वाचिक परम्‍परा

अहिमन कैना : छत्तीसगढी लोक गाथा

सासे के बोलेंव सास डोकरिया कि सुनव सासे बिनती हमार मोला आज्ञा देतेव सास कि जातेंव सगरी नहाय घर हिन कुंवना घर हिन बावली कि घर हिन करौ असनाद, अहिमन झन जा सगरी नहाय, बेटा जान सुन पाहय त पुरजा में खाल निकाल दे है तभो ले सास के भाखा नई मानिस कि अपन संगी […]

गीत वाचिक परम्‍परा

फुगडी गीत

गोबर दे बछरू गोबर दे  चारो खुंट ला लीपन दे  चारो देरनिया ल बइठन दे  अपन खाथे गूदा गूदा  मोला देथे बीजा बीजा  ए बीजा ला का करहूं  रहि जांहूं तीजा  तीजा के बिहान भाय  सरी सरी लुगरा  हेर दे भउजी कपाट के खीला  केंव केंव करय मंजूर के पीला एक गोड म लाल भाजी  […]