कविता

पुरखा मन के चिट्ठी

जय भारत , जय धरती माता सबले उप्पर म लिखे हवय । सब झन बर , गजब मया करे हे , लागत हे सऊंहत दिखत हवय । हली भली रहिहहु सब बेटा , हम पुरखा मन चहत हबन । करम धरम हे सरग नरक , बिन सवारथ के कहत हबन । धुंआ देख के करिया […]

कविता

पांच बछरिया गनपति

रजधानी म पइठ के परभावली म बइठ के हमर बर मया दरसाऐ हमीच ला अइठ के । रिद्धी सिद्धि पा के मातगे जइसे जोगीजति ठेमना गिजगिजहा पांच बछरिया गनपति ।। बड़े बुढ़वा तरिया के करिया भुरवा बेंगवा अनचहा टरटरहा देखाये सब ला ठेंगवा । पुरखऊती गद्दी म खुसरे खुसरे बना लीन येमन अपन गति अपनेच […]

कविता

किसानी के दिन आगे

नांगर अऊ तुतारी के जुड़ा अऊ पंचारी के रापा गैंती कुदारी के मनटोरा मोटियारी के मनबोध ला सुरता आगे किसानी के दिन आगे । कबरा लाल धौंरा के खुमरी अऊ कमरा के आनी बानी रंग मोरा के बांटी अऊ भौंरा के भाग फेर जागगे किसानी के दिन आगे । बादर अऊ पानी के खपरा खदर […]

कविता

कबिता: पइधे गाय कछारे जाय

भेजेन करके, गजब भरोसा । पतरी परही, तीन परोसा । खरतरिहा जब कुरसी पाइन, जनता ल ठेंगवा चंटवाइन । हाना नोहे, सिरतोन आय, पइधे गाय, कछारे जाय ॥ ऊप्पर ले, बड़ दिखथे सिधवा, अंतस ले घघोले बघवा । निचट निझमहा, बेरा पाके, मुंहूं पोंछथें, चुकता खा के । तइहा ले टकरहा आय, पइधे गाय कछारे […]

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छत्तीसगढ़ी

हमर बोली छत्तीसगढ़ी जइसे सोन्ना चांदी के मिंझरा , सुघ्घर लरी । गोठ कतेक गुरतुर हे ये ला जानथें परदेसी । ये बोली कस , बोली नइये – मान गे हें बिदेसी ॥ गोठियाय म , त लागथेच – सुने म घला सुहाथे , देवरिहा फुलझरी ॥ मया पलपला जथे सुन के ये दे बोली […]