गीतिका

बरसात : गीतिका छंद

आज बादर बड़ बरसही,जाम कस करियाय हे। नाच के गाके मँयूरा ,नीर ला परघाय हे। भर जही अब ताल डबरी,एक होही खोंचका। दिन किसानी के हबरही, मन भरे ये सोच गा। ढोड़िया धमना ह भागे,ए मुड़ा ले वो मुड़ा। साँप बिच्छू घर म घूँसे,डर हवय चारो मुड़ा। बड़ चमकथे बड़ गरजथे,देख ले आगास ला। धर […]