कविता

चिनहा

कईसे करलाई जथे मोर अंतस हा बारूद के समरथ ले उडाय चारो मुडा छरियाय बोकरा के टूसा कस दिखत मईनखे के लाश ला देख के माछी भिनकत लाश के कूटा मन चारो मुडा सकलाय मईनखे के दुरगति ला देखत मनखे मन ला कहिथे झिन आव झिन आव आज नही त काल तुहूं ला मईनखे बर […]

कविता

झांझ – झोला

आगी कस अंगरा, दहकय रे मंझनिया । धूकनी कस धूकथे, संझा का बिहनिया ।। हरके बरजे कस, पाना नई खरके । आंखी तरेंरे जब, कडके मंझनिया ।। आगी कस अंगरा ………………… टूकूर – टूकूर देखे, नवा – नवा बहुरिया । भुकूर – भुकूर लागे, धनी मोर लहरिया ।। आगी कस अंगरा ………………… चूह चुहागे पछीना, […]

किताब कोठी नाटक

नील पद्म शंख

अघवा: मया के सपना पिछवा: घोर कसमकस परदा भीतरी ले मया आगि हवय, कोन्हों बुता नी सकंय। मया धंधा हवय, कोन्हो जान नी सकंय।। मया मिलाप हवय, कोन्हों छॉंड़ नी सकंय। मया अमर हवय, कोन्हों मेटा नी सकंय।। जान चिन्हार नील – नायिका पद्म – नायिका शंख – नायक रतन – शंख का मितान कैंची […]

व्यंग्य

मेछा चालीसा

मैं पीएचडी तो कर डारे हंव अब डी-लिट के तैयारी में हौं। मोर विषय रही ‘मेंछा के महिमा अऊ हमर देस के इतिहास’ मोला अपन शोध निर्देशक प्रोफेसर के तलाश हे। कई झन देखेंव पर दमदार मेंछा वाले अभी तक नई मिले हे। मेंछा ह शान के परतीक आय अऊ दाढ़ी ह दृढ़ता के। मेंछा […]

कहानी

कहिनी : बाढ़ै पूत पिता के धरम

सनेही महराज सब नौकरी के दिन पूरा करके गांव म जाके खेती-पाती करे लागिस। ये महाराज ले ओकर महराजिन हर चार आंगुर आघू रहिस। बिहनिया कहूं चाह पियत म राउत आ जातिस। तब अपन चाह पिआई ल छोड़के ओकर बर चाह बनाके दे लेतिस तब फेर अपन पितिस। अइसने घर भंड़वा करइय्या रउताइन के चेत […]

समीच्‍छा हिन्‍दी

छत्‍तीसगढ़ी कथा कंथली : ईर, बीर, दाउ अउ मैं

– डॉ. दादूलाल जोशी ‘फरहद’ लोक कथाओं के लिए छत्तीसगढ़ी में कथा कंथली शब्द का प्रयोग किया जाता है। यह वाचिक परम्परा की प्रमुख प्रवृत्ति है। कथा कंथली दो शब्दों का युग्म है। सामान्य तौर पर इसका अर्थ कहानी या कहिनी से लिया जाता है किन्तु वास्तव में इसके दो भिन्न भिन्न अर्थ सामने आते […]

बरछाबारी

बरछाबारी – 19

भाई चन्‍द्रशेखर चकोर के ‘बरछाबारी’ के 19 वॉं अंक ला हम हमर पाठक मन बर इहॉं प्रकाशित करत हावंन, संगी मन ला हमर ये उदीम कइसे लागिस बताहू. आपमन के उछाह होही त, भाई चन्‍द्रशेखर चकोर ले, ये खातिर अनुमति लेके आघू के अंक मन ला हम अइनेहे प्रकासित करे के सरलग उदीम करबोन … […]

अनुवाद

भाषांतर : एक महिला के चित्र (मूल रचना – खुशवंत सिंह. अनुवाद – कुबेर )

छत्‍तीसगढ़ी साहित्‍य म अनुवाद के परम्‍परा ‘कामेडी आफ इरर’ के छत्‍तीसगढ़ी अनुवाद ले चालू होए हावय तउन हा धीरे बांधे आज तक ले चलत हावय. छत्‍तीसगढ़ी म अनुवाद साहित्‍य उपर काम कमें होए हावय तेखर सेती अनुवाद रचना मन के कमी हावय. दूसर भाखा के साहित्‍य के जब हमर छत्‍तीसगढ़ भाखा म अनुवाद होही तभे […]

समीच्‍छा

छत्तीसगढ़ी के उपन्यास : मोर बिचार

मानुस समाज म हजारों साल ले डोकरी दाई के मुह ले कहिनी कहे के परम्परा रहे हे. हमर पारंपरिक कहिनी मन म देबी-देंवता, जादू-मंतर, विरह-परेम के अचरज मिंझरा किस्सा रहय. वो समें म हमर सियान मन ये कहिनी मन के सहारा लेके समाज ला सीख देहे के उदीम करंय. समें के अनुसार कहिनी के ये […]

समाचार

गोठ बात अउ चिन्हारी सम्मान के आयोजन भिलाई म.

छत्तीसगढ़ साहित्य समिति, जिला इकाई दुर्ग ह राजभाषा आयोग के अध्यक्ष भगवताचार्य पंडित दानेश्वर शर्मा के चिन्‍हारी सम्‍मान करही. ये कार्यक्रम 12 मई, इतवार के दिन संझा 4 बजे, स्वामी स्वरूपानंद कालेज हुडको म राखे गए हावय. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद सरोज पांडेय जी हांवय अउ अधियक्‍छता पद्मश्री डा. सुरेंद्र दुबे जी करहीं. ये […]