गज़ल

छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल सुरूज ला ढि़बरी देखाए देबे अउ मर जवान, मर किसान

सुरूज ला ढि़बरी देखाए देबे करबे करम तो कमाये देबे,बारी म बीहन जगाए देबे।बदरी ले पानी उतर आही,जंगल म बंसी बजाए देबे।गंगा जल गांव म छींच देबे,दुखला रमायन सुनाये देबे।धुंधरा म हपट उपट जाही,सुरूज ला ढि़बरी देखाए देबे। शायरे शहर यादव ‘विकास’ ब्रम्‍हपथ, अम्बिकापुर, छ.ग. मर जवान, मर किसान ए देस के बिधान अलग हे, […]

Chhattisgarhi Gazal गज़ल

बसंत ‘नाचीज’ के छत्तीसगढी गजल

बिना, गत बानी के  घर, नाना नानी के डोकरी, डोकरा बिन, दवई पानी के आय डोली, काकर ढेला रानी के लगत कइसन हो होरा छानी के ऊंचा है दाम काहे कानी के बतावथस अइसन देबे लानी के दिखथे करेजा कस तरबुज चानी के बके आंय बांय बेइमानी करके कर दान, पुन ऊना नि कभू दानी […]