अनुवाद कहानी

पूस के रात : प्रेमचंद के कहानी के छत्तीसगढ़ी अनुवाद

हल्कू हा आके अपन सुवारी ले कहीस- “सहना हा आए हे,लान जउन रुपिया राखे हन, वोला दे दँव। कइसनो करके ए घेंच तो छुटय।” मुन्नी बाहरत रहीस। पाछू लहुट के बोलिस- तीन रुपिया भर तो हावय, एहू ला दे देबे ता कमरा कहाँ ले आही? माँघ-पूस के रातखार मा कइसे कटही? वोला कही दे, फसल […]

अनुवाद कहानी

अपन-अपन समझ

जब मेहा अपन चार बछर के बेटा रामसरूप ला बने तउल के देखथंव, त जान परथे के वोमे भोलापन अउ सुनदरई नई रहि गे, जउन दू बछर पहिली रिहिस हे। वो अइसे लागथे जाना-माना अपने गुस्सेलहा बानी म लाल आंखी मोला देखावत हे। वोकर ये हालत ला देख के मोर करेजा कांप जथे अउ मोला […]

अनुवाद गीत

सुरुज किरन छरियाए हे

तैंहर उचिजाबे गा, सुरुज किरन छरियाए हे। अब नइये बेरा हर, सुत के पहाये के अब नइये बेरा अंटियाये के अब नइये बेरा हर ऊँघाये सुरताये के आये हे बेरा हर कमाये के आँखी धो लेबे गा, चिरगुन मन पाँखी फरकाये हे। झन तैं बिलमबे उतारे बर नांगर ला जऊने खोंचाये हे काँड मन मां […]

अनुवाद गीत

किसान

नंगरिहा, नई उपजै तोर बिना धान। धरती पूंजी धरती रुंजी, धरती पूत किसान।। मिहनत ला जनमत पाये हस सबके सेवा बर आये हस तोर तपसिया तीन बतर के बरसा जूड तिपान। अब आगे हे तोर दिन बादर बरसे ला पानी चल मोरे नांगर लहू पछीना, टोरे जाँगर, बइला तोर मितान। दाई के थन मां दूध […]

अनुवाद गीत

अइसन दिन आये हे

अइसन दिन आये हे काँही झगरा नवां झन बिसाव जी। निकरत ले काम, लेवना लगाय जी। अब अइसन दिन आये हे॥ कोन ह करत हवय, तेला तुम छोड़व ना जेमा अपन काम सघे उही गनित जोडो़ गा फिकर झन करौ भइया खाव तेखर गाव जी अब अइसन दिन आये हे। दिन ला तुम रात कहौ, […]

अनुवाद गीत

जय जय हो धरती मइया

जय जय हो धरती मइया। तोरेच बल में गरजत हावन खात खेलत बहिनी भइया। जय जय हो धरती मइया ॥ बजुर बरोबर बडे़ माथ में छाती अडा़ हिमालय गंगा जमुना निरमल धारा, सबके जीव जुडावय विन्ध्य सतपुडा बने करधनी कनिहा गजब सुहावय महानदी कृष्णा कावेरी गोदावरी मन भावय ब्रम्हपुत्र नर्मदा ताप्ती ठंव ठंव नांव जगावय […]

अनुवाद दोहा

अनुवाद : उत्तर कांड के एक अंश

अब तो करम के रहिस एक दिन बाकी। कब देखन पाबो रामलला के झांकी॥ है भाल पाँच में परिन सवेचन नारी। देहे दुबराइस राम बिरह मां भारी॥ सगुन होय सुन्दर सकल सबके मन आनंद। पुर सोथा जइसे कहे, आवत रघुकुल चन्द्र॥ महतारी मन ला लगे अब पूरिस मन काम। कोनो अब कहतेच हवय आवत बन […]

अनुवाद कहानी

दूसरइया बिहाव

जब मेहा अपन चार बछर के बेटा रामसरूप ला बने तउल के देखथंव, त जान परथे के वोमे भोलापन अउ सुनदरई नई रहि गे, जउन दू बछर पहिली रिहिस हे। वो अइसे लागथे जाना-माना अपने गुस्सेलहा बानी म लाल आंखी मोला देखावत हे। वोकर ये हालत ला देख के मोर करेजा कांप जथे अउ मोला अपन […]

अनुवाद किताब कोठी गीत

छत्‍तीसगढ़ी कवित्‍त म मुनि पतंजलि के योग दर्शन औ समझाईस : डॉ.हर्षवर्धन तिवारी

डॉ.हर्षवर्धन तिवारी के अनुवाद करे छत्‍तीसगढ़ी कवित्‍त म मुनि पतंजलि के योग दर्शन औ समझाईस सेव करें और आफलाईन पढ़ें

अनुवाद

दूध म दनगारा परगे…

(पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी की हिन्दी कविता *दूध में दरार पड़ गई* का छत्तीसगढ़ी भावानुवाद : सुशील भोले) लहू कइसे सादा होगे भेद म अभेद खो गे बंटगें शहीद, गीत कटगे करेजा म कटार धंसगे दूध म दनगारा परगे… मयारू माटी म येला पढ़व इंहा..