किताब कोठी गीत

लक्ष्मण मस्तुरिया के खण्‍ड काव्‍य : सोनाखान के आगी

लिखे-पढ़े के सुख कोनो भी देस-राज के तरक्‍की के मूल म भासा. संस्कृति अउ जनम भुंई के महात्‍तम माने जाथे। एकर बिना कोनो भी किसम के विकास प्रगति बढ़ोत्तरी अकारथ होथे। छत्‍तीसगढ़ राज नई बनेरिस वो समे बीर नरायेन सिंह के ए बीरगाथा सुनके नौजवान मन के मन म भारी जोस अउ आत्म गौरव के […]

कविता

सच बोले के काम सिरिफ सरकारी हे

सच बोले के काम  सिरिफ सरकारी हे  बाकी सब मुंहदेखी  बात लबारी हे … ऐसे समे म चुप रहना  सबसे बढ़े समझदारी हे –  काबर के महिमा मंड़ित  सिरिफ निंदाचारी हे  सरकार अउ बयपारी  जउन कहत हे वोला  टी.वी. रेडियो गजट बगरात हे  मनखे के सुख-दुख म भला  कोन आंसू बरसात हे  सच्छात धरम राज […]