व्यंग्य

छत्तीसगढ़ी व्यंग्य : नोट बंदी के महिमा




8 नवंबर के दिन भारत के एक एतिहासिक दिन हवय। ए दिन टीवी म रात के 8 बजे जब खबर आइस के प्रधानमंत्री जी देस ल संबोधित करही तव सब्बो झिन टीवी तीरन चटकगे रहिन के आज तव लागत हे के नापाकिस्तान उपर हमला करे के घोसना होही। फेर थोरिक देर म प्रधानमंत्री जी कहिन के आज ले 500 अउ 1000 के नोट ह रद्दी होगे समझव। तहां ले तव हाहाकार माचगे। फेर पाछु प्रधानमंत्री जी कहिन के कोनो डर के बात नो हे अभी 30 दिसंबर तक के समे दिये जात हे के अपन नोट मन ल बैंक म जमा करा देवा। 30 तारीख के पाछु 500 अउ 1000 के नोट ल कालाधन मान लिये जाहि। अतका सुने के बाद जम्मो झिन अपन घर आपिसए दुकानए कारखाना म नोट खोजे म लग गें। घर के माईलोगन सबले आघु रसोईघर म खुसरिन अउ चाउरए दार के टीपामन म लुकाय 500 अउ 1000 के नोट ल निकारे लागिन। फेर पेटी म कपड़ा म गठियाए नोट मन ल देखिन के कतका नोट 500 अउ 1000 के हावय। वइसनहे मनखे मन अपन दुकान, आपिस, कारखाना म लुकाय नोटमन ल झर्राये लगिन।

कोनो-कोनो तव अपन नहानीखोली तक म तिजोरी बना के रखे रहिन। जिंखर करा दू चार हजार के नोट रहिस तेन मन तव निसफिकिर होगे के ऐला कालि बैंक म जमा करा देबो फेर जिंखर कर खजाना भराय रहिस तिंखर तव नींद उड़ागे। जिंहा तिंहा फेान कर.करके नोट ल खपाय के जुगाड़ खोजे लगिन। जिंहा ले खबर आवय के इंहा नोट खप जाहि तुरते उन उहां हबर जांवय। कोनो कहिस के सोना ले लेवा तव तीस हजार तोला के सोना ल साठ हजार तक मा बिसा लिहीन। कोनो अकतहा पेट्रोल डीजल लेके अपन नोट ल खपाय लगिन। कई डेढ़ हुसियार मन सीधा रेलवे टेसन हबरगें अउ धकाधक दूरिहा-दूरिहा जगा के एसी के टिकट ले लिन ए सोच के के थोरक दिन बाद टिकिट ल रद्द करवा देबो अउ हमला नवा नोट रेलवे ले मिल जही अउ हमर काला ह सफेद हो जही। फेर सरकार घलव कम नइ हे ओहू ह तुरते घोसना कर दिहीस के टिकिट वापसी के पइसा नगदी नइ मिलही अउ अपन पहचान पत्र घलव देना परही वापसी के पइसा ल उंखर बैंक खाता म जमा करे जही। तहां ले टिकिट खरीदवइया मन के जोस ठंडा पर गे।




नोटबंदी के महिमा देखव। काल तक जेन मन 500-1000 के नोट के काला खजाना ल पोगरिया के धरे रहिनए उही मन कोनो ओला गंगा म बोहाके अपन पाप कमती करत हें कोनो जलात हें अउ कोनो कचरा म मेलत हें । फेर जेन मनखे मन जिंखर करा न काला हेए न सफेद हेए बपुरा मन रोजे कमावत हें रोजे खावत हें तेन मन के परसानी बाढ़गे हे काहे के नोटबंदी के चक्कर म उंखर रोजी मार खावत हे।

नोटबंदी के समे मा लोगन मन एटीएम अउ बैंक के लाईन म ‘टाईम पास’ करे बर किसिम.किसिम के रद्दा खोज लेहे हंवय। कोनो चुटकिला सुनावत हें कोनो बियंग करत अपन समे ल काटत हें अउ व्हाटस अप फेसबुक म तव संदेस के नार बोहात हे। संदेस मन के बानगी देखव एक मनखे ह लिखथे के जबले मोदी जी 500 अउ 1000 के नोट बंद करे हें, जम्मोझिन मोला अइसे समझावत हवंय जइसे के जम्मो काला धन मोरे करा जमा हवय। दूसर कहिथे के मोदी जी कहे रिहिस के जम्मोझिन के खाता म 15-15 लाख आही फेर आज जम्मोझिन अपन खाता म अपने जमा करवावत हवय। कोनो कहिथे आज रात मा सुग्घर नींद आहिए काहे के चोर-चिहार मन घर मा पेले के पहिली 500-1000 पइत सोचहि। 11 घंटा म हर समस्या के समाधान करने वाला बंगाली बाबा घलव नोट बलदाय बर 8 घंटा लाइन म खड़े रहिस। एक झिन लिखथे ए तो धोखा आय काहे के कालाधन ल बाहिर ले लाबो कहे रहिन फेर इन तव घर भितरी ले हेरत हंवय। रात म कोनो कचरा जलावय तौ अरोसी परोसी मन पूछय कतका रहिस भइया। तव भइया मन देखत हवव के हमर देस के मनखे मन कोनो जगा होवय या कोनो किसिम के परसानी होवय ओला हांसत-हंसावत टार देथें।

नोटबंदी के संगे-संग कईयों ठन नवा-नवा आखर अउ ज्ञान हमुमन ल सीखे बर मिलत हे ‘कैशलेस’, ‘कार्डस्वाइप’ जइसे आखर मन ले लईका मन घलव सीख डरे हें। जिहां-तिहां दुकान बजार म ‘स्‍वाइप मसीन’ लग गे हवय जिंखर इहां मसीन नइ लगे हेए तेन मन आवेदन देवत हे। अउ तव अउ मंगईया मन घलव ‘स्‍वाइप मसीन’ के आवेदन देवत हे कहत हवय के हमला भीख ले हे मा सुभित्ता होही।

ए नोटबंदी होय ले कइयों मनखे मन के जिनगी संवरगे। इन 500 अउ 1000 के नोट के चिल्लर देहे बर सुरु कर दिहिन 500 के 400 अउ 1000 के 800 अइसनहे खेल ल बैंक के कई झिन कर्मचारी मन घलो मिलबांट के खेले लगिन। फेर सरकार ह इमन ले निपटे बर रोजेच नवा-नवा नियम बनावत हवय। आज एक नियम आथे तहां ले लोगन पहिली ओखर तोड़ निकाले लग जाथें जेन समे तक तोड़ निकलथे दूसर दिन दूसर नियम आ जथे। अइसे लागत हे के मुसुवा बिलई के खेल होवत हे। कालाधन के चक्कर म सफेद धन वाले मन गहूं के संग घुन कस पिसावत हे उंखर कोनो पूछारी नइ हे। फेर भइया हो सरकार तव अपन कोति ल देस म कालाधन अउ भ्रस्टाचार ल खतम करे के उदीम करत हवय तव हमु मनन ल एमा सहयोग देना चाहि।

विवेक तिवारी
बिलासपुर
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