संपादकीय

मोर डांड तो छोटे तभे होही संगी, जब आप बड़का डांड खींचहू

ST1111संगवारी हो, आपमन जानत हवव के हमर भाषा के व्याकरण हिन्दी भाषा के व्याकरण ले आघू लिखा गए रहिस। ये बात ह सिद्ध करथे के हमर भाषा अउ ओखर साहित्य तइहा ले मान पावत हे अउ समृद्ध हे। अब तो हमर भाषा राज भाषा बन गए हे अउ अब हमर राज काज के काम छत्तीसगढ़ी भाषा म घलव होही। आप मन ये उदीम करव के अब ले सरकारी चिठ्ठी-पतरी छत्तीसगढ़ी भाषा म लिखव। ये उदीम ले सरकार के कारिंदा मन चिठ्ठी के जवाब देहे खातिर छत्तीसगढ़ी भाषा ल पढ़हिं-समझहीं तो। ये काम बर सरकार के मुह मत निहाराव, सरकार ल जउन करना हे करही, आप स्वयं बाना उचवव।

आप सब इंटरनेट बउरइया आव, आप मन अपन भाषा ल इहि माध्यम म बढ़ावा दव। पेपर-पुस्तक छपवाई म बड़ पैसा लागथे फेर ये माध्यम म आप अपन बात अउ बिचार बिना पइसा के लिख के देस-बिदेस म फइला सकत हव। हमर गीत-संगीत अउ नाच ल, आडियो-वीडियो रूप म ये माध्यम म डार के जादा ले जादा लोगन तक हमर महान संस्कृति के धजा फहरावव। सोसल मीडिया ह अभी के जमाना म अभिव्‍यक्ति के बड़का चौपाल आए, ऐमा आप अपन भाषा म अपन अभिव्यक्ति दव अउ अपन प्रदेस के संस्कृति के बारे म गोठ-बात करके, संगी मन के मन म अपन प्रदेस बर मया अउ गरब के भाव बढ़ावव। ये ठीहा मन म आप छत्तीसगढ़ी बोले-लिखे बर जोजियाये के बल्दा अपन भाषा के अतका उपयोग करव के आघू वाला ल आपके गोठ ल समझे बर छत्तीसगढ़ी के शब्द ल सीखे ल पर जाय।

इही भाव ल लेके गुरतुर गोठ के हमर ये उदीम, इंटरनेट (मेकराजाला) म छत्तीसगढ़ी भाखा के साहित्य ल आघू लाये के हे। हम ये वेब साईट म 2008 ले छत्तीसगढ़ी के रचनाकार मन के रचना सरलग डारत आवत हावन। हम चाहत हावन के हमर भाखा के जादा ले जादा साहित्य इंटरनेट म आवय। ये खातिर हम जमो संगी मन संग गिलोली करथन के, आप अपन ब्लॉग या बेवसाईट बना के अपन अउ अपन संगी साथी मन के रचना घलव ला डारव। हम सब जुरमिल के उदीम करबोन त हमर साहित्य सहजे म इंटरनेट के माध्यम ले हमला पढ़े-गुने ल मिल जाही।

मोर एके ठन अउ गिलौली हावय के ये बेवसाईट या कोनो ब्लॉग म एक पईत छपे रचना ला घेरी बेरी इंटरनेट म छापे के बजाए नवा रचना ल इंटरनेट म डारव। येखर ले हमर भाखा के साहित्य इंटरनेट म घलव बने पोठ होही अउ पाठक मन ल घलव बने रकम-रकम के बिसय पढ़े ल मिलही। ये बेवसाईट के रचना ल कापी करके कहू आप अपन ब्लॉग या बेव साईट म डारहू त पाठक ल नवा का मिलही। आप अपन दाई भाखा छत्तीसगढ़ी बर सिरतोन म मया करथव त नवा रचना अपन बेव साईट या ब्लॉग म डारव। ये साईट के कोनो रचना ल आप कहूं अपन ब्लॉग या बेवसाईट म डारना चाहत हव त बने होही के हमर साईट के पूरा रचना डारे के बजाए, हमर साईट म छपे रचना के लिंक ल अपन म लगा लव। येखर ले पाठक ल आपके वेब साईट या ब्लॉग के रचना के संगें संग हमरो साईट के रचना पढ़े ल मिलही।

आप अपन दाई भाखा छत्तीसगढ़ी बर अपन असल मया देखाव, अउ इंटरनेट म हमर भाखा के भंडार ल भर दव। मोर डांड तो छोटे तभे होही संगी, जब आप बड़का डांड खींचहू। मोर मिहनत ले बनाए ये साईट के रचना मन ल अपन साईट म छापे के बजाए आप छत्तीसगढ़ी के ई पेपर (भास्कर, पत्रिका, हरिभूमि) अउ आरकाईव म चल देहे देशबंधु मड़ई के रचना मन ल अपन साईट म जघा देहू तभो छत्तीसगढ़ी बर बड़का काम हो जाही।

हमर भाषा ल आघू बढ़ाये खातिर सरकार ल घलव अपन डहर ले उदीम करना चाही। सरकारी योजना मन के जानकारी अउ सरकारी कागज-पत्तर ल छत्तीसगढ़ी म छपवाना चाही अउ छत्तीसगढ़ी के प्रयोग सरकारी कार्यालय मन म चालू कराना चाही। मंत्री-अधिकारी मन ल घलव छत्तीसगढ़ी भाषा म गोठियाना चाही, अपन सियान मन ल अइसन करत देख के जनता के मन म अपन भाषा बर हीन भावना ह दूर होही। अभी अतकेच, आवव भर दन इंटरनेट म हमर भाषा के खजाना ल।
जय छत्तीसगढ़, जय छत्ती‍सगढ़ी।

संजीव तिवारी
संपादक: गुरतुर गोठ डॉट कॉम

7 thoughts on “मोर डांड तो छोटे तभे होही संगी, जब आप बड़का डांड खींचहू

  1. फटे दूध हँ दहीं ले मही लेवना ले घींव होके दूध अउ दहीं के महात्तम अउ गुन ल कई गुना बढ़ा देथे। कोनो लाख उदीम कर लेवय घींव ल दूध या दहीं नइ लहुटा सकय तइसे आपके ए मन खट्टा वाले बात ओइसने अचंभो अउ असंभो हे। आप ले ए गुरतुर गोठ अउ गुरतुर गोठ ले आप नदिया नरवा ढोड़गा डबरा के सब पानी के मेल ले बने समुंद जल कस होगे हवय।

    ए बात के गहिर तक जाके वास्तविकता ल खोजे बर परही। अउ मैं जानना चाहहूँ सर।

  2. सञ्जीव ! तोर मेहनत हर सबो झन ल दिखत हावय ग ! मैं हर तो तोला चार – पॉच बरिस ले जानत हावौं फेर तोर सोंच हर , तोर उमर ले जादा बुढुवा हावय । नागपुर वाले ब्लॉगर – सेमीनार म , सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी हर एकदम खुश हो के मोला बताए रहिस हे कि – ” सञ्जीव तिवारी भी आ रहे हैं ।” तैं बुता अइसे करत हावस कि चारों कती तोर चर्चा होवत हे ग ! भगवान करय तोर जस अइसने बाढत रहय ।

  3. आपमन के मेहनत , नवा-जुन्ना साहितकार मन बर छत्तीसगढ़ महतारी के संस्करती संस्कार ल सकेल के राखे के परेरना आवय….पके चूरे भात दार खवैया मन ह येला नै समझय फेर आपमन के माटी बर मया ह गुरतुर गोठ ल अवतारे हे……कतको संगवारी मन के उछाह ल बढ़ाए हे फेर संसों अउ मन खट्टा झन करव भइया……..अइसन बिपति कई बार आहे अउ आत रही फेर हमला एखर ले पाछु नै हटना हे …अउ जम्मो संगवारी जेखर मन सेती अतका बिपति आठ ये बात ल समझना चाही….कि खुद बने बने के चक्कर म हजारो कइ बिगाड़ करना बने नै हे…जय जोहार

  4. गुरतुर गोठ के संपर्क में आके मन मोर मगन हो गे। संजीव तिवारी जी, आप मन के मेहनत अउ दरसन ल सलाम अउ परनाम हे। धन्यवाद अउ शुभकामना! – शिवराज महेन्द्रा।

  5. गुरतुर गोठ छत्तीसगढ़ी प्रेमियों के लिए वरदान है.

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