गोठ बात

कामकाजी छत्‍तीसगढ़ी मोर बिचार

पाछू 29 जनवरी के दिन छत्‍तीसगढ़ राजभाषा आयोग अउ स्‍वामी स्‍वरूपानंद शिक्षा महाविद्यालय, भिलाई के संघरा उजोग ले ‘कामकाजी छत्‍तीसगढ़ी के स्‍वरूप अउ संभावना’ विषय म गोष्‍ठी के आयोजन होए रहिसे। ये कार्यक्रम म छत्‍तीसगढ़ी के जम्‍मो माई सियान मन सकलाए रहिन हावय। संगोष्‍ठी म सब मन अपन अपन बिचार रखिन अउ संभावना के उप्‍पर […]

कविता

पानी हे अनमोल

भईया, बड़ कीमत के बोल। पानी हे अनमोल॥ पानी ले हे ये जीवन। नदिया, सागर, परबत, बन॥ पानी ले जिनगी हरियर हे। खुसियाली घर-घर हे॥ कवन बताही येकर मोल। पानी हे अनमोल॥ जीव जगत सबके अधार। पानी ले ये सब संसार॥ हंसी गोठ सब के सार। येकर महिमा अपरम्पार॥ बचावव बूंद-बूंद तौल। पानी हे अनमोल॥ […]

व्यंग्य

भगवान मोला गरीब बना दे

भक्त ह किहिस-”गरीब होय के अड़बड़ फायदा हे, गरीबी रेखा म नाम जुड़ जाय ताहने का कहना। दू रुपया किलो म चांउर मिल जाथे। सौ दिन के मंजूरी पक्का हे। हाजरी भर दे देव। कमास या मत कमास, तोर रोजी सोला आना मिलही। काकरो ददा म ताकत नइ हे जोन तोर मंजूरी ल कम कर […]

गोठ बात

छत्तीसगढ़ के बिहाव संस्कार-सर्व सामाजिक दायित्व बोध

छत्तीसगढ़ के तीज-तिहार, संस्कार अउ परंपरा म चारो मुड़ा भाव के प्रधानता दिखथे। हर परंपरा म कुछु न कुछु भाव समाय होथे। जब ये परंपरा मन ल ख्रगाहाल के देखथन तब हम अचरज म पड़ जाथन कि हमर पुरखा मन के मन म अतका सुग्घर भाव कहाँ अउ कइसे आइस होही। परंपरा म भाव ल […]

संपादकीय

रचना भेजईया मन बर गोठ

गुरतुर गोठ म प्रकाशन करे खातिर हर किसम के छत्तीसगढ़ी रचना मन के स्वागत हावय. अपन अउ अपन रचनाकार संगी मन के रचना मन ला हिन्दी के फ़ॉन्ट कृतिदेव, श्रीलिपि, चाणक्‍य, या कोनो आन फ़ॉन्ट म एमएस वर्ड फ़ाइल के रूप म, फोंट के नाव बतावत ई-मेल ले हमला भेज सकत हावव. रचना एके ठन […]

कहानी

गियान के जोत

पऊर साल मैं ह बालोद गे रहेंव। बालोद गेस त गंगा मइया के दरसन करना तो जरूरी हे। मैं ह ऊंहा दरसन करे बर आयेंव। मन खुस होगे एकदम खुल्ला जगह हे। बड़े जन अंगना देखके अइसे लगीस के थोरिक देर बइठ जाथंव। मैं ह अंगना के छांव म बइठ गेंव। थोरिक देर म तीन-चार […]

गोठ बात

छत्तीसगढ़ के चिन्हारी गोदना

भारत के उत्तर-परब क्षेत्र मं असम, मध्यभारत, दक्छिन भारत, अंडमान निकोबार- द्वीपसमूह अउ छत्तीसगढ़ मं जुन्ना समय ले गोदना, गोदवाए के चलन रहे हे, फेर छत्तीसगढ़ के गोदना ह पूरा दुनिया मं ”छत्तीसगढ़ के चिन्हारी” बनगे हावय। छत्तीसगढ़ मं अइसे तो सबो जात के मनखे-मन गोदना गोदवात रहिन, लेकिन सबले जादा आदिवासी भाई-बहिनी मन सबे […]

गुड़ी के गोठ

हीरा गंवा गेहे बनकचरा म…

ये ह छत्तीसगढ़ महतारी के दुर्भाग्य आय केवोकर असर हीरा बेटा मनला चुन-चुनके बनकचरा म फेंक अउ लुकाए के जेन बुता इहां के इतिहास लिखे के संग ले चालू होय हे तेन ह आजो ले चलते हे। एकरे सेती हमला आज हीरालाल काव्योपाध्याय जइसन युग पुरुष ल जनवाय के उदीम करे बर लागत हे। ये […]

कहानी

रात कइसे बीतिस

एक झन जोगी बाबा ह घुमत फिरत एक शहर में पहुंचगे। रात होगे रहय अऊ जलकला के दिन रहय शहर के खरपाट ह चारो मुड़ा ले बंद होगे रहय। जोगी बाबा ल जाड़ लागीस। जाड़ में हाथ गोड़ ह कांपत रहय। गरम कपड़ा धरे नई रहय। सुते बइथे बर जगा खोजीस उही कर भट्ठी चुलहा […]

गोठ बात

महतारी के मया

मातृत्व दिवस के बात आइस त मोला बचपन म देखे एकठन नाचा के गम्मत हर सुरता आगे। ओ गम्मत के भाव रहिस कि माँ हर बेटा ल अड़बड़ माया करय। माँ के लालन-पालन, मया-दुलार म बेटा हर सज्ञान होगे। सज्ञान बेटा ल एक झन लड़की ले पियार होगे त ओ बेटा हर ओ लड़की ले […]