कहानी

नवा बछर के शुरुआत : कहानी

स्कूल के लइका मन गोठियावत रइथे कि ये पइत नवा बछर के शुरुआत कोन ढ़ंग ले करबो, त जम्मों झन अपन-अपन योजना अउ संगे संग पऊर नवा बछर के सुवागत कइसे करे रीहिन वहू ला सुरता करत राहय, एक झन कइथे हमन तो परवार भर के जम्मों झन जुरिया के दर्शन करे बर अउ पिकनिक मनाय बर जावत हन, पऊर घलो अइसने भोरमदेव गे रेहेन, बड़ मजा आय रीहिस फेर आवत-जावत ले छोटी हा उछर डरिस अउ डोकरी दाई हा बीमार परिस तेहा पाख भर मा चेत पइस।
अइसने दूसर लइका गोठियाथे हमन तो कई बछर जंगल बांधा नइते झरना तिर मा जाके पिकनिक मना के आथन दूरिहा जाये ले बढ़िया तिर मा मजा ले लेथन फेर ददा अउ कका उपराहा ढरका देथे, त मजा के सत्यानास हो जथे। फेर एक झन कइथे हम तो अपन बड़े भाई मन संग मोटर साइकिल मा घूमे ला जाथन अउ बड़ मजा लेथन एक घँव कट मारत खानी उलँड़ गे रेहेन फेर घर मा नइ बतायेन, एक झन कइथे हमन तो मंदिर जाथन, कोई कइथे हमन तो पारा में डीजे लगा के नाचथन, कोनों केक काटे के गोठ गोठियाथे त कोनों अउ कुछू, त ये सब ला एक झन राजू नाव के लइका हा कलेचुप सुनत रइथे। आखिर मा जम्मों झन वहू ला पूछथे ते काय करथस अउ ये बछर का करबे। त वोहा काही नइ काहय अउ उदास होके उठ जथे।



अब नवा बछर आथे जम्मों झन अपन-अपन योजना के हिसाब ले घूम-फिर के मजा करके लहुट जथे। जम्मों झन हाँसत गोठियावत रइथे। स्कूल मा गुरुजी पूछथे कोन-कोन का-का करेव थोकन बतावव तो जी। त लइका मन खुशी के मारे अपन पिकनिक, घूमई, केक मिठई खवई नचई-कुदई सबला गोठियाथे, कई झन छकत ले कुकरी-बोकरा खाके घलो आय रइथे, कोनों जुँआ, ताश अउ फिलीम टाकिज के मजा बताथे त कोनों हा वो बेरा मा भोगे पीरा अउ अड़चन ला बताथे।
ताहन राजू के बारी आथे त वोहा कइथे मेहा कहूँ नइ गे रेहेंव अउ नाचे कुदे घलो नइ हँव। त राजू कइथे मेहा नवा बछर के शुरुआतेच ला सुग्घर ढंग ले करे हँव। गुरुजी के फेर पूछे मा राजू कइथे मेहा जम्मों झन असन हर बछर अपन ददा संग मोटर साइकिल मा घूमे ला जावत रेहेंव फेर दू बछर पहिली हमन एक ठन सरपट दउँड़त बस के चपेट मा आ गेन मेहा तो बाँच गेव फेर मोर ददा के जीव नवा बछर के दिन चल दिस। ते पाय के पऊर के नवा बछर ला घर में रो-रो के बिताए रेहेंव। मोर दाई हा अब मोला पोसत हे, त ये पइत मेहा बिहनिया ले उठ के ओखर पाँव परके नहा धोके भगवान के पूजा पाठ दाई संग करेंव। ताहन मोला पड़ोस के डोकरी दाई के सुरता अइस मेहा ओखर पाँव परे ला गेंव त रद्दा मा चार पाँच झन गरीब लइका मन झगरा होवत दिख गे, त मेहा झगरा ला छोड़वा के अपन जेब खरचा बर मिले रीहिस ते पईसा के गोली बिस्कुट खवा देंव त वोमन खुश होगे। फेर डोकरी दाई करा पहुंचेव त वोहा जर बुखार मा तिपत राहय त वोला अस्पताल लेगेंव, वोहा मोला आवत-जावत भर ले हजारों घँव आशीर्वाद दिस होही। फेर थोकन बेरा मा दाई मोला दुकान भेजिस त मेहा देखेंव जम्मों झन काही खाके रद्दा मा फेंकत हे, अइसे तो ये ऊखर मन रोज के बूता रीहिस अउ आज तो कचरा बगराय मा ओमन अतिच कर डारे रीहिन, फेर मेहा आज नवा बछर मा नवा शुरुआत करे के सोचेंव, अउ कचरा झिल्ली मन ला बिन-बिन के डब्बा मा डारेंव। रद्दा तिर मा रखाये डब्बा ननची रीहिस अउ टूटहा रीहिस त कचरा ला लेग के मोला दूरिहा मा फेंकना पड़िस। मोर मिहनत ला देख के दुकानदार हा मोला पईसा देवत रीहिस त मे केहेंव येखरे तेहा कचरा डब्बा लान देते त कचरा नइ होतिस, त वोहा बड़े नवा कचरा ड़ब्बा लाने के वादा करे हे। ताहन मेहा घर जावत-जावत देखेंव एक झन अंधरा डोकरा हा रद्दा नइ नाहक सकत हे त वोला रद्दा नहका देंव, त वो कहिस कि येखर छाँव दार रुख रतिस अउ ओखर तरी मा चँवरा त मोर बाँचे दिन हा इही कर बइठ के कट जतिस, वो करा एक ठन पहिली छोट कन झाड़ रीहिस ते हा मर गे रीहिस त वोला देख के मोरो भेजा मा अइस कि सिरतोन मा जेन होगे ते होगे, फेर अब सबला भूला के नवा शुरुआत करे के दिन आहे। अउ रुख रेहे ले छाँव मिलही, भुइँया मा पानी पहुंचही, अवईया-जवईया मन बर बने हो जही। त मेहा वो ठऊर के मनखे मन ला पुछ के, अपन साइकिल मा नर्सरी जाके दू ठन पेड़ लान के लगाय हँव। अउ अब वोला ददा के चिन्हा समझ के बढोय के जतन करत हँव।



अतका सबला दाई हा जानिस ताहन अड़बड़ खुश होके आशीर्वाद दिस, अउ जम्मों झन मोला मया करीन, अउ महू हा मया पाके गदगद होगेंव। सिरतोन मा दूसर ला खुशी दे के आनंद अलग होथे। गुरुजी घलो राजू के गोठ ला सुन के किहीस कि सबले सुग्घर नवा बछर के शुरुआत तो राजू करे हवय। चलो राजू ले सिख लेके हमू मन पर्यावरण ला सहेज के जीव हत्या अउ जुँआ नशा ला छोड़ के अपन तिर तिखार के मनखे ला खुशी देके नवा बछर के शुरुआत करबो।

ललित साहू “जख्मी”
छुरा, जिला – गरियाबंद (छ.ग.)
[responsivevoice_button voice=”Hindi Female” buttontext=”ये रचना ला सुनव”]