गज़ल

छत्तीसगढ़ी गज़ल

परकीति बर झिल्ली बिन ईलाज के अजार होगे
जगा जगा पहाड़ कस कचरा के भरमार होगे!

सरय नही गलय नही साग भाजी कस पचय नही
खा के मरत गाय गरूवा एक नही हजार होगे!

जोंक कस चपके एकर मोह मनखे के मन म
घेरी बेरी बंद चालू करत एला सरकार होगे!

लजाथे शरमाथे झोला धर के रेंगे बर जहुंरिया
देखव हाट म हलाकान कइसे खरीददार होगे!

का होही दूए तीन किसम ल बउरे बर छेंके ले
इंहा तो संसार म पलासटिक कई परकार होगे!

कोन जनी कब छोंड़ही पाछु ल ए जग बैरी ह
आज एहा मनखे के पहिचान बर आधार होगे!

नप्फा नकसान सही गलत के गियान हे सब ल
फेर अपन होके जागरूकता बर कोन तय्यार होय हे?

ललित नागेश
बहेराभांठा(छुरा)
गरियाबंद(छ.ग.)
[responsivevoice_button voice=”Hindi Female” buttontext=”ये रचना ला सुनव”]



देख कइसे हांसत हे हमर बारी के पटवा जी
कातिक आगे बाड़गे बुता बइठ के झन गोठिया जी।
अरन बरन तिहरहा बुता म हाथ बटाले
नही ते गोसाईन मारही फेंक के चटवा जी।
का सुघ्घर जतनाये पालपोस बढ़ाये धनहा
उसराले उत्ता धुर्रा जांगर खेत म काटत हे कटवा जी।
पाये हे बोनस पियत हे उछरत पोकरत ले
“हैप्पी दीवाली” बोंबियात घुमात हे दू झिन लठवा जी।
देश परदेस बांस कस सोज सलंगा बाढ़य
मंद मतवारी ह बनात हे छत्तीसगढ़िया ल बठवा जी।

ललित नागेश
बहेराभांठा(छुरा)
४९३९९६