कविता

महतारी के ममता

श्रध्दा के राजिम भारत, समानता के लोचन आय। राम सेतु कस प्रेम सेतु ला, कोनो हा झन टोरन पाय॥ भक्ति के भारत मा मइया, इरसा नजर लगावत हे। स्वारथ के टंगिया मा संगी, कुटुम्ब काट टलियावत हे। रावन, कंस फेर कहां ले आगे, लिल्ला बर काबर सम्हरत हव। राम, कृष्ण के भुइंया मा, संगी, कबीर […]