गीत

तोर सरन म आएन, माँ असीस देबे वो

असीस देबे वो असीस देबे वो तोर सरन म आएन, माँ असीस देबे वो तहीं भवानी, तहीँ सारदा, तहीं हवस जगदम्बा तोर परतापे टोरिन बेन्दरा भालू मन गढ़लंका माँ असीस देबे वो कलकत्ता म काली कहाए, मुम्बर्ड म मुम्बर्ड बस्तर म दन्तेस्‍वरी तय, बमलाई माँ असीस देबे वो आगी पावय ताप तोर ले, पानी ह […]

गीत

छत्तिसगढ़ महतारी के बन्दना : दानेश्वर शर्मा के गीत

छत्तिसगढ़ के मोर महतारी भुइयॉं अब्बड़ घन हे तोर अँचरा के छइहाँ सुर्रा सॉही महानदी पैरी जस इन्द्रावती अउ शिवनाथ हे मुरुवा के हर्रइयॉ छत्तिसगढ़ के मोर महतारी भुइयाँ सिरि भगवान दमउ दहरा म रिसभ देव अवतार लिहिस रिसि वशिष्ठ भार्गव अगस्त्य के तपोभूमि सरगुजा रिहिस दसरथ घर पुत्रेष्टि करइया श्रृंगी रखिस सिहावा परवत म […]

किताब कोठी गीत

तपत कुरू भइ तपत कुरू

असीस देवे वो देवारी अउ दुकाल-अकाल बेटी के बिदा पन्द्रह अगस्त मडई देखे जाबो उँकरे बर सनमान मडइके के मया इही किसम होना चाही तपत कुरु लछमी – पारवती गोठ ले दे मोर खर लुगरा भज लेबे गा तोरेच खातिर अन्नपुरना गउरी सास डोकरी लेवना चोरी निक लागय चन्दा लेहूं अरझ गेहे तुलसी के कहिनी […]

गोठ बात

प्रशासनिक शब्‍दकोश बनइया मन ल आदर दव, हिनव झन

छत्‍तीसगढ़ राजभाषा आयोग दुवारा छपवाय हिन्‍दी-छत्‍तीसगढ़ी प्रशासनिक शब्‍दकोश भाग एक के बारे में कुछ लेखक मन के बिचार पढ़े के मउका लगिस। खुसी होइस के छत्‍तीसगढ़ी भाषा खातिर जागरिति हवय। दू चार बात मोरो मन म उठिस, तोन ल बताना जरूरी समझत हँव। ए शब्‍दकोश ल राजभाषा आयोग ह नइ बनाय हे। विधानसभा सचिवालय ह […]

गीत

तपत कुरु भ‍इ तपत कुरु

तपत कुरु भ‍इ तपत कुरु बोल रे मिट्ठु तपत कुरु बडे बिहनिया तपत कुरु सरी मँझनिया तपत कुरु फ़ुले-फ़ुले चना सिरागे बाँचे हावय ढुरु-ढुरु ॥ चुरी बाजय खनन-खनन झुमका बाजय झनन-झनन गजब कमैलिन छोटे पटेलीन भाजी टोरय सनन-सनन केंवची-केंवची पाँव मा टोंडा पहिरे हावय गरु-गरु ॥ बरदि रेंगीस खार मा महानदी के पार म चारा […]

गीत

गीत : सारी

मोर सारी परम पियारी गा र‍इपुरहिन अलग चिन्हारी गा कातिक मा ज‍इसे सियारी गा फ़ागुन मा ज‍इसे ओन्हारी गा हाँसय त झर-झर फ़ुल झरय रोवय त मोती लबारी गा ॥ एक सरीं देह अब्बड दुब्बर झेलनाही सोंहारी जस पातर मछरी जस घात बिछ्लहिन हे हंसा साही उज्जर पाँखर चर चर ल‍इका के महतारी फ़ेर दिखथय […]