कविता

संसो झन कर गोरी

संसो झन कर गोठ हा करेजा म रहि जाही। मया करे के येही बेरा हे नई तो पहर हा सिरा जाही।। आबे मोर तीर म ता तोला मया के झुलना झुलाहुं। लाली टिकली ला तोर मुड़ म सजाहुं। आँखि ला टेढ़ के एके कनी देखथस। मया देके पारी म अपन मुँह ला फेरथस। मोर अतका […]

गोठ बात

कलाकार के कला के नई रहिगे हे मोल

[responsivevoice_button voice=”Hindi Female” buttontext=”ये रचना ला सुनव”] अभी के बेरा म छत्तीसगढ़ म कला के कमी नई हे अउ कलाकार मन के घलोक कमी नई हे, फेर कला के मान करईया मन के कमी होंगे हे। अब सब झन कला या कलाकार ल पइसा म तौलथे, ओखर जीवन भर के महेनत सम्मान के कोई अहेमियत […]