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छत्तीसगढ़ी म छंद बरनन के पहिली किताब

लिखित साहित्य में अपन अनुभव ल बांटे बर पद्य अउ गद्य के उपयोग करे जाथे। जेमा पद्य के उंचहा मान हवय, पद्य ल गद्य के कसौटी तको कहे गए हे। तेखरे खातिर दुनिया के अलग अलग भाखा के साहित्यप मन म पद्य विधा ह सबले पहिली अपन जघा बनाए हे अउ लोक के कंठ म […]

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लोक भाखा के सामरथ : छत्तीासगढ़ी म प्रेमचंद के कहिनी

हिन्दी कहिनी के दुनियां म प्रेमचंद ल ‘कथा सम्राट’ कहे जाथे, हम सब प्रेमचंद ल ओखर कहिनी ले जानथन। पंच परमेश्विर, बूढ़ी काकी, नमक के दरोगा जइसे कइयोन कहिनी मन हमला जीवन म सत के संस्कादर अउ समाज ल समझे के विवेक देहे हे। हमर अंतस के कोनो कोना म प्रेमचंद के कहिनी के पात्र […]

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सबद के धार : पीरा ल कईसे बतावंव संगी

छत्‍तीसगढ़ी साहित्‍य म अब साहित्‍य के जमो विधा उपर रचना रचे जात हवय. ये बात हमर भाखा के समृद्धि बर बहुत सुघ्‍घर आरो आय. गद्य जइसे पद्य म घलव कविता, गीत, हाईकू के संगें संग उर्दू साहित्‍य के विधा गजल तको ल हमर सामरथ साहित्‍यकार मन छत्‍तीसगढ़ी म रचत हांवय. अइसनेहे साहित्‍यकार जितेन्‍द्र ‘सुकुमार’ जी […]

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गांव-गंवई के बरनन- मिश्र के कविता में – सरला शर्मा

तेईस दिसंबर सन् उन्नीस सौ तीस म जाज्वल्यदेव के ऐतिहासिक नगरी जांजगीर के बाह्मनपारा म रहइया स्व. कन्हैयालाल मिश्र अऊ श्रीमती बहुरादेवी के घर अंजोर करइया बेटा जनमिस। महतारी-बाप के खुसी के ठिकाना नइ रहिस। आघू चल के विद्याभूषण जी अपन नांव के मरजाद राखिस अऊ छत्तीसगढ़ के प्रसिध्द लोकप्रिय गीतकार बनिस जिनला आज हम […]

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बिमोचन – पुरखा के चिन्हारी

श्री प्यारे लाल देशमुख जी के तीसरइया काव्य कृति हरे पुरखा के चिन्हारी। जेमा कुल जमा डेढ़ कोरी रचना समोय गे हे। किताब के भूमका डॉ. विनय कुमार पाठक जी कम फेर बम सब्द के कड़क नोई म बांधे छांदे हे। जेन कबिता ल किताब के पागा बनाए गे हे वो हॅ आखरी-आखरी म हे। […]

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‘भोले के गोले” म छूटत गियान के गोला

ये पुस्तक ह पंचमिझरा साग के सुवाद देथे। ये साग के अपन सुवाद होथे। हमर बारी बखरी के हर फर के मान रखे जाथे, एक-एक, दू-दी ठन फर ल मिंझार के अइसना साग बनाये जाथे के मनखे ह अंगरी चाटत रहि जाथे। इही हाल ये ‘भोले के गोले” के आय। अपन हर विधा ल सकेल […]

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पुस्तक समीक्षा : माटी की महक और भाषा की मिठास से संयुक्त काब्य सग्रंह- ‘जय हो छत्तीसगढ़’

राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ी भाषा को समुचित मान-सम्मान मिलने लगा है और यहां के निवासियों के मन में से अपनी भाषा के प्रति जो हीनता का भाव था वह भी समाप्त होने लगा है। इसलिए आजकल साहित्य की सभी विधाओं में छत्तीसगढ़ी भाषा में प्रचुर मात्रा में लेखन हो रहा है। भाषा की समृद्धि […]

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करगा – [लघु-कथा संग्रह ] समीक्षा

छत्तीसगढी – महतारी ला धनी – मानी बनाए के उजोग मा कतेक न कतेक वोकर सेवक मन लगे हावैं । वोमन साहित्य के जम्मो विधा म अपन लेखनी ला चलावत हावैं । एकरे गुरतुर फल देखे बर मिलत हे कि आज छत्तीसगढी – भाखा म साहित्य – लेखन के जम्मो विधा म , एक ले […]

बरछाबारी समीच्‍छा

भाखा के महमहई बगरावत छत्तीसगढ़ी पत्रिका : बरछाबारी

छत्तीसगढ़ी भाखा के साहित्य ला चारो खूंट बगराए खातिर नवा प्रदेस म छत्तीसगढ़ी के मान रखइया संगी मन अपन अपन डहर ले सुघ्घर उदीम करत हांवय. अइसनेहे चौमासा पतरिका ‘बरछाबारी’ ला सरलग निकाल के भाई चंद्रशेखर ‘चकोर’ ह हमर भाखा के असल सेवा करत हांवय. ‘बरछाबारी’ के अंक मोला चकोर जी ह भाई जयंत साहू […]