कहानी

सोलह सिनगार

सावन के महिना ल, सहराती महिला मन, बछर भर अगोरय। रंग रंग के पहिर ओढ़ के चटक मटक किंजरय। एक बछर, सावन म, महिला मन बर, नावा किसिम के परतियोगिता राखीस – जे महिला, सावन भर, सोलह सिनगार ले, सजे धजे रहि तेला, सावन के आखिरी दिन, भारी पुरूसकार देके सममानित करे जाही। सिनगार के […]

कहानी

हमर भाग मानी ये तोर जईसन हितवा हे

आज के समे म कोनो ककरो नई होवय तईसे लागथे,मनखे के गोठ बात बिना सुवारथ के दूसर मनखे नई सुनय I अऊ बात बने सही रईहीं तभो वोकर बात ल कोनों नई गुनय, भाई मन बाटें भाई परोसी होगे हे, एक दूसर बर बईरी का कहिबे एक दूसर ल फूटे आँखी नई सुहावय Iसमे बदल […]

कहानी

कन्या भोज (लघुकथा )

आज रमेश घर बरा,सोंहारी,खीर ,पुरी आनी बानी के जिनीस बनत राहे । ओकर सुगंध ह महर महर घर भर अऊ बाहिर तक ममहावत राहे। रमेश के नान – नान लइका मन घूम घूम के खावत रिहिसे । कुरिया में बइठे रमेश के दाई ह देखत राहे, के बहू ह मोरो बर कब रोटी पीठा लाही […]

कहानी

कहिनी : नाव बदले ले न गाड़ी बदले न ठऊर

भटकुल नानचुन गांव रथे, फेर ऊंहा लड़ई-झगरा अऊ दंगा असन बुता होवते राहय। ऊंहा के गंउटिया इही झगरा के पीरा ल नई सही सकीस अऊ परलोक सिधार गे, ओखर माटी पानी में पुरा अतराब के मनखे सकलइस, ओमा एक झन साधु घलो आय राहय। वोहा गंउटिया के ननपन के संगवारी रथे, वोहा गंउटिया के जिनगी […]

कहानी

बंटवारा

बुधारु अऊ समारु दूनों भाई के प्रेम ह गांव भर में जग जाहिर राहे ।दूनों कोई एके संघरा खेत जाय अऊ मन भर कमा के एके संघरा घर आय । कहुंचो भी जाना राहे दूनों के दोस्ती नइ छूटत रिहिसे ।ओकर मन के परेम ल देख के गाँव वाला मन भी खुस राहे अऊ बोले […]

कहानी

साहित्य हरे अंधरा के तसमा

मटमटहा राम हा नवा-नवा साहित्यकार बने रथे, ओकर लेखनी के चारो खुंट परसंसा होथे वोहा कम दिन मे ज्यादा नाम कमा डरथे, त वोला लागथे के वोहा सबे जिनिस ल जान डरे हे अऊ इही बात के घमंड में साहित्य ल बिन जाने समझे जेन मिले तेन ल साहित्य काय आय कइके पुछथे, वोहा सबले […]

कहानी

गाय निकलगे मोर घर ले

समारू आज गजबेच अनमनहा हे। 40 बच्छर ले जौन कोठा म पैरा, कांदी, भुसा, कोटना म पानी डारत रहिस ओ आज सुन्ना परगे। पांच बच्छर के रहिस तब ले अपन बबा के पाछू पाछू कोठा म गाय बछरु ल खाय पिये के जिनीस देय बर, गाय ,बछरु , बईला, भईसा ल छोरे बर सीख गे […]

कहानी

कहानी : अलहन के पीरा

गुमान ओ दिन अड़बड़ खुस रहिस जेन दिन ओखर घर लछमी बरोबर बेटी ह जनम लीस। ओकर छट्ठी ल गजबेच उछाह मंगल ले मनाईस, गांव भर ल झारा-झारा नेवता पठोइस। बरा, भजिया, सोंहारी अऊ तसमई संग जेवन कराइस।अरोस परोस के सात–आठ गांव के पटेल , मंडल, पंच, गऊंटिया,बड़े किसान ल घलाव नेवता देय रहीस।बेटी के […]

कहानी

कहानी : फूल के जघा पउधा भेंट करव

रवि अपन संगवारी उदय संग छोकरी खोजे बर निकरथे, लहुट के गांव म अपन ददा ल जाके कोनहो छोकरी नई भइस कइके बताथे। सरकारी नौकरी करईया पढ़े-लिखे रवि हा जम्मों झन ल पढई-लिखई, रंग-रूप, चिज-बस, गवंईहा-सहरिया कइके कमी खोजिच डारे। ओखर ददा कइथे तेहा अइसने करबे त जिनगी भर डेड़वा रेहे ल परही, भगवान के […]

कहानी

कहानी : कलम

दू झिन संगवारी रिहीन। अब्बड़ पढ़हे लिखे रिहीन। अलग अलग सहर म रहय फेर एके परकार के बूता करय। दूनों संगवारी एक ले बड़के एक कहिनी कंथली बियंग कबिता लिखय, कतको परकार के अखबार अऊ पतरिका म छपय। हरेक मंच म जावय। फेर दूनों के रहन सहन म धीरे धीरे अनतर बाढ़त रिहीस। एक झिन […]