कविता

मन के दीया ल बार

कटय नहीं अंधियार चाहे लाख दीया ल बार होही जगजग ले अंजोर मन के एक दीया ल बार। जाति-धरम भाषा के झगरा बंद होक जाही मया पिरीत के रूंधना चौबंद हो जाही सावन कीरा कस गंजा जाही संसार… सुने म न तो कान पिरावय न देखे म आंखी देख सुन के कर नियाव, निकले मुख […]

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मन के दीया ल बार

कटय नहीं अंधियारचाहे लाख दीया ल बारहोही जगजग ले अंजोरमन के एक दीया ल बार।जाति-धरम भाषा के झगरा बंद होक जाहीमया पिरीत के रूंधना चौबंद हो जाहीसावन कीरा कस गंजा जाही संसार…सुने म न तो कान पिरावय न देखे म आंखीदेख सुन के कर नियाव, निकले मुख अमरित बानीकबीर कहे हे उड़ जय थोथा राहय […]

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लीम चउरा के पथरा

लीम चउरा के पथरा बिकट चिक्कन खड़भूसरा रहिस होगे कइसे बड़ चिक्कन ओ तो जानत हवय सबके अन्तर मन। पंच-पटइल बइठ नियाव करिस सुन्ता सुम्मत के नवा रद्दा गढ़िस। उधो-माधो के भाग ह खुलिस सरकारी योजना म साहेब दूनों के नाव लिखिस। मंगलू बुधियारिन के भांवर परिस इही मेर दूनो झन के पिरित सिरजिस। बिहने […]

कविता

जिनगी कइसे चलही राम

सिरावत हे गांव ले जम्मो बुता काम जिनगी कइसे चल ही राम… नागर नंदागे अउ टेकटर ह आगे हसियां हिरागे अउ हरवेस्टर ह छागे चुटकी म नाहकत हे दाउ के काम… मंडल गउटियां सब सहर धरलिस भइया बनिहार ल बनी नहीं, नइए पउनी के पोसइया उजरत हे छइयां जनावत हे घाम… चारों खूंट अंधियार हे […]