कविता

बस्तर

हमर हरियर-हरियर बस्तर आज लाल होवथे गरीब ल मुरकेटे बर बड़हर मन के चाल होवथे दंतेसवरी दाई! सुवारथ के सेवइया मन के सर्वनास कर गोली खा-खाके बस्तरिहा चमगेदड़ी के खाल होवथे ताकत अउ सियासत जंगल के धुर्रा बिगाड़ दिस जंगल के दुलौरिन ल सहरिया हुंर्रा बिगाड़ दिस करेजा फाटगे, फेर दाई के ऑंखी म ऑंसू […]

समाचार

’लोक साहित्य म लोक प्रतिरोध के स्वर’ बर रचना आमंत्रित हे

साकेत साहित्य परिषद् सुरगी ह पीछू पंदरह बरस ले सरलग अपन सालाना कार्यक्रम म कोनों न कोनों महत्वपूर्ण विषय ल ले के विचार गोष्ठी के आयोजन करत आवत हे। निर्धारित विषय ऊपर केन्द्रित स्मारिका के प्रकाशन घला करे जाथे। विषय विशेषज्ञ के रूप म आमंत्रित विद्वान मन गोष्ठी म विचार मंथन करथें। इही सिलसिला म 23 […]

समीच्‍छा

करगा – [लघु-कथा संग्रह ] समीक्षा

छत्तीसगढी – महतारी ला धनी – मानी बनाए के उजोग मा कतेक न कतेक वोकर सेवक मन लगे हावैं । वोमन साहित्य के जम्मो विधा म अपन लेखनी ला चलावत हावैं । एकरे गुरतुर फल देखे बर मिलत हे कि आज छत्तीसगढी – भाखा म साहित्य – लेखन के जम्मो विधा म , एक ले […]

जीवन परिचय सुरता

नाचा के सियान : भुलवाराम यादव

भुलवाराम दुर्ग के तीर रिंगनी गांव के अहीर रहिस। भुलवाराम लइकई ले अपन गांव म मालगुजार, गौंटिया मन के गरूवा चरइ अउ गोबर-कोठा के काम करय। जब लइका भुलवा गरूवा चराये बर निकलय त बंसरी संग करमा-ददरिया के गीत गावय अउ सिम-साम देखके बिधुन होके नाचय। भुलवा के नचई अउ गवइ ला देख के नामी […]

व्यंग्य

बड़े दाई

होवत बिहनिया गांव सन्न होगे, बड़े दाई नई रहीस सुनके मोर माथा सुखागे। बड़े दाई के सांवर चेहरा, लटी बंधाये पोनी कस फक्क सफेद बाल, अइसे लागय जइसे पटवा के रेसा के गट्ठा ल बड़े दाई ह अपन मुंड़ म खपल लेहे। ओकर बड़े – बड़े गोटारन कस आंखी मोर आंखी म झलकगे। भरे तरिया के […]