हिरदे मां […]

कविता

कबिता : बसंत गीत

मउरे आमा गमके अमरइया झेंगुरा गावथे छंद। गुन गुनावत भंवरा रे चुहके गुरतुर मकरंद॥ प्रकृति म समागे हे, ममहई सुगंध। आगे संगी येदे आगे रे, रितु राज बसंत॥ पेड़ ले पाती हा झरगे हे। तेंदू लदा-लद फरे बोईर बिचारी निझरगे हे। परसा ललियावत खड़े॥ चना गहूं झुमय नाचय जी, मउहा माते मंगत। आगे संगी ये […]

कहानी

कहिनी फूल सुन्दरी राजकुमारी

ओकर बइसाखी मन फेंका गय रहिन। पीछू-पीछू एक झन टूरी आत रहिस तेन ह ओकर तीर म आइस। ओला उठा के बइठारिस अउ बइसाखी मन ल ला के दिस। लतेल के साबूत गोड़ म लागे रहिस तेला देखके ओहा कहिस- ‘अरे तोला तो बने लाग देहे हे।’ अतका बोल के ओकर घाव ल पोंछे अउ […]

व्यंग्य

बियंग : पारसद ला फदल्लाराम के फोन

जय हो छत्तीसगढ़ महतारी। हम गरीब मन ऊपर तोर अइसने छइंहा रहय दाई। हमर छत्तीसगढ़ के गरीब मन अइसे-वइसे नो हंय पारसद जी। वो मन उसना चाउंर ल उहुंचे कंट्रोल वाले ल बेच देथे। कन्ट्रोल मालिक के घलो पौ बारा। हां हलो… कोन… पारसद जी? हां, मैं फदल्ला राम बोलत हों। अरे नहीं… जदल्ला राम […]

गोठ बात

मन के लाड़ू

रोज बिगड़ई म परिसान होके बिदही तीस हजार म मेटाडोर ल बेच दीस। घर म न चांउर रहीस न दार, उई पइसा ल सब उड़ात गिस। सब पइसा सिरागे त बिदही रोजी-रोटी कमाय जाय लगिस।’समारू ल गांव के सब छोटे बड़े मन बढ़िया मान गौन करयं। समारू हर तको अपन ले बड़े के गोड़ छू […]

गोठ बात

माँ-छत्तीसगढ़ के महत्व

जेन ह जिनगी भर लइका ल देते रहिथे। तभे तो प्रसाद जी कहे हे अतेक सुग्घर के मन म वोला गुनगुनाते रहाय तइसे लागथे इस अर्पण में कुछ और नहीं, केवल उत्सर्ग छलकता है। मैं दे दूं और न फिर कुछ लूं, इतना ही सरल झलकता है। व्यास जी कहे हे- ‘गुनी लइका ह दाई […]