गीत

चिरई बोले रे

घर के छान्ही ले चिरई बोले रे… घर के दाई अब नइ दिखे रे… अंगना ह कईसे लिपावत नइ हे…. तुलसी म पानी डरावत नइ हे…. सूपा के आरो घलो आवत नइ हे…. ढेकी अउ बाहना नरियावत नइ हे…. जांता ह घर में ठेलहा बइठे हे…. बाहरी ह कोंटा म कलेचुप सुते हे…. चूल्हा म […]

व्यंग्य

सरग म गदर

बिसनू लछमी के सादी के सालगिरह रहय।उन दोनो सरग म बइठे बिचार मगन रहिस हे। बिग्यान के परगति कहव के, सुस्त मस्त अउ पस्त खुपिया बिभाग के चमाचम कारसैली के कमाल कहव, के कुकुर मन संग बिस्कुट खावत खावत संगत के असर कहव चाहे तुहर मन करय ते इतफाक से कहव बिसनू लछमी के दिमाक […]

कविता

कबिता : नवा साल म

 सुकवि बुधराम यादव के रचना  “डोकरा भइन कबीर ” (डॉ अजय पाठक के मूल कृति “बूढ़े हुए कबीर” का छत्तीसगढ़ी भावानुवाद ) के एक ठन बड़ सुघर रचना- नवा साल म  सपना तुंहर पूरा होवय, नवा साल म ! देस दुवारी म सुरुज बिकास  बरसावय संझा सुख सपना के मंगल गीत सुनावय अक्षत रोली दीया अउ चंदन, लेहे थाल म! कल्प रुख […]

कविता

कबिता : नवा बछर के गाड़ा -गाड़ा बधाई

नवा बछर के गाड़ा -गाड़ा  बधाई पाना – डारा  के फुलगी म ओकमे झुलना झूलत सीत ल गोरसी भरे  दंदकत डोकरी के आनी-बानी गीत ल   संगी जंवरिहा अउ अलकरहा हीत-मीत ल   सुख़-दुःख म पोटारे रोवईया मया पिरीत ल          … नवा बछर के गाड़ा -गाड़ा  बधाई  जंगल के रुख-राई, बेंदरा, भालू , बिघवा ल  चतुरा  कोलिहा ल अउ […]

कविता गज़ल गीत गोठ बात

ग़ज़ल : सुकवि बुधराम यादव

सुर म तो सोरिया सुघर – सब लोग मन जुरिया जहंय तैं डगर म रेंग भर तो – लोग मन ओरिया जहंय का खड़े हस ताड़ जइसन – बर पीपर कस छितर  जा तोर छइंहा घाम घाले – बर जमो ठोरिया जहंय एक – दू मछरी करत हें – तरिया भर ल मतलहा आचरन के जाल फेंकव – तौ […]