समीच्‍छा

‘तुंहर जाय ले गीयां’

कामेश्वर पाण्डेय के छत्तीसगढ़ी उपन्यास ‘तुंहर जाए ले गीयां’ 270 पृष्ठ म लिखाय हावय। येखर कहिनी ह छोटे-छोटे 42 खण्ड म बंटाय हावय। हर कहिनी जीवंत आंखी के आगू म घटत दिखथे। बड़े कका मुख्य पात्र ह बहुत संवेदनसील हावय। हरेक के दु:ख-पीरा के एहसास ल करथे। आज के बेरा म जानवर के प्रति परेम […]

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गद्य साहित्य के कोठी म ‘बगरे गोठ’ के सकेला – पुस्तक समीछा

गढ़वाल के ऊंच-नीच धरती म जन्मे, प्रकृति के बीच म खेलत चन्द्रकला जी जब छत्तीसगढ़ के धरती म बहू बनके आइस। तब इंहा के प्रकृति म अपन मन ल बसा लीस। ‘मोर गोठ’ म लिखे हांवय के छत्तीसगढ़ के संस्कृति म कब घुल मिल गेंव पता नई चलिस। गांव-गांव घूमत ये कहिनी के जनम होवत […]

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सरग निसैनी म चघ लइका हांसत हे, बादर ले चंदा झांकत हे

पुस्तक समीक्छा सरग निसैनी (लइका गीत) डॉ. पीसी लाल यादव प्रकाशक- दूधमोंगरा, गण्डई, जिला राजनांदगांव मूल्य-10 रुपए ‘सरग निसैनी’ म लइका गीत के पंक्ति हावय। एक-एक गीत ऊपर गोड़ मड़ावत लइका बुध्दिमानी के सरग तक पहुंच जही। निसैनी के हर पंक्ति लइका के पसंद के हावय। अमली गीत लइका के दिल के गीत आय। झोफ्फा-झोफ्फा […]

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भाव के विचरन- नौ रस ले मन तक

पुस्तक समीक्छा ‘राम पियारी म दुर्गा जागीस’ छत्तीसगढ़ी कहानी संगरह म नारी के मन के बात हावय। एक पुरुष नारी के रूप म अपन महतारी ल देखथे। ओखर मन के पीरा, खुसी, दु:ख-दरद म, एक प्रौढ़ पुरुष, एक किशोर, एक लइका हर दिन ओखर संग रहिथे। अऊ इही म जीथे। बिहाव के बाद एक नारी […]

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नीम चघे करेला- ‘कड़ुवाहट संग हांसी’

पुस्तक समीक्छा विट्ठलराम साहू जी के बियंग संग्रह ‘नीम चघे करेला’ गुदगुदी पइदा करथे। विट्ठल जी के अपन भूमिका म लिखे हावय के अपन घर के गोठ, समाज के ऊंच-नीच, अनियाव, रूढ़िवादी विचार, अड़हापन ल सुरता करके ये किताब ल लिखेगे हावय। सही आय। जम्मो लेख मन घर अउ तीर तार के आय। अधिकतर लेख […]

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छत्तीसगढी साहित्य के सिरजन : लोकाक्षर 42

लोकाक्षर अंक 42 मिलीस । संपादकीय पढ के मन म भरोसा होइस कि छत्तीसगढी साहित्य के संरक्षण अउ संर्वधन बर लोकाक्षर परिवार के कतका सुघ्घर बिचार हे । पाछू कई बरिस ले ये पतरिका हा छत्तीसगढी साहित्य के चंदा सुरूज कस चमकत हे । छत्तीसगढी साहित्य के परिमार्जन बर सोंच मोला इही पतरिका म नजर […]