जुगुर-जागर

लोरिकायन – लाईट एण्ड साउंड (जुगुर-जागर रपट) : संजीव तिवारी

27 सितम्बसर के दिन छत्तीसगढ के लोक दरसन ला जगर-मगर चमकावत क्षितिज रंग सिबिर के लाईट एण्ड साउंड के जोरदरहा परसतुती ‘लोरिकायन’ हा दुरूग मा जब होईस त बईगा पारा के मिनी स्टेडियम म छत्तीसगढ के मनखे मन के खलक उजर गे, घमघम ले माई पिल्ला सकला गे अउ हमर लोक गाथा – लोरिक चंदा […]

कविता

छत्‍तीसगढी कुण्‍डली (कबिता) : कोदूराम दलित

छत्‍तीसगढ पैदा करय, अडबड चांउर दारहवय लोग मन इंहा के, सिधवा अउ उदारसिशवा अउ उदार, हवैं दिन रात कमाथेंदे दूसर ला भात, अपन मन बासी खाथेंठगथैं ये बपुरा मन ला, बंचकमन अडबडपिछडे हावय हमर, इही कारन छत्‍तीसगढ । ढोंगी मन माला जपैं, लम्‍मा तिलक लगायहरिजन ला छूवै नहीं, चिंगरी मछरी खायचिंगरी मछरी खाय, दलित मन […]

कहानी

कहिनी : डोकरा डोकरी : शिवशंकर शुक्‍ल

शिवमंगल शुक्ल। हमर छत्तीसगढी भाखा के विद्वान साहित्यकार हें, इमन छत्तीसगढी के पहिली उपन्यासकार यें । इखर उपन्यास ‘दियना के अंजोर’ अउ ‘मोंगरा’ हा मेकराजाला म उपलब्ध हावय । इखर एक ठन लइका मन बर लिखे गये कहिनी किताब ‘दंमाद बाबू दुलरू’ के एक ठन कहिनी ला हम इहां प्रस्तुत करत हन । कथानक लइका […]

कविता

छत्‍तीसगढी कुंडली : रंगू प्रसाद नामदेव

बासी खाना छूटगे, आदत परगे, चाय पेट भरे ना पुरखातरे, ये कईसन बकवाय ये कईसन बकवाय, सबो दुख-सुख मा लागू देंवता अतरे फूल, चाय तो पंहुचे आगू कह रंगू कविराय, सुनगा भाई घांसी सबला होना चाय, बिटामिन छोडे बासी । रंगू प्रसाद नामदेव

लोक

जसगीत अ‍उ छ्त्तीसगढ – दीपक शर्मा

जब भादो के कचारत पानी बिदा लेथे अ‍उ कुंवार के हिरणा ला करिया देने वाला घाम मुड मा टिकोरे ले धर लेथे। धान कंसाये ला धर लेथे ,तरीया के पानी फ़रीया जथे खोर के चिखला बोहा जथे अ‍उ चारो खूंट सब छनछन ले दिखे लागथे । हरियर लहरावत फसल अउ अपन मेहनत ला सुफल होवत […]

कविता

सोसन अउ कानून (कबिता ) : सुशील भोले

बछरू हा एक दिन गाय जघा पूछिसदाई सोसन काला कहिथे ! तब गाय कहिस – बेटा तैंहा जुच्‍छा पैरा ला,पगुरावत रहिथसअउ हमर मालिक हा मोर थन के दूध लादूह के अपन बेटा ला पियावत रहिथेइही ला तो सोसन कहिथे ! तब बछरू हा गुसियावत कहिसदाई ! का ये देस मा अइसन कानून नइयेजेमा हम सोसन […]

सुरता

सुरता : पद्मश्री डॉ. मुकुटधर पाण्डेय

30 सितम्बर 1895 के दिन, 113 बरिस पहिली हमर छत्‍तीसगढ के गंगा, महानदी के तीर बालापुर गांव म एक अइसे बालक के जनम होइस जउन हा बारा बरिस ले अपन गियान के पताका फहरावत पूरा भारत देस के हिन्‍दी परेमी पाठक मन के हिरदे मा छा गे । ये बालक के नाम रहिस मुकुटधर । […]

गीत

गुरतुर गोठ (गीत) सुकवि बुधराम यादव

तोला राज मकुट पहिराबो ओ मोर छत्तीसगढ़ के भाषा तोला महरानी कहवाबो ओ मोर छत्तीसगढ़ के भाषा तोर आखर में अलख जगाथे भिलई आनी बानी देस बिदेस में तोला पियाथे घाट-घाट के पानी तोर सेवा बर कई झन ऐसन धरे हवंय बनबासाओ मोर छत्तीसगढ़ के भाषा…. रयपुर दुरुग ले दिल्ली तक झंडा तोर लहराथे साँझ […]

व्यंग्य

इही तो आजादी आय

गनपत अउ धनपत दुनो झन रेडियो सुनत बइठे राहंय । रेडियो हर नीक-नीक देसभक्ति के गीत गावत राहय अउ बोलत राहय कि हमर आजादी साठ बरीस के होगे । तब गनपत हर धनपत ल पूछथे कि- रेडिया हर अजादी ल साठ बरीस के होगे कथे फेर हम तो आज ले ओखर दरसन नइ करे हावन […]

कविता

भूख (कबिता) : डॉ. राजेन्‍द्र सोनी

बुधारूकठल कठल के रोथेमनटोरा ओखरचूमा लेथेचूमा ह रोटी नोहेमनटोरा हा सोंचथेमयबुधारू खातिररोटी बन जातेंव । डॉ.राजेन्‍द्र सोनी चित्र http://feedingavillage.org से साभार