कहानी

सबले बढ़िया – छत्तीसगढ़िया

नानकुन गांव धौराभाठा के गौंटिया के एके झिन बेटा – रमेसर , पढ़ लिख के साहेब बनगे रहय रइपुर म । जतका सुघ्घर दिखम म , ततकेच सुघ्घर आदत बेवहार म घला रहय ओखर सुआरी मंजू हा । दू झिन बाबू – मोनू अउ चीनू , डोकरी दई अउ बबा के बड़ सेवा करय । बड़े जिनीस घर कुरिया के रहवइया मनखे मन ल , नानुक सरकारी घर काला पोसाही , नावा रइपुर म घर ले डारिन अउ उंहीचे रेहे लागिन ।
कलोनी म , किसिम किसिम के , अलग अलग राज ले आय मनखे रहंय ।‍ धीरे धीरे मन माढ़े लागिस , लोगन मन ले परिचे होवन लागिस , तइसने म घाम के महीना बईसाख आगे । लइकामन के इसकूल के छुट्टी के समे आगे । दूरिहा – दूरिहा के रहवइया मनखे मन अपन अपन देसराज जाए के तियारी करे लागिन । जम्मो झिन छुट्टी म चल दिहीं त हमन कइसे करबो मंजू ? का करबोन ? हमूमन माईपिल्ला , अपन गांव जाबोन अउ अपन घर दुआर के मराम्मत कराबोन , अउ अपन खेतखार ल दुरूस्त करवाबोन , उंहीचे अपन लोग लइका ल किंजारबो , अउ खेतखार के जानकारी देबोन – रमेसर के गोठ के जवाब देवत रहय मंजू । रमेशर किथे – तेकर ले कहांचो दूसर ठउर जातेन का , थोरकुन समे बर ? गांव म लइकामन बोरिया जथे , फेर दाई-बाबू मन के किंजरे के सउंख घला पूरा हो जही । उंहू….. , एक काम करे जाय , जम्मो परोसी मन ल घला किथौं , अपन अपन देसराज त हर बछर जाथौ , ये बखत जुरमिल के अलग अलग परदेस जाबोन , इही बहाना परिचे घला पोट्ठ हो जही । जम्मो योजना बनगे ओतकिच बेरा । तीर तखार के जम्मो लइका सियान तियार होगे , बइठका सकलागे , तारीख तिथी निच्चित होगे । मराठी बाबू ठाकरे ल पूरा जात्रा के परभारी बना दिन । बड़े जिनीस बस किराया कर डारिन । कोन कोन जाहीं , कतका संखिया होही – तेकर हिसाब होए लागिस । संखिया अउ सीट के हिसाब ले , रमेशर के महतारी-बाप छूटत रहय । रमेसर – मंजू के बनाए योजना , ओकरे महतारी बाप के जाए के मनाही म , इंखर दिल टूटगे । यहूमन , नइ जाए के घोसना कर दिन । एमन ल ठाकरे साहेब बड़ समझाइस , फेर एमन नइ मानिन ! मंजू के कहना अतकेच रिहीस , कि बिन सास ससुर के , नइ जावन । एड्वांस पईसा डूबे के घला फिकर नि करिन । तारीख लकठियागे , उही समे भाटिया साहेब के छुट्टी निरस होगे , पइसा घला जमा नि करे रहय एमन ! भाटिया साहेब फोकट फोकट पइसा देबर मना कर दिस । आरथिक बोझा जवइया मन उप्पर बाढ़हे लागिस । जाए के एक दिन पहिली , ठाकरे साहेब मजबूरी म , रमेसर करा पहुंच गिस । ओला महतारी बाप सम्मेत जाए बर मनाए लागिस । रमेसर- मंजू गांव जाए के तियारी करत रहंय । फेर ददा के आदेस ले , इंखरे संग जात्रा निच्चित होगे !




बड़े जिनीस बस इंखर घर के आगू म आके ठाढ़ होइस । रमेसर मन जम्मो झिन , आगू ले चइघ के सीट पोगरा डारिन । धीरे धीरे मोहल्ला भर के मनखे जुरिआए लागिन , अउ अपन अपन सीट म बइठे लागिन । राव साहेब आतेचसाट बम होगे , रमेशर अउ ओखर परिवार ल देखके । आगू के दूनों सीट मोर नाव ले बुक हे , ओकर पाछू के बेहरा बाबू के नाव ले । तूमन ल अपन सीट के होस हवास नइये का ? डोकरा डोकरी ल झिन लेगहू केहे रेहेन , उहू मन ला धर के ले आने । रद्दा म इंखर नाव लेके कहीं तकलीफ होही त तुंहर मजा ल बताहौं , घुचो हमर सीट ले – राव साहेब झंझेटत रिहीस रमेसर ल । रमेसर के चेहरा तमतमागे , कुछु बोलतीस तेकर पहिली , ओकर बाबू केहे लागिस – तुंहरे संगवारी मन जाय बर किहीन , तब जावथन बेटा । रिहीस बात सीट के , हमन ल जनाकारी नि रिहीस के , सीट म जम्मो जात्री मन के नाव लिखाहे । ले तूमन तुंहर सीट म बइठव , पाछू कोती के सीट खाली दिखत हे उही हमर होही – कहिके माई पिल्ला अपन सूटकेस मोटरी – चोटरी ल धर के पाछू डहर रेंग दिन । रमेसर अपमान के घूंट पीके रहिगीस , फेर अपन ददा के सेती मुहूं नि खोलिस ।
गाड़ी चले लागिस । रद्दा म जग-जगा बोर्ड टंगाए रहय , जेमे लिखे रहय , छत्तीसगढिया सबले बढिया । राव के लइका जइसे देखय , जोर जोर ले पढ़य । बेहरा बाबू – राव साहेब आपस में गोठिआए लागिस – हुंह , का खाक बढ़िया ? केवल नारा आय एहा , न लोक में ठिकाना , न रंग में , न संसकीरीति में दम , न सभ्यता म । दई-ददा ल चिपका के घूमत हे आनंद मनाए के दिन म । हमर दाई ददा नइहे का । बहाना बना के छोड़ देतिन , घर के रखवारी घला हो जतिस । इंकर तीर कायेच हे तेकर रखवाली बर कन्हो ल छोड़ही । रहितीस तभ्भो , एमन काहीं के इज्जत करे ल नि जानय । ये छत्तीसगढिया मन , कतको बड़ पद पा जांए भाई साहेब , फेर रही अड़हा के अड़हा । साले परबुधिया मन यहा उम्मर म दई ददा के अंचरा ल धरके घूमथें । खाली दुनिया भर में परचार परसार हाबे कि – छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया । फेर मोला लागथे इंहा कांहीच बढ़िया नइये , तेकर सेती परचार परसार के जरूरत परथे ।
हमर अपन अपन परदेस ल देखथन त , अइसे लागथे के एमन अभी घला पथरा जुग म जियत हे । कोन्हो अपन परदेश के लोक , रंग , संसकीरीति के गुन गावत नई अघात हे , त कोन्हो अपन समरिध्दि के । कोन्हो अपन राज के , दूध दही के नदिया के , बखान करत हे , त कोन्हो मंदिर देवाला के । कोन्हो अपन देसराज ल अनाज के भंडार बतावत नि अघावत हे , त कन्हो खनिज के । चरचा चलत हे जात्रा संग , फेर रहि रहि के छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया के ऊप्पर बियंग घला । अपन देस राज के गुन गवइ ले जादा , लोगन ल इहां के हंसी उड़ाए म मजा आवत रहय । हमर देस राज ल आवन दव , तब देखाबो – काला किथे सबले बढ़िया । सफर के पहिली पड़ाव पुरी पहुंच गे जात्रा दल । रात भर के सफर के थकान उतरे के पाछू , जगन्नाथ भगवान के दरसन बर तियार होवत हे जम्मो झिन । उड़ीसा निवासी बेहरा सेठ भारी उत्साहित रहय । अपन परदेस के गौरव के भारी बखान करत रिहीस । थोरेच समे में एकर सहयोग ले मंदिर के बड़ सुघ्घर दरसन घला पागिन । बेहरा के छाती फूलत रिहीस घेरी बेरी । थोरेच पाछू ओकर पूरा हवा निकल गे । कोन जनी कोन पंडा बनके बेहरा बाबू ल अइसे लूटिस के , पूरा जेबेच सफाचट होगे । जतका डिंगरई मारत रिहीस , जम्मो घुसड़ गे । मजाक या हंसी उड़ई का , बोलती तको कमतियागे | रमेसर ह , ओला बहुत कन पइसा के मदद कर दीस ।




भगवान तिरूपति के दरसन बर अबड़ उछाह रिहीस जम्मो के मन म । जइसे जइसे मंदिर लकठियाये लागिस , मनखे मन के उछाह सरसरऊंवा बाढ़तेच गिस । कन्हो अपन मनौती के बिसे सोंचत रहय , त कन्हो भगवान ल मने मन धन्यवाद देवत रहय । मंदिर तीरेच आये के उमीद म पूजा गाजा के समान बिसाये लागिन । इही म देरी होगे । तभे उदुप ले बरोड़ा सुरू होगे । पानी के बड़े बड़े बूंद चुचुवाये ल धर लिस । डराइबर साहेब आघू गाड़ी चलाये म अपन समसिया बताइस । मजबूरी होगे इही तीर के गांव म समे काटे के । बस के मनेजर समय झिन बरबाद होये कहिके , इही गांव म खाना पीना करे के सोंच डरिस । इसकूल के छपरी देख के बस ल ठाड़ करिस । गांव के कुछ जवनहा मन इसकूल के परछी म बइठ के तास खेलत रहय । मनेजर ह राव साहेब ल , इही लइका मन के मदद मांगे बर भेजिस । मदद त दूर , लइका मन अस डरवइस ओला के , तुरते अपन बस में हांफत हांफत आके बस ल जल्दी चलाये बर केहे लागिस मनिज्जर ल । डराइबर घला ओकर हालत ल देखिस , त पूछिस न गंवछिस , सटासट गेयर लगइस अऊ गाड़ी ल भगइस इहां ले । थोरकुन बेर म राव साहेब बतइस के वो टूरा मन असमाजिक मनखे कस लागिस , उहां थोरकुन बिलमतेन ते लूट पाट हो सकत रिहीस । साले मन मदद त दूर , मुही ल लूटे बर कुदाये ल धरत रिहीन कहिके बताये लागिस । रमेसर के बाबू आके ओकर गिला चूंदी ल पोंछिस अऊ समझइस । जम्मो झिन बसेच म , भगवान तिरूपति के पराथना सुरू करीन , सहींच म देखते देखत बादर कते कोती लुकागे , सुरूज के चमक दिखे लागिस । पानी के बेवस्था देख के खाये पीये के उदिम पूरा करिन , तेकर पाछू भगवान तिरूपति के दरसन बर मई पिल्ला आगू बढ़ गिन ।
सफर के अगले पड़ाव म बेंगलूरू सहर म परवेस कर डारीन । एक ठिन होटल म रूके के बेवस्था रहय । सफर के थकान नि जियानत रहय कन्हो ल । बिरिंदावन गारडन , भव्य बजार जाये के सऊंख म लकर धकर तियार होवत हे । रमेसर कभू देखे नि रहय । वोहा सेसादरी भाई के संगत ल धरीस । दूनों झिन घूम के आबो , तंहंले अपन परिवार ल घुमाहूं सोंच के चल दीस सेसादरी संग । गारडन म सेसादरी भाई हा एक झिन सुघ्घर नोनी के हाथ ल धर दीस । मार परीस रमेसर ल । काबर के उही गलती करीस तइसे सारी बोल पारीस । पछीना छूट गे – रमेसर के । घेरी बेरी छमा मांगिस तब बड़ मुसकिल ले छूटिन । वापिस होटल आये के पाछू सेसादरी भाई ये घटना ल मिरची मसाला डार के बतावत रहय । कतको झिन रमेसर ल गारी दिन । अपन गलती नोहे – बताये के कतको कोसिस करीस फेर , रमेसर के गोठ सुने बर कन्हो तियार नि होइस । कन्हो कन्हो तुरते उलाहना दे बर सुरू कर दीन – इही ल कथे छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया ।




बहुत कष्टदायी होगे जातरा ह इंकर मन बर । देस के व्यवसायिक रजधानी मुम्बई जाये के कन्हो उछाह नि रहिगे मन म अभू । अऊ मनखे मन हीरो – हीरोइन ले मिले बर उत्साहित रहय , त कन्हो चोर बजार ले जिनीस बिसाये बर । कन्हो चौपाटी म मजा ले के सपना देखत रहय , त कन्हो फिलिम सिटी म समे बिताये के । तेकर ले ठाकरे साहेब अऊ जादा उत्साहित रहय । अऊ रहिबेच करही – अपन परदेस के गरब देखाना हे । बड़ घूमिन फिरिन । रंग रंग के जिनीस बिसा डरिन । फेर घूम के आये के पाछू , ठाकरे के बाई के मुहूं तूमा बरोबर लटके रहय । न हूंके न भूंके । पता चलीस – पैसा के थइली चोरी होगे । अऊ ते अऊ , उही म ठाकरे के पर्स , ए टी एम कारड , मोबाइल जम्मो गे । कहींच नि बांचिस । दूनो परानी रोवत बइठे रहय । मंजू अबड़ समझइस । ठाकरे भाऊ भड़क के – तोर होये रितीस त जानते , तेंहा हमन ला लान के दे देबे का , बड़ समझइया बने हस ? मंजू बड़ दायसी ले गोठियात , अपन ए. टी. एम. ल देवत किहीस – जतका जरूरत हे ततका निकाल सकत हव । ठाकरे मंजू के बेवहार ले अवाक रहिगे ।
जात्रा चलत हे । रमेसर के परिवार के हरेक दारी काकको काकरो मदद करके अपन आप ल धन्य अनुभौ करय । तभ्भो ले छत्तीसगढिया सबले बढिया कहिके कन्हो कन्हो कमेंट सुने ल मिलीच जावत रिहीस । मध्यपरदेस पार करत उत्तरपरदेस पहुंच गे । इलाहाबद के संगम म खल खल ले नहा धोके बिहार कती जावत रहय बस । रात के दू बजे । नींद अपन बांहा म पोटारे हे सबो मनखे ल । बिधुन चलत बस , उदुप ले ठाड़ होगे । सुनसान जगा , हड़बड़ा गे , सुकुरदुम होगे । कुछू समझतीस तेकर आगू , चारो मुड़ा ले कोलिहा निही मनखे के भाखा सुनई दे लागिस । कन्हो डराइबर या मालिक ल पूछतीन तेकर पहिली समझ गे , डाकू मन छेंके रहय । बस ले उतार दीन जम्मो झिन ल , बस म चढ़के तलासी ले डरीन । मोबाइल , पइसा , ए टी एम कहींच नि बांचीस । गहना गुठा तको उतरवा लीन । पूरा लुटागे । तुरते भगागे लुटइया । अपन कस सुसवाये धीरे धीरे बस म चघत हे फेर । लोग लइका के हियाव करत , फेर अपन अपन सीट म बइठ गे । जइसे तइसे बस रेंगे लागिस । पोहाये के अगोरा म रथिया बीतत हे । दू पहर बांचे रथिया , जुग ले बड़का होगिस । बैजनाथ बाबा के दरसन करबो , भात बासी खाबो अऊ निकलबो – इही जोजना बांचे रहय । कोन जनी कइसे पूरा होही । तभे मालिक बतइस के सिरिफ एक टेम के रासन बांचे हे , अभू काये करना हे बतावव । बिहारी बाबू श्रीवास्तव जी केहे लागिस – इहीच तीर हमर भाई के घर हे , चलो उंहे जाबोन , खाये पिये अऊ आघू जाये बर पइसा कौड़ी के बेवस्था हो जही । मई पिल्ला खुस होगिन । सिरीफ छत्तीसगढ़िया थोरेन बढ़िया रिथे जी ‌- श्रीवास्तव के बियंग बान रमेसर कोती चलगे । रमेसर हरेक दारी मन ला मार के रहि जाये , कहींच जवाब नि दय । रमेसर के दई पोलखा म लुका के धरे पइसा ल हेरत श्रीवास्तव बाबू ल किहीस – तुंहर भई घर जाबोन त , दुच्छा थोरिन जाबो , ये पइसा के खई खजाना बिसा डरव , सगा जाबे त लइका मन निहारथे झोला ल । श्रीवास्तव संग कतको झिन उतर गिन पानी पीये बर । खई लेवत भेंट होगे इंकर भई संग । सबो गोठ घला होगे इहीच करा । अपन घर लेगही कहिके , खई ल घला दे डरीस , फेर वोहा एक्को घांव अपन घर जाये बर नि किहीस , खई ल धरीस , अऊ जरूरी बूता म जाना हे – कहिके , टरक दीस । चुचुवागे सबो ।
भगवान परीकछा लेवत हे बेटा । तूमन चिंता झिन करव । बैजनाथ बाबा के दरसन करबो , उही हमर वापसी ल सरल बनाही ‌- रमेसर के ददा के अइसन गोठ कन्हो ल नि सुहावत हे । एक झिन कहत रहय – पइसा कौड़ी कहींच निये , खाये पीये बर रासन निये , लइका मन तरस जही , तोला काहे डोकरा……. याहा उम्मर म घूमे के उसरथे । तूमन चलव तो , भगवान सब पूरा करही । बस के मालिक घला उनिस न गुनिस , सियनहा के बात मान के चल दीस । बाबा के दरसन होगे । एक टेम के बांचे रासन ले कलर कलर करत पेट कहां भरही । काकरो पेट नि भरीस । झारखंड नहाके के समे पेटरोल सिरागे । अभू अऊ बड़े समसिया …… । मुड़ धरके बइठ गे । मनिज्जर बतावत हे – पेटरोल पम्प तीरेच म हाबे बबा , फेर का काम के ? पइसा निये एको कनिक । सियनहा ल बखाने लागिन कतको झिन मई लोगन । तोरे सेती वो पार गेन , वोती नि जातेन त कइसनो करके छत्तीसगढ त पहुंच जतेन । अभू का करे जाये …….. । मुड़ी खजवात सोंचत , पेटरोल पम्प के मालिक करा गोठियाये अऊ किलौली करे बर चल दीन । नान – नान नोनी बाबू के रोवई गवई ल बताबो तंहले , पेटरोल पम्प के मालिक पसीज जही अऊ जरूर हमर मदद करही । तुंहर कस कतको झिन तीरथ जात्री मन रोजेच आवत – जावत रिथे , मेंहा खैरात म बांटे धर लुंहू , त धंधा कइसे करहूं । कहींच किलौली काम नि अइस । तुंहर करा सोन चांदी होही तिही ल दे दव । कहां ले देबो बाबू , सब ल लूटके लेगे हे डाकू मन । रमेसर के छोटे बेटा अपन दादू संग पाछू पाछू पेटरोल पम्प म पहुंचे रहय । पेटरोल पम्प मालिक के गोठ सुनके नानुक लइका अपन गला ले सोन के चैन उतारिस अऊ अपन दादू ल देवत पेटरोल भराये बर केहे लागिस । पेटरोल भरागे , फेर ये चैन कइसे बांचिस सोंचत रहय , तभू दादू ल सुरता अइस , डाका के बेरा लइका , बसे म सुते रिहीस , अऊ डाकू मन लइका के गला म फकत कारी पोत समझ के ओकर जांच परताल खाना तलासी नि करीन ।




गाड़ी के पेटरोल भरागे । मनखे के पेट म मुसवा हमागे । भूख के मारे हाल बेहाल हे । पोट पोट करत हे । रमेसर के दई , अपन मोटरी ल डर्रा-डर्रा के हेरीस । दस बारा दिन पहिली , कतको झिन ल खवाये बर , दे के परयास करे रिहीस , कोन्हो नि खइन । नाक मुंहू ल एती वोती करीन । एक झिन मई लोगिन खिसियात केहे रिहीस – अतेक मइलहा फरिया म लपेट के धरे हस , कोन खाही ऐला । टीपा म आने आने फरिया म ठेठरी , खुरमी , कटवा , खाजा , बिड़िया रोटी ल लपेट के धरे रहय । दई के उही खई अभू अतेक मिठावत रहय ….. झिन पूछ । पेट भरगे , जी जुड़ागे । गाड़ी निरबाध चलथे । रोटी नि चलिस । फेर हमागे भूख बैरी ।
छत्तीसगढ़ के सीमा लकठियाये लागिस । पेट के मुसवा के पदोना अऊ बाढ़गे । झारखंड पार करत अऊ कतको गांव गंवई परीस । फेर काकरो हिम्मत नि होइस , सहायता मांगे के । तभे , बड़े जिनीस बोर्ड दिखीस – छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया । रमेसर के ददा डराइबर के बाजू म आके बइठगे , अऊ डराइबर ल केहे लागिस – पहिलीच गांव परही तिहींचे ठाड़ करबे , कुछु न कुछु वेवस्था करबो । हांसिन कुछ मन , गजब वेवस्था कर डरही तइसे गोठियाथे डोकरा । रसता भर अतेक पियार अऊ सहयोग करे के पाछू घला , कतको झिन रमेसर के परिवार ल नि समझ पइन । दम ले पहुंच गे एक ठिन नानुक गांव । रोक … रोक …. इही करा । इंहीचे बेवस्था होही । नान नान झोपड़ पट्टी के बने घर कुरिया म रहवइया मनखे काये मदद करही । खुदे मरत होही खाये पीये बर , हमन ल काला दिही – कानाफूसी गोठियाथे लोगन ।
बर रूख करा छांय देख , बस ल ठाढ़ करीस । गांव के मनखे मन , बर रूख के तरी म , गराम सभा के बईठका सकलाये रहय । बस ल ठाढ़ होवत देखिस त उहू मन अपन अपन जगा म ठाढ़ होगिन । मनखे मन ल , बस ले उतर के अपन कोती आवत देखिस , त उहू मन बस कोती अइन । कुछ जातरी मन के मन म डर हमागे , जतका बांचे हे तहू झिन लुटा जाये कहिके । जइसे तीर म गीन , गांव वाला मन हाथ जोर के जोहारिन जम्मो झिन ल । रमेसर के बाबू के उमर देख के पांव घला परीन । पानी पिलइन , लिमऊ के सरबत घोर डरिन । गोठियात बतात जइसे पता चलीस के , एमन तीरथ बरथ करके आवत हें – मई लोगिन मन घला जुरियागे , चरन पखारत अपन भाग ल संहराये लागिन । तीर के इसकूल म माई मन के नहाये बर पानी के बेवस्था कर डारिन । पुरूस जात मन तरिया म नहा डरीन । इंकर नहा धो के तियार होवत ले , बर तरी , दार – भात – साग सब चुरगे । मसूर संग सेमी , भांटा अऊ आमा के खुला , डुबकी कढ़ही , उरिद के दार लसून धनिया पीस के , अऊ रसहा चेंच भाजी अदौरी बरी मिंझरा , माड़ी भर झोर में मुनगा – रखिया बरी – काला खाये काला बचाये तइसे होगे । ररूआ सपनाए दार भात – कस इसथिती होगे । कसके झेलीन । अऊ ले लौ ….. एक कनिक अऊ ले लौ …… थोरेच कुन मोर कोती ले ……. कहिके अतेक परेम से आगरह करके खिलइन पिलइन के , जात्रा के जम्मो दुख कोन जनी कते करा हरागे । इंकर भात ह एक कोती पेट ल छकाबोर करीस , त दूसर कोती परेम – मया हा , इंकर हिरदे ल सराबोर कर दीस ।
भात खाये के पाछू जानिन के , रमेसर के बड़े बाबू निये । खोजा खोज माचगे । तभे , आमा चुचरत आवत दिखीस । पोटार के रो डरीस मंजू । मां , अब्बड़ भूख लागथे । गांव के डोकरी दाई खाये बर पछवाये रहय , ओकरे बांटा के आधा ल दीस , तइसने म एक झिन मंगइया , घोसरत घोसरत भूख म बिलबिलावत पहुंच गे तीर म । डोकरी दाई सुरू कर डरे रहय । लइका हाथ गोड़ धो के जइसे बइठिस , देख पारिस मंगइया के छटपटई । तुरते ….. मोला भूख निये मां …. मेंहा बगीच्चा म बड़ अकन आमा चुचरे हंव , भात साग ल मंगइया ल देवा दीस । जात्री मन के आंखी ले आंसू धार बनके निथरे लागिस । रमेसर के परिवार के तियाग , सेवा अऊ तपसिया के कायल होगिन जम्मो । मुड़ी ल गड़ाये , अपन करनी के पसचाताप करत सुबकत रिहीन । रमेसर के पूरा परिवार के परति किरतग्यता के भाव रहि रहि के हिलोर मारे लागिस । ठाकरे के मन के भाव जुबान तक पहुंचीच गे । केहे लागिस – हमन रद्दा भर तुंहर हंसी उड़ाएन , तूमन ल परेसान करेन । अपन परदेस के बड़ तारीफ करेन , फेर असलियत इही आय , जेला सबो देखेन , अऊ अभू देखतहन । इहां के मान सम्मान आदर सत्कार ल जिनगी भर नि भुला सकन । गांव के गरीब मनखे मन जेन आत्मीयता ले हमर सुवागत करीन येहा मरत ले नि भुलाए । वाजिम में छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया आय । फकत नारा नोहे , सचाई इही आय । समरथन म थपड़ी पीटे लागिन बाकी जात्री मन । सरपंच खड़ा होके केहे लागिस – हमर फरज आय , सगा के सेवा करना । फेर तूमन तो तीरथ बरथ ले घला आवथव । तुंहर चरन धोके हमूमन तरगेन । तुंहर सुआगत म कोन्हो गलती होगिस होही ते हमन ल छिमा करहू ।




बिदई के समे आगे । जात्री मन बड़ भावुक रिहीन । लाल चहा के अगोरा संग गोठ बात चलत रहय । गांव के सरपंच , रमेसर के बाबू ल अपन सम्बोधन म , ममा कहत रहय । एक झिन ल भरम होगे के , येहा सहीच म एकर भांचा आये का ? रेहे नि गीस , पूछ पारीस । नही बेटा – हमर राज के रिवाज आय , दुनिया के हरेक मानुस संग अपन रिसतेदारी बना डरथन । ये बाबू ल न में कभू देखे हंव , न जानत हंव । अऊ यहू मोला कभू नि देखे या जानत हे । फेर मनखे यहू आय अऊ मनखे महू आंव , इही ल दूनो झिन जानत हाबन । तभे सरपंच बीच म बोलत , बताये लागिस – ये फकत हमर परदेस के संसकार नोहे ममा । में हा बतावथौं आप मन ल , आप मन बर पानी लनइया तेलगू आय , जे लिमऊ के सरबत घोरत रिहीस ते कन्नड़ आय । तुंहर चरन पखरइया कतको झिन महतारी मन उड़ीसा , झारखंड अऊ उत्तरपरदेस बिहार के रहवइया आय । तुंहर बर साग भात रंधइया मराठी आय । तुंहर गोड़ दबइया , जूठा उठइया , बरतन मंजइया घला इहां के मूल निवासी मनखे नोहे । फेर इंकर संसकार अतका सुंदर हे के , एमन ल अतिथि के सेवा करे बर , कन्हो काम म लाज बीज निये । हां भांचा तैं सिरतोन कहत हस । मोर जम्मो संगवारी मन घला , बहुतेच संसकारी परदेस के निवासी आय । जात्रा के बेरा म जेन गलती होइस या जेन बुरा बात होइस , ओमे वो परदेस के संसकार के कन्हो दोस निये । उड़ीसा म लुटइया पंडा उड़िया होइच नि सकय । तूफान म हमन ल अपन ठऊर म रूकन नि देवइया हमर हितवा होही । ओहा हमन ल सावधान करत रिहीस । बंगलोर म अपन गलती के सजा पाये हन हमन । बम्बई म हमर लापरवाही आय , कन्हो लूटे बर नि आये रिहीस हमन ल । बिहार – उत्तरपरदेस के सीमा म लुटइया मनखे उहां के नोहे , ओमन बाहिर के आये जेमन ओ परदेस ल बदनाम करके राखे हे । वाजिम म देखे जाये , त उन परदेस , हमर परदेस ले कतको अगुवा हे अऊ बेहतर घला । फेर असमाजिक मनखे मन के जमावड़ा उन ल बदनाम करे हे । येहा हिंदुस्थान के माटी आय भांचा – जिंहा परेम , भाईचारा अऊ सौहार्द – नदिया कस बोहावत हे , जेन ल जतका मन ततका झोंक लौ । हां एक बात जरूर कहूं के मोर छत्तीसगढ़ के संगवारी मन , अभू जेन सेवा करीन , ओकर बर मय किरतग्य हंव । येहा कन्हो एहसान थोरेन आय ममा , हमर परम्परा अऊ फरज आय – सरपंच जवाब दीस ।
चहा चुंहक डरीन । जाये के समे होगे । फेर काकरो गोड़ नि उठथे । इंहींचे बस जतीस तइसे लागत रहय जम्मो ल । माथ म तिलक लगा के नरियर अऊ दरव्य दकक्षिना घला भेंट करीन । बस में बइठे अऊ सीट पोगराये के होड़ परागे । अभू नावा होड़ माचगे – रमेसर अऊ ओकर परिवार के तीर बइठे के । रमेसर के ददा दाई मन , डोकरी डोकरा ले कका – काकी होगे । जम्मो मनखे अपन करनी बर माफी मांग मांग के अपन पाप धोवत रहंय । अभू घला चरचा चलत रहय छत्तीसगढ़ियाच के , फेर चरचा के सरूप बदल गे । कन्हो कहत हे – वाजिम म इहां के मनखे बढ़िया होथें , काबर एमन केवल अपन परदेस के निही , जम्मो देस के बात करथें । कन्हो कहत रहय – इहां के मनखे भारत ल छत्तीसगढ़ अऊ छत्तीसगढ़ ल भारत समझथें , अऊ कन्हो भी गिरे परे अटके भटके ल अंगिया लेथें , तभे कन्हो परदेस के मनखे असानी ले घुल मिल जथें । अभू बोर्ड , सड़क ले जादा इंकर दिल म जगजगाये लागिस के – सबले बढ़िया छत्तीसगढ़िया ।

हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन
छुरा
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