कविता

मया के मुकुर

तोर जोबन देख सखी, मुँह मा टपके लार। हिरदे मा हुदहुदी मारे, होवय ऑंखी चार। कैमरा देखत देखत, जोबन छुआय हाथ। हिरदे कुलकत हे मोर, पा सखी तोर साथ।। दिखे सोनकलसा तोर, तरिया मॉंजत बरतन। मैं सुध बुध भुलॉंय सखी, देख तोर नानतन।। कोर दों तोर सखी मैं, कोवर कोंवर बाल।

गोठ बात

छत्तीसगढ़ी गुरतुर अऊ नुनछुर भाखा ए

छत्तीसगढ़ी कविता क्रांति के सुर ला प्रलय- राग मां बांधही? ये जम्मो हर काल के कोरा मां लुकाय हे हमर छत्तीसगढ़ घात सुग्घर हे, अउ छत्तीसगढ़ी गजब के गुरतुर अऊ नुनछुर भाखा ए, ए मा किसान के पबरित पसीना हे, अऊ आंसू के अमरित हे ए हर मनखे के मन के भाव-भलाई हे। छत्तीसगढ़ी कविता […]

व्यंग्य

कामवाली चमेली के पीरा

झपटराम तसीलदार के दू बेटा हे, बड़े के नाव केकरा अउ छोटे के नाव मेकरा। केकरा पढ़े-लिखे म बहुते चतुरा हे, एकरे सेती दू बछर होगे रयपुर कालेज ले बी.ई. पास करके घर म बइठे हे। मेकरा वोकालत करथे। दुनो भई के बिहाव नई होय हे। एक दिन तसीलदार अपन दुनो बेटा ल रथिया कन […]

कविता

दू कबिता ‘प्रसाद’ के

-१- देख के इकर हाल मोला रोवासी आ जाथे, रोए नी सकव मोर मुँह मा अब हाँसी आ जाथे।। आज काल के लइकामन भुला गिन मरजादा, मुहाटी मा आके सियान ला तभो खासी आ जाथे।।

गोठ बात

छत्तीसगढ़ के शिव मंदिर

भोजन में दार भात बांकी सब कचरा। देवता में महादेव अऊ हे ते पथरा॥ छत्तीसगढ़ राज म कतको पुराना शिव मंदिर विराजमान हावे जेकर लेख इहां के बड़े-बड़े साहित्यकार मन बेरा-बेरा में उल्लेख करे हावे। कलचुरि काल अउ सोमवंशी राजकाल में शिवमंदिर सावन महिमा म बिसेस साधना के जगा होथे भगवान शिव हिन्दू धरम के […]

गोठ बात

भक्ति-भाव के महापरब-सावन मास

व्रती मन सोमवार रखथे अउ फल फलहरी खाके उपास ल तोड़थें। शिवलिंग के पूजा में बेल पत्ता के अब्बड़ महत्व हे। पूजा में सिरिफ तीन पत्ती वाला अखंडित बेल पत्ता ही चढ़ाय जाथे। ये तीनों पत्ता ल मन, वचन अउ करम के प्रतीक माने गेहे। शिवलिंग में अधिकतर तीन लकीर वाला त्रिपुण्डी होथे। येहा शिव […]

जीवन परिचय

सुराजी वीर अनंतराम बर्छिहा

सत् मारग म कदम बढ़ाके, देश-धरम बर करीन हें काम। वीर सुराजी वो हमर गरब आय, नांव जेकर हे अनंतराम।। देश ल सुराज देवाय खातिर जे मन अपन जम्मो जिनिस ल अरपन कर देइन, वोमन म अनंतराम जी बर्छिहा के नांव आगू के डांड़ म गिनाथे। वो मन सुराज के लड़ाई म जतका योगदान देइन, […]

गोठ बात

नवा रइपुर मोर रइपुर

हर छत्तीसगढ़ वासी ल अपन प्रदेस उपर गरब करना चाही। काबर के ये प्रदेस ह वोला अइसन गरब करे के भरपूर मउका देथे। ये ह प्रदेस के सांस्कृतिक बल आय जउन वोला अपन मन के बुता करे के अपन मन के बात केहे-बोले अउ लिखे के आजादी देथे। ये सांस्कृतिक ताकत ल हमर प्रदेस के […]

गोठ बात

धंधा

सिक्छा आज दुकानदारी होगे हे, दुकानदारी का? ठेकादारी, ठेकादारी के नीलामी। ‘मोला सहे नहिं जात रहिस अनदेखी भूरि बरत रहि।’ हमर किसान के कोनो नइहे भाई। पइसा वाले के आजो पइसा हे। उंखरे सासन हे, रकस-रकस कमइया किसान, मजदूर ल आजो जानवर, गंवार समझे जाथे। साल भर म पूजा करे जाथे गाय गरूवा के देवारी […]