कविता

सात हायकू सावन के

00 बादर आगे किसान के मन कुलकुलागे। 00 नांगर धरे चलिस नगरिहा खेत बोआगे। 00 कीरा झपागे बतरकीरी आगे जी कनझागे। 00 छेना सिरागे लकडी गुंगवाय ऑंखी पिरागे। 00 दिया बुतागे कडकिस बिजली बया भुलागे। 00 बोहाय पानी खेत छलछलागे बियासी आगे। 00 होगे बियासी खेत हरियागे जीव जुड़ागे। अजय ‘अमृतांशु’ हथनीपारा वार्ड,भाटापारा जिला-बलौदाबाजार-भाटापारा (छ.ग. […]