गोठ बात

अंगाकर रोटी कइसे चुरही

[responsivevoice_button voice=”Hindi Female” buttontext=”ये रचना ला सुनव”] तीन बच्छर पूरगे पूनाराम अपन बेटी मोनिका ल पुरखौती गांव नई लेगे हावय। गरमी के छुट्टी मा जाबो कहिके मनाय रहिस।छुट्टी सुनाय पाछू ऐसो मोनिका जिदेच कर दिस। बेटी के मया अउ जिद के आगू थोरको नइ बनिस। शनिचर के संझा बेरा जाय के मुहुरत बनिस। पूनाराम ल […]

कविता

हाय रे मोर गुरतुर बोली

मोर बोली अऊ भाखा के मय कतका करव बखान, भाखा म मोर तीरथ बरथ हे जान ले ग अनजान। हाय रे मोर गुरतुर बोली, निक लागय न। तोर हँसी अऊ ठिठोली निक लागय न। मोर बोली संग दया मया के, सुग्हर हवय मिलाप रे। मिसरी कस मिठास से येमे, जईसे बरसे अमरीत मधुमास रे। ईही […]

कविता

ओहर बेटा नोहे हे

ओहर बेटा नोहे हे! परसा के ढेंटा आय लाठी ल टेक टेक के सडक म बाल्टी भर पानी लानत हे देख तो डोकरी दाई ल कैसे जिनगी ल जीयत हे कोनो नइये ओखर पुछैया अपन दुख ल लेके बडबडावत हे कभू नाती ल, कभू बेटा ल, कभू बहू ल गोहरावत हे पास पडोस के मन […]

गोठ बात

ब्लाग लिखईया मनखे मन ला दे-बर परही GST

नवा जी.एस.टी. कानून ह लागू होए म 3 दिन बांचे हे, 1 जुलाइ ले जी.एस.टी. होवत हे लागू, जी.एस.टी. के बारे में विस्तार ले कतको गजट, समाचार, पतरिका म जानकारी मिल जाही। एखर अनुसार हमन ला बुनियादी पदारथ मा 0%, 5%, 12%, 18% and 28% (+अउ लक्जरी समान मा सेस अलग ले) लगही। अईसे तो […]

Shabdkosh शब्‍दकोश

उ-ऊ छत्‍तीसगढ़ी हिन्‍दी शब्‍दकोश

उ उँकर (सं.)  उकडू, पैरों के पंजों के बल बैठना। उँचान (सं.)  ऊँचाई। उँटवा (सं.)  ऊँट। उँटिहार (सं.)  ऊँटी दे.  लेकर गाड़ी के आगे-आगे चलने वाला व्यक्ति। उंडा (वि.)  औधा, मुँह के बल। उकठना (क्रि.)  बीती घटनाओं को सुना-सुना कर गाली-गलौज करना। उटकना (क्रि.)  दे.  उकठना उकेरना (क्रि.)  निकालना, रस्सी आदि की बटाई खोलना। उखरू […]

छंद दोहा

योग के दोहा

महिमा भारी योग के,करे रोग सब दूर। जेहर थोरिक ध्यान दे,नफा पाय भरपूर। थोरिक समय निकाल के,बइठव आँखी मूंद। योग ध्यान तन बर हवे,सँच मा अमरित बूंद। योग हरे जी साधना,साधे फल बड़ पाय। कतको दरद विकार ला,तन ले दूर भगाय। बइठव पलथी मार के,लेवव छोंड़व स्वॉस। राखव मन ला बाँध के,नवा जगावव आस। सबले […]

कुकुभ छंद

योग करव जी (कुकुभ छंद)

मनखे ला सुख योग ह देथे,पहिली सुख जेन कहाथे । योग करे तन बनय निरोगी,धरे रोग हा हट जाथे।।1 सुत उठ के जी रोज बिहनियाँ,पेट रहय गा जब खाली । दंड पेल अउ दँउड़ लगाके, हाँस हाँस ठोंकव ताली ।।2 रोज करव जी योगासन ला,चित्त शांत मन थिर होही । हिरदे हा पावन हो जाही,तन […]

गोठ बात

पर भरोसा किसानी : बेरा के गोठ

[responsivevoice_button voice=”Hindi Female” buttontext=”ये रचना ला सुनव”] रमेसर अपन घर के दुवारी मा मुड़ धर के चंवरा मा बैइठे हे उही बेरा बड़े गुरुजी अपन फटफटी मा इस्कूल डाहर जावत ओला देख परीस।खड़ा होके पूछिस का होगे रमेसर? कइसे मुड़धर के बइठे हस ? रमेसर पलगी करत कहिस- काला काहंव गुरुजी, बइला के सिंग बइला […]

व्यंग्य

गदहा मन के मांग

[responsivevoice_button voice=”Hindi Female” buttontext=”ये खबर ला सुनव”] एक दिन गदहा मन के गांव म मंझनिहां बेरा हांका परिस- गुडी म बलाव हे हो- ढेंचू , जल्दी जल्दी सकलावत जाव हो ढेचू। सुनके गांव के जम्मो गदहा गुडी म सकलागे, कोतवाल गदहा ल पूछेगिस- कोन ह मईझनी-मंझनिहा बईठका बलाय हे ? तब एकझन सियान गदहा ह […]

चौपई छंद दोहा

दानलीला कवितांश

जतका दूध दही अउ लेवना। जोर जोर के दुध हा जेवना।। मोलहा खोपला चुकिया राखिन। तउन ला जोरिन हैं सबझिन।। दुहना टुकना बीच मढ़ाइन। घर घर ले निकलिन रौताइन।। एक जंवरिहा रहिन सबे ठिक। दौरी में फांदे के लाइक।। कोनो ढेंगी कोनो बुटरी। चकरेट्ठी दीख जइसे पुतरी।। एन जवानी उठती सबके। पंद्रा सोला बीस बरिसि […]