कहानी

बहुरिया – कहिनी

बहु ह ससुरार म घलो मइके कस मया अउ दुलार म राहय। ससुर काहय बेटी हमरो बेटी ह घलो ककरो बेटी बनही, हमू मन सोचबो न बेटी ल ससुरार म घलो बेटी कस दुलार मिलय। हमन जइसन करबो तइसन तो हमरो बेटी मन ल मिलही मान सम्मान पाना कुछु अपनो हाथ का रइथे बेटी। देखत […]

कहानी

कहिनी – जिनगी के खातिर

बाबा तेहा लीम बीजा ल काबर सकेले हस गा। काय करबे येला? येला न रे जगो त सौ म पच्चीस-तीस ठन ह पेड़ बनही रे! चल जल्दी बबा, तोला खाय बर देखथे, चल बेटा आवथवं। दाई बबा ह लीम बीजा सकेलथे। आघू कीहिस हे, डोकरा लाज नइए का रे लीम बीजा ल काय अपन मुड़ […]

गोठ बात

बित्ता भर भुइयां

मे ह एक बीता भुइयां बर मरत हावव का, मे ह काबर अइसे करवाहूं भई जावा उही ल पूछ मे हा तो काही नइ केहे अवं। कइसे के विष्णु तोर मालिक ह काय काहत हे, सुनत हावच न, अरे ददा हो। मालिक के केहे बिना मेहा कइसे कर देहूं गा। विष्णु तोला मेहा कब दर्रा […]