Chhattisgarhi Gazal गज़ल

अशोक नारायण बंजारा के छत्‍तीसगढ़ी गज़ल

आंखी म नावा सपना बसा के रखवअपन घर ला घर तो बना के रखव।आंखी ले बढ़के कूछू नइये से जग माए-ला अपने मंजर ले बचा के रखव।सोवा परत म कहूं झनिच जाबे अंगना म चंदैनी सजा के रखव।बड़ कोंवर हे जीयरा दु:ख पाही गोरी के नजर ले लुका के रखव।दिन महीना बछर कभू मउका मिलहीअंतस […]

Chhattisgarhi Gazal गज़ल

सनत के छत्‍तीसगढ़ी गज़ल

1 डहर-डहर मं घन अंधियार होगे,बिहनिया हमर नजर के पार होगे।जेखर उपर करत रेहेंन विसवास,वो हर आजकल चोर-बटपार होगे।पहिरे हावय वो हर रंग-रंग के मुखउटा,चेहरा हर ओखर दागदार होगे।जॉंगर टोरथन तभोले दाना नइ चुरय,जिनगी हमर तो तार-तार होगे।मर-मर के जीना कोन्‍हों हमर ले सीखय,हमर बर जीत ह घलो हार होगे।गलती करके मूड़ मं चघा पारेन,वो […]

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बसंत राघव के छत्‍तीसगढ़ी गज़ल

1 ओखर आंखी म अंजोर हे दया-मया केजिंहा ले रद्दा हे डोर उहां लमाथेउंचहा डारा ले ओहर उडि़स परेवा कसधरती ला छोडि़स त गिरीस बदाक ले ओखर ले दुरिहा के जानेंव मैं सब लसुरता लमिस त भगवान कस जानेवमरहा जान के ओला डेहरी बइठारेंवहांडी-बटकी ले गइस तभे पहिचानेंवफरै ना फूलै कतको डारा ल सींच लेजरी […]

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छत्‍तीसगढ़ी गज़ल – जंगल ही जीवन है

जम्‍मो जंगल ला काटत हन गॉंव सहर सम्‍हराए बर।काटे जंगल किरिया पारत गॉंव सहर जंगलाये बर।।जंगल रहिस ते मंगल रहिस, जंगल बिन मंगल नइये।पौधा रोपन गम्‍मत करथन, फेर मंगल ला मनाये बर।हरियर रूख, कतको सोंचेन, भितरी म बड़ हरियाबो।बपरा ते दुनिया छोड़न, रोथन काबर हरियासे बर।रिसा गइन करिया बादर मन, नास देखके जंगल के।पहिली बरसे, […]

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छत्‍तीसगढ़ी गज़ल – कागज म कुआं खनात तो हे

मनखे मनखे ल मठात तो हेअन कइसे मनखे बतात तो हे।मोर हाथ म टंगली नइते ह,कोनो जंगल फटफटात तो हे।मोर पियास के सुन के सोर,कोनो तरिया के पानी अंटात तो हे।सेयर घोटाला मेच फिक्सिंग चारा घोटाला चल,कुदु कर के देख के नांउ करा त तो हे।इहां इमानदार के कमी नइये,बैंक के किस्‍त ला पटात तो […]

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छत्तीसगढ़ी गज़ल : पीरा संग मया होगे

अइसन मिलिस मया सँग पीरा,पीरा सँग मया होगे.पथरा ला पूजत-पूजत मा,हिरदे मोर पथरा होगे. महूँ सजाये रहेंव नजर मा सीस महल के सपना ला ,अइसन टूटिस सीस महल के आँखी मोर अँधरा होगे. सोना चाँदी रूपया पइसा गाड़ी बंगला के आगू मया पिरित अउ नाता रिस्ताअब माटी – धुर्रा होगे. किरिया खाके कहे रहे तयं […]

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मुकुन्‍द कौशल के छत्‍तीसगढ़ी गज़ल

चुनई के हांका परगे भईया बेरा हे तय्यारी के। अटक मटक के नाचै बेंदरा देखौ खेल मदारी के ।। गॉंव गँवई के पैडगरी हर सड़क ले जुर गेहे तब ले।गँवई-गॉंव मॉं चलन बाढ़गै मधुरस मिले लबारी के।। बोट के भुखमर्रा मन अपन गरब गुमान गॅवा डारिन। इन्‍खर मन के नइये जतका इज्‍जत हवै भिखारी के।। […]

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सी.पी.तिवारी ‘सावन’ के छत्‍तीसगढ़ी गज़ल

गरिबहा मन ला रोजे रोज अपन करम उठाना हे संहीच मा भइया बडहरे मन के ये जमाना हे। का कोनो ला दीही ओ बपुरा भिखमंगा हा जुच्‍छा-जुच्‍छा गाना हे, जुच्‍छा अउ बजाना हे।बाप के कमई मा भला बेटा ला का लागही फोकट के खाना हे अउ गुलछर्रा उड़ाना हे। जेखर उठना, बइठना हे मंतरी, संतरी […]

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श्रीयुत् लाला जगदलपुरी जी के छत्तीसगढ़ी गजल – ‘दाँव गवाँ गे’ अउ ‘जहर नइये’

दाँव गवाँ गे गाँव-गाँव म गाँव गवाँ गेखोजत-खोजत पाँव गवाँ गे। अइसन लहँकिस घाम भितरहा छाँव-छाँव म छाँव गवाँ गे। अइसन चाल चलिस सकुनी हर धरमराज के दाँव गवाँ गे। झोप-झोप म झोप बाढ़ गे कुरिया-कुरिया ठाँव गवाँ गे। जब ले मूड़ चढ़े अगास हे माँ भुइयाँ के नाँव गवाँ गे। जहर नइये कहूँ सिरतोन […]