व्यंग्य

मनखे अउ सांप

हमर गांव के गली मएक झन सांप देखइया ह आइस.सांप देखौ सांपकहिके जोरदार हांका ल लगाइस.सांप वाले के आरो लघर के मन पाइन.सांप देखे के सौंख मसबे झन बाहिर निकल आइन. संवरा ह सांप के मुंह मअपन अंगठा ल लगाइस.फेर बिख उतारे मंतर लमने मन म बुदबुदाइस.मोटरी ल खोल केजड़ी बुटी ल लगाइस.फेर उही जड़ी […]

कविता

मोर महतारी (मेरी माँ)

मोला दसना म सुता केखोर्रा खटिया म सुतइया मोर महतारीआज तैं हलकड़ी छेना के दसना म सुते हसअपन दूनो आंखी ल मुंदे हसजमो मया मोह ले तैं छोड़ देहेहमन ले तैं मुंह ल मोड़ लेहेए मोर महतारीकइसे भुलाहूँ…नौ महीना कोंख म मोला तैं राखेहमन करा सुख दुख ल तैं भाखे जब आंखी ह खुलीस त […]