कहानी

नवा साल : कहानी

जोहत कका ह हमर तीर-तार भर म नामही मंदहा बढई के नांव ले जाने जाथे। फेर ओकर गुन ले जादा ऐब ह ओकर चिन्हारी बनगे हवय । ओला खाय बर अन्न भले झन मिलय फेर संझउती बेरा म ओला दारु होना चाही। घर म बडका बेटा ललित,मंझली बेटी किरन अउ छोटकू बेटा हेमंत के संग कमेलीन सुवारी मनटोरा ह दुख ल अपन माथ के लकीर समझ के ओ दरूहा संग जिनगी ल काटत हे।
ललित ह एसो बारमी कच्छा म हावे। आधा महिना इसकूल म त आधा महिना राजमिस्त्री मन के ठीहा म रोजी-मजूरी करत बितथे। दुनो डाहर एकेक पाख के नांगा होथे। अउ दुनों डाहर के गारी-गल्ला सुने ल पडथे। इसकूल म गुरुजी मन अउ ठीहा म ठेकादार मनमाने ठेसरा लगाथे। फेर का करे बिचारा ह!! जे घर के सियान ह अपन घर-परवार ले जादा अपन निसा-पानी के साध ल पूरा करना जरुरी समझथे तेन घर के बेंदरा बिनाश होना तय हे। अउ अइसन घर के लइका के भाग म का सुख? घर के परिस्थिति ह ओला समे के पहिली सियान बना देहे। परति दिन घर म रात कुन के लडई झगरा ह अब आदत म समावत हे।



कोनो-कोनो दिन मनटोरा के जी ह बिटा जाय त अपन गोंसइय्या के संगे संग सरकार ल तको मनमाने बखाने-“सरकार डाहर ले फोकट म चांउर अउ नून मिलत हे त काबर कोनो दरूहा ह अपन लोग-लइका ल पाले-पोसे के संसो म घुरही। चांउर के पईसा ल दारु पीके उरकावत हे। एकर ले अच्छा तो फोकट के चांउर ल झन देवय अउ बदला म दारू भट्ठी ल बंद करा दे। घर म खाय बर दाना नी रही त सबो मतवार के निसा उतर जाही। फेर हमर गोठ ल कोन सुनही दाई!! बोट मांगे के बेरा हमन ल सोरियाथे नेता मन!
अइसने किटिर काटर म जिनगी के गाडी ह अलवा जलवा चलत रिहिस। हमर गंवई के सबो बडका तिहार सिरागे रिहिस। अंगरेजी महीना के आखिरी तारीक लकठावत रहय। नवा-नवा टुरा-टानका मन पिकनिक जाय के पलान बनावत रिहिन। इसकूल म शीतकालीन छुट्टी चलो हो गे रिहिस। ललित ल ओकर जंहुरिया मन संग म पिकनिक म जाय खातिर जोजियइन त ओहा तियार होगे। फेर भीतरे-भीतर गुने लगिस कि खरचा खातिर पइसा के बेवस्था कहाँ ले होही?फेर ओला सुरता आइस कि नवा साल आय बर त अभी पाँचेक दिन बाँचे हे। अतका दिन बुता करहूँ त पिकनिक के पूरती पइसा सकला जाही। संझउती बेरा म भुर्री तापत अपन दाई मनटोरा ल पिकनिक जाय के गोठ ल बताइस त ओहा किहिस-चल देबे बेटा!हमर भाग म तो कभू नवा साल मनाय के सुख नी लिखाय हे। कम से कम तिंही अपन संगी-संगवारी संग घूम ले!फेर मोर कना एको आना नीहे बेटा!तिंही ह अपन बेवस्था कोनो ल माँग के कर ले। मोर करा पइसा होही ताहने लहुटा देबो। अइसने महतारी-बेटा गोठियात -बतरात रिहिन वतकी बेरा बढई ह निसा म गन होके आइस अउ भारी उधम मचइस। पहिली अरोसी-परोसी मन ओला बरजे बर आवय। फेर रोजेच के ओकर उही हरकत ल देखके कोनो नी आवय। बड लटपट म अधरतिया सुतिस त रात पहाइस।



ललित ल बुता म जावत चार दिन बितगे। बपुरा ह पिकनिक जाय के सपना संजोय बुता म मगन रिहिस। साल के आखिरी दिन ठेकादार ह सबला मजूरी बांटिस। ललित ह खुस होके घर म आइस अउ अपन दाई ल बिहाने पइसा ल देबे कहिके धरा दिस। मनटोरा ह ओला अंछरा म गठियालिस। एती रातकुन आरा-पारा म मनेमाने डीजे बजावत टुरेलहा मन दारू के निसा म मनमाने नाचत राहय। उंकर मन बर तो रतिहा ले तिहार शुरू होगे राहय। ललित ह काली जल्दी उठना हे कइके सुते बर जावत रिहिस तइसने बेरा म ओकर ददा जोहत ह नसा म आइस अउ पइसा दव कहिके लोटा-थारी ल पटके फोरे ल धरलिस। मनटोरा ह ओला बरजे के उदीम करिस त ओला अंड-बंड गारी गल्ला देय के चालू कर दिस। दु तीन-थपरा लगा घलो दिस। जवान होवत लइका बर अइसन गत सहे के लइक नी राहय। ओहा तुरते अपन दाई ल पइसा ल मांगिस। ओ बपुरी ह नी देवंव कइके लुकाइस त ललित ह बरपेली ओकर अंछरा ल छोर के सबो पइसा ल अपन ददा के मुठा म धरा दिस। पइसा ल धरके ओ मतवार डीजे डाहर नाचे बर चल दिस। एती जम्मो झन सुसकत रोवत सुतगे।
अधरतिहा बेरा म निसा कम होइस अउ जाड ह बाढिस ताहने जोहत अपन घर आइस। वतकी बेरा छोटकू ल छाती म चिपोटे मनटोरा नींद म बडबडावत राहय- “तुमन मोर कोख ले दुख पाय बर काबर जनम धरेव बेटा!में तो अभागिन अंव! कइसनो करके जिनगी..ल..पहा ….लेतेंव! तुमन…काबर दुख भोगत हव….? तुंहर छोटे-छोटे साध ल घलो नी पूरा कर सकत हंव!” अइसने बड अकन हिरदे के पीरा ल मनटोरा ह नींद म बबकत राहय।



बिहनिया होइस। गाँव म जम्मो नवा साल मनाय के जोरा म लगे रांहय। टुरा-टुरी मन पिकनिक जाय के बेवस्था म भींडे राहय। कतको मनखे सइकिल म कुकरा ओरमाए एती ले ओती होवत रहय। ए डाहर बिहनिया ले बढई ह उठिस अउ सुटूर-सुटूर रेंग दिस। ललित ल संगवारी मन पिकनिक जाय खातिर बलाय बर आइन त ओहा मुड पिराय के ओखी करत खटिया म ढलंग गे। सब झन ओला खिसियावत चलदिन। एती मनटोरा अउ लइकामन मनेमन अंताजा लगा डरिन कि आज उकर मतवार ह मनमाने तिहार मानही कइके। वो मन आने दिन बरोबर अपन बुता म बिलम गे। जे घर के सियान पोगरी तिहार मानथे उकर घर म आने मनखे बर तिहार नी होवय।
दिनभर बितगे। सब पिकनिक वाला मन लहुटगे। संझउती बेरा म बढई लहुटिस। वोला देखके मनटोरा अउ जम्मो लइका बक खागे।
पहिली घांव आज जोहत बढई ह आरूग राहय। बिना मंद मउहा पीये घर लहुटे रिहिस अउ संग म लाने राहय मनटोरा बर नवा लुगरा, लइका मन बर नवा ओनहा-कपडा। जब कोनो कुछू नी बोलिन त जोहत ह किथे-रतिहा मेहा तोर दाई के अंतस के पीरा ल सुन डरे रेहेंव बेटा हो! रतिहा लहुटेंव त मोर निसा उतरगे रिहिसे। में हा तुमन ल बड बिटोये हंव। आज ले में ह अब दारु ल हांथ नी लगावंव!! मोला तुंहर किरिया हे! -अतका गोठियावत ओकर आँसू चुहिगे। ये डाहर मनटोरा के आँखी ले घलो आँसू निथरत राहय। ओहा मने मन म गुनत राहय-कतेक साल के बाद आइस उंकर जिनगी म नवा साल!!!

रीझे यादव
टेंगनाबासा (छुरा) 493996
मो.8889135003
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