छप्पय

छन्द के छ : छप्पय छन्द

बिदेसी बाबू बिसराये ब्यौहार , पहिर अँगरेजी चोला महतारी अउ बाप , नजर नइ आवै तोला जाये बर परदेस , तियागे कुटुम – कबीला बन सुविधा के दास , करे बिरथा जिनगी ला का पाबे परदेस ले , नाता – रिस्ता जोड़ के असली सुख इहिंचे मिलै , झन जा घर ला छोड़ के छप्पय […]

उल्लाला

छन्द के छ : उल्लाला

जिनगी (उल्लाला – १३,१३ मा यति ,बिसम-सम तुकांत) जिनगी के दिन चार जी, हँस के बने गुजार जी दुख के हे अँधियार जी, सुख के दियना बार जी नइ हे खेवन-हार जी , धर मन के पतवार जी तेज नदी के धार जी, झन हिम्मत तयँ हार जी गुरू – १ (उल्लाला – १३,१३मा यति, […]

अमृत ध्वनि

छन्द के छ : अमृत ध्वनि छन्द

जब तँय जाबे जाबे जब तँय जगत ले , का ले जाबे साथ संगी अइसन करम कर, जस होवै सर-माथ जस होवै सर – माथ नवाबे, नाम कमाबे जेती जाबे , रस बरसाबे , फूल उगाबे झन सुस्ताबे , अलख जगाबे , मया लुटाबे रंग जमाबे , सरग ल पाबे, जब तयँ जाबे अमृत ध्वनि […]

कुण्‍डलियॉं

छन्द के छ : कुण्डलिया छन्द

चेत हरियर रुखराई कटिस, सहर लील गिन खेत देखत हवैं बिनास सब, कब आही जी चेत कब आही जी चेत , हवा-पानी बिखहर हे खातू के भरमार , खेत होवत बंजर हे रखौ हवा-ला सुद्ध , अऊ पानी-ला फरियर डारौ गोबर-खाद , रखौ धरती ला हरियर कवि के काम कविता गढ़ना काम हे, कवि के […]

रोला

छन्द के छ : रोला छन्द

मतवार पछतावै मतवार , पुनस्तर होवै ढिल्ला भुगतै घर परिवार , सँगेसँग माई-पिल्ला पइसा खइता होय, मिलै दुख झउहा-झउहाँ किरिया खा के आज , छोड़ दे दारू-मउहाँ रोला छन्द डाँड़ (पद) – ४, ,चरन – ८ तुकांत के नियम – दू-दू डाँड़ के आखिर मा माने सम-सम चरन मा, १ बड़कू या २ नान्हें आवै. […]

सोरठा

छन्द के छ : सोरठा छन्द

देवारी राज करय उजियार, अँधियारी हारय सदा मया-पिरित के बार, देवारी मा तँय दिया, || तरि नरि नाना गाँय , नान नान नोनी मनन, सबके मन हरसाँय , सुआ-गीत मा नाच के || . सुटुर-सुटुर दिन रेंग, जुगुर-बुगुर दियना जरिस, आज जुआ के नेंग , जग्गू घर-मा फड़ जमिस || सोरठा छन्द डाँड़ (पद) – […]

दोहा

छन्द के छ : दोहा छन्द

बिनती बन्दौं गनपति सरसती, माँगौं किरपा छाँव ग्यान अकल बुध दान दौ, मँय अड़हा कवि आँव | जुगत करौ अइसन कुछू, हे गनपति गनराज सत् सहित मा बूड़ के , सज्जन बने समाज रुनझुन बीना हाथ मा, बाहन हवे मँजूर जे सुमिरै माँ सारदा, ग्यान मिलै भरपूर लाडू मोतीचूर के , खावौ हे गनराज सबद […]

गोठ बात

छन्द के छ : यहू ला गुनव ….

छन्द के बारे में जाने के पहिली थोरिक नान-नान बात के जानकारी होना जरूरी है जइसे अक्छर, बरन, यति, गति, मातरा, मातरा गिने के नियम , डाँड़ अउ चरन, सम चरन , बिसम चरन, गन . ये सबके बारे मा जानना घला जरूरी हे. त आवव ये बिसय मा थोरिक चर्चा करे जाये. आपमन जानत […]

गोठ बात

छन्द के छ : दू आखर

सुग्घर कविता अउ गीत, चाहे हिन्दी के हो, चाहे छत्तीसगढ़ी के, सुन के मन के मँजूर मस्त होके नाचना सुरु कर देथे. इही मस्ती मा महूँ अलवा-जलवा कविता लिखे के उदीम कर डारेंव. नान्हेंपन ले साहित्यिक वातावरन मिलिस. कविता अउ गीत त जइसे जिनगी मा रच-बसगे. बाबूजी के ज्यादातर कविता छन्द मा लिखे गये हें […]

दोहा

देवारी तिहार के बधई

[bscolumns class=”one_half”] अँधियारी हारय सदा , राज करय उजियार देवारी मा तयँ दिया, मया-पिरित के बार || नान नान नोनी मनन, तरि नरि नाना गायँ सुआ-गीत मा नाच के, सबके मन हरसायँ || जुगुर-बुगुर दियना जरिस,सुटुर-सुटुर दिन रेंग जग्गू घर-मा फड़ जमिस, आज जुआ के नेंग || अरुण कुमार निगम http://mitanigoth.blogspot.in [/bscolumns][bscolumns class=”one_half_last_clear”](देवारी=दीवाली,तयँ=तुम,पिरित=प्रीत,नान नान=छोटी छोटी,नोनी=लड़कियाँ, […]