कहानी

नान्‍हे कहिनी : बदना

भव्यता के इतिहास लिए मनखे मनखे ल अँजोर करत जनमानस में अथाह बिसवास के नाव बदना के दाई बोहरही माई सबो मनखे बर एक तारनहार आय। आज ये जगा ह लोगन के आसथा अऊ भक्ति के प्रतीक माने जाथे, एक बार जेन ह ठाकुर देव बोहरही माई ल सुमर के बदना बदथे त जरूर ओकर मनोकामना ह पूरा होथे। अईसन बिसवास के नाव आय, सोजे सोज गोठ ये, मनोकामना पूरा होथे तभे मनखे मन आके ईहा बदना ल बदथे। पुरखा जमाना ले चलत आवत हे कोनों धन संपति, कोनों संतान त कोनो स्वास्थ्य बर त कतको झिन ह सुन्दर पत्नी के चाह बर अपन तीर के देवता धामी या ईष्ट देव ल अपनेच सुवारथ खातिर सुमरथे। अऊ पूरा होवय कहिके बदना ल बदथे।




अईसने एक जगा हाबय जिहा सालों सालों से ये रीति ह चले आवत हे, बिधि के बिधान कहिबे कि लोगन मन के आसथा ये जगा ह बड़ पबरित हाबय। रईपुर ले तीस किलो मीटर दुरिहा माँड़र टेशन अऊ सिलयारी के बीच कोल्हान के तीर पथरी गाँव के खार नीम के छाव म बिराजे बोहरही माई के धाम में बदना बदे बर मनखे मन दुरिहा दुरिहा ले आथे। जेकर लईका लोग नई होवय अऊ जेन मनखे मन कोनों बीमारी ले दुख भोगत हे या जेकर लईका गँवा गे हाबय, या ककरो माल मत्ता गंवागे उही मन जादा इहां आके बदना ल बदथे। फेर कतको झिन मनखे मन बदना बद के भुला तको जथे, ओकर मनोकामना पूरा हो जथे तहा ले जेन सुमरे रहिथे तेन काम ल नई करय त ओकर से अन्होनी होय के डर बने रहिथे। अईसने सियान मन ह कहिथे, कतको झिन मनखे जेकर बदना से मनोकामना पूरा हो जथे त ओमन ह ये जगा म बकरा के बलि तको चढ़ाथे अऊ सबो परवार समेत उही बकरा ल परसाद समझ के रांध के खाथे अऊ बाटथे। बच जथे तेन ल कोल्हान में ठंडा कर देथे, फेर मोला अईसे लागथे बदना जरूर बदव मगर कोनों जीव हत्या करके बदना बदई ह नियाय नई लागय। का पता जेन पशु के हमन बलि देवत हन ओकर दुष्परिणाम हमर अवैईया पीढ़ी ल या खुद ल भुगते बर पड़ जय। एक जीव बचाय बर दूसर ल मारना कोनों शास्त्र में नई कहें ये। बदना बदव फेर बदना के ऐवज म कुविचार छोड़े के बदव, बदना मानव सेवा करे बर बदव, बदना कोनों भूखे ल भोजन कराय के बदव, बदना मया दुलार के बदव, बदना दाई बहिनी के सम्मान बचाय बर बदव, बदना माटी के करजा चुकाय बर बदव। बदना, दान धरम अऊ बने करम करे बर बदव, बदना ये धाम के महिमा ल बढाय बर बदव, काबर बदना में देवता धामी ह कोनों जीव के हत्या नई मांगय, येला तो हमन अपनेच सुवारथ खातिर अईसने बना डरे हाबन।

विजेंद्र वर्मा अनजान
नगरगाँव (धरसीवां)
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