गोठ बात

छत्तीसगढ़ी दिवस 28 नवम्बर विशेष

हिंदी हिंदुस्तान के अउ छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ के सान आय एक दसक बीत गईस फेर महतारी भाखा हमर 8 वीं अनुसूची म सामिल नैइ हो पाईस छत्तीसगढ़ राज बने 17 बछर होगे। नवम्बर महीना ह छत्तीसगढ़ के परब आय। नवम्बर महीना ह छत्तीसगढ़ीहा मन बर दसहरा, दिवाली अउ होली के परब ल कम नोहे। 1 नवम्बर […]

कविता

ओहर बेटा नोहे हे

ओहर बेटा नोहे हे! परसा के ढेंटा आय लाठी ल टेक टेक के सडक म बाल्टी भर पानी लानत हे देख तो डोकरी दाई ल कैसे जिनगी ल जीयत हे कोनो नइये ओखर पुछैया अपन दुख ल लेके बडबडावत हे कभू नाती ल, कभू बेटा ल, कभू बहू ल गोहरावत हे पास पडोस के मन […]

कविता

कविता : अब भइगे !

अब भइगे बंदुक ल छोड दव बस्तर के माटी ल झंन रंगव महतारी के कोरा सुना होगे आॅखी ले आंसु बोहवत हे छोटे बहिनी राखी ल थारी म सजाये हे नान नान लईका मन रस्दा देखत हें नावा बोहासिन के मांग ह सुना होगे पडोसी के बबा गुनत हे अपन नाती देख रोअत हे तुमन […]

कविता

कविता : मन के मोर अंगना म

सखी रे ! बसंत आगे मन के मोर अंगना म कोयल भुलागे अपन बोली बर-पीपर के पान बुडगागे अबीर धरे धरे हाथ ल गंवागे पिया के संदेसा बाछे बछर बीत गे कब आही मोर मयारू सपना मोर अबिरथा होगे गुरतुर गोठ अब सुहावे नही पिया के संदेसा बाछे बछर बीत गे दरपन मोला भावे नही […]

कविता

कविता : कहॉं लुकाये मोर मईया

कहॉं लुकाये मोर मईया तोला खोज डारेंव ओ कोने गांव – नगर डगर में मईया, कोने शहर में मईया जस ल तोर मन म गुनगुनाथौं हिरदे म सुमिरन करथौं कहॉं लुकाये मोर मईया तोला खोज डारेंव ओ रायगढ बुढी माई गयेंव चन्र्यपुर चन्र्रहासनी ओ सारंगढ समलाई गयेंव कोसीर कुशलाई ओ अडभार के अष्टभुजी गयेंव रतनपुर […]

गीत

कुशलाई दाई के मंदिर म सजे हे जेवारा.

कुशलाई दाई के मंदिर म सजे हे जेवारा….. मंगल गीत गावत हांवे झुमत हें सेवा म जगर बगर जोत जलत हे दाई के भुवन म बैगा झुमत हे मांदर के सुर म नाहे नाहे लईका मन अउ सियान मन हावे अंगना म मंगल गीत गावत हांवे झुमत हें सेवा म डोकरी दाई घर राखत हावे […]

कविता

कविता : नोनी बर फुल

नोनी बर फुल …. घर के अंगना म फुले हे कनेर के फुल पिअर -पियर दिखत हे डाली म झुलत हे नोनी ह देख के दाई ल पुचकारत हे खिलखिलाके हांस के बेलबेलावत हे अंचरा ल दाई के खिंच – खिंच के फुल ल बतावत हे दाई भुइंया म बैठ के दही ले लेवना निकालत […]