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लोक परब छेरछेरा : समाजिक समरसता के तिहार

जिनगी मा दान दक्छिना के घातेच महत्तम हावय, असल सुख-सान्ती दान पुन मा समाय हावय। हमर देश अउ धरम मा दान अउ तियाग के सुग्घर परमपरा चले आवत हे, भले वो परमपरा मन के नाँव अलग-अलग रहय फेर असल भाव एकेच होथे- दान अउ पुन। अइसने एकठन दान पुन करे के सबले बङ़े लोक परब […]

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मुक्का उपास

माघ महीना के अमावसिया ला मौनी अमावसिया कहे जाथे। एहा एक परब बरोबर होथे एखरे सेती एला मुक्का उपास के परब कहीथे। ए दिन ए परब के बरत करइया मन ला कलेचुप रहीके अपन साधना ला पूरन करना चाही। मुनि सब्द ले मौनी सब्द हा बने हावय। एखर सेती ए बरत मा कलेचुप मउन धारन […]

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छत्‍तीसगढ़ी शब्‍द के हिन्‍दी अर्थ और प्रयोग

पिछले दिनों कुछ शब्‍दों पर आपस में बातें होती रहीं- अखरा कोतल बाहुक गेदुर अगवारिन फाता डमरुआ देवारी लमना अरमपपई फुंडहर सिलयारी तिरही

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गरीबा महाकाव्य (तीसर पांत : कोदो पांत)

३. कोदो पांत अपन स्वार्थ बर सब झन जीथंय परहित बर कम प्राणी। पर के सुख बर जउन हा जीयत ते प्रणाम अधिकारी ।। विनती करों शहीद के जेमन हमला दीन अजादी । संस्कृत – साहित्य अउ समाज ला उंकरे लहू बचाइस ।। “”चलो चलो दीदी ओ आगू आओ बहिनी मन काम करे बर हम […]

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गरीबा : महाकाव्य (दूसर पांत : धनहा पांत)

गरीबा महाकाव्य नूतन प्रसाद 2. धनहा पांत ठेलहा बइठे मं तन लुलसा-ऊपर ले बदनामी । काम करे मं समय व्यवस्थित-ऊपर मिलत प्रशंसा ।। काम के पूजा करिहंव जेकर ले होथय जग आगे । महिनत मं तन लोहा बनथय-बनन पाय नइ कामी ।। समय हा रेंगत सुरधर-सरलग, मौसम घलो पुरोथय काम ओसरी पारी पुछी धरे अस, […]

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गरीबा : महाकाव्य (पहिली पांत : चरोटा पांत)

गरीबा महाकाव्य नूतन प्रसाद 1. चरोटा पांत बिना कपट छल के प्रकृति ला मंय हा टेकत माथा । बुद्धिमान वैज्ञानिक मन हा गावत एकर गाथा ।। बाढ़ सूखा अउ श्रृष्टि तबाही जन्म मृत्यु मन बाना । बेर चन्द्रमा नभ पृथ्वी अंतरिक्ष सिंधु मन माला ।। बालक के हक हे दाई संग कर ले लड़ई ढिठाई […]

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मक्खी-मच्छर मारो अभियान – कबिता

(कविता-जनहित मा जारी) जौन गढ्ढा मा जनम धरिसे , ओला सपाट बनालव मक्खी-मच्छर ला मारव अउ तुम उनला दूर हकालव. मच्छर के चाबे से होथे डेंगू अउ फायलेरिया ऊंकर पेट मा घलो पनपथे चिकनगुनिया मलेरिया. इंकर बचाव करना हे तुम्हला मच्छरदानी लगालव मक्खी-मच्छर ला मारव………. मक्खी के स्पर्श से होथे पेचिस,दस्त अउ पीलिया ऊंकर पांव […]

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इस अंक में खने ला न कोड़े ला, धरे ल खबोसा मंगल कामना के दिन आय अक्ती काहनी : फंदी बेंदरा मानवता के पुजारी सत्य साईं बाबा हमर छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ी राजभासा कामकाज के भासा कब बनही जरूरत हावय रामराज के किरकेट के महाकुंभ मइया पांचो रंगा सुधा वर्मा

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भिनसारे ले हर-बोलवा मनरूख ले अलख जगावंय!झुनकी घुंघरू संग मजीराधरे खंजरी गावंय!भाग देख दरवजा आइनहर गंगा दुहरावंय!सबके मंगल अपन संग ममालिक ले गोहरावंय!अब अपन हित खातिर पर के गर म छुरी चलावत हें! बेंदरा भलुवा धरे मदारीजब गलियन म घूमय !डमरू के डम डम ल सुनके लइका पिचका झूमय!डांग* चढ़ंय डंग-चगहा* कइ ठनहुनर अपन देखावंय!गुप्ती […]