कविता

कोनजनि मनखे आवस कि राक्षत रे काटजू

कई पईत खाय हव अउ आघू घलो खाहुच्चे कहिथस
गऊ माँस प्रोटीन आवय एमा परतिबंध गलत हे कहिथस
कोंनजनि मनखे आवस कि राक्षत रे मार्कंडेय काटजू
का तै भुला गे हस तय कोन देश म रहिथस?

सुन एहा वो देश ए जिहा कृष्णा गउ सेवा बर आय हे
बृज म जेखर रक्षा बर गोवर्धन ल अंगरी म उठाय हे
जेखर गोबर ल परसाद अउ गऊ मूत्र ल अमरीत केहे गेहे
अइसन गउ माता ल तै नीच हा तरकारी समजथस?

अउ सुन ,जेन गऊ के छाव परे म कतको रोग मिटा जथे
बिन दाई के लईका जेखर दूध म दाई के ममता पा जथे
जेन माता बिन यज्ञ अउ हवन के कारज अधूरा हे
अइसन बैतरनी पार करइया दाई ल तेहा पशु समजथस?

अरे नीच ,का तै अपन दाई ल भुरका डार के पका सकत हस
जनम देवइया दाई के माँस खाय बर जीभ लमा सकत हस
सबके नियाव करइया न्यायाधीश तोर ले बेवकूफ कोनो नै हे
छरिया जतिस तोर पोटा जेमा गऊ माता ल खाके पचोवत हस

अरे पिशाच,गऊ भारत के समानार्थी ये ए मरम ल समझ
भारत देश के रहइया आवस एखर संसकिरती ल समझ
गउ सनातन के पहिचान ए जेखर ले जम्मो संसार हे
आगी लागय तोर करिया जीभ म जेमा अतका जहर उगलत हस

सुरता रख,जब-जब गउ अउ ब्राह्मण के अपमान होय हे
जब-जब तोर कस अधम मन अपन मति खोय हे
तब-तब नरायन ह अवतारे हे पाप के नाश करे बर
अउ काटे हे पापी के माथा ल जेखर बोली तेहा बोलत हस

सुधर जा रे कश्मीरी पंडित के नाम उप्पर कलंक
अपन कैची कस जीभ ल लगाम दे ,गऊ ल माँ कस सम्मान दे
कल के जनम लेवइया कल्कि पाप देख आज झन आ जावय
फेर कोनो कानून नै बचा सकही जेखर ज्ञान म अतका अकड़त हस|

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कवि सुनिल शर्मा
थान खमरिया,जिला-बेमेतरा(छ.ग.)
7828927284
9755554470
रचना दिनाँक 17/4/2015
शुक्करवार

2 thoughts on “कोनजनि मनखे आवस कि राक्षत रे काटजू”

  1. जय जोहर हेमलाल साहू जी…..आपमन के मया अउ दुलार बर…..छत्तीसगढ़ी जीना हे..छत्तीसगढ़ी बोलना हे…छत्तीसगढ़ी लिखना हे….जय छत्तीसगढ़ महतारी

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