गीत

पारंपरिक गीत देवारी आगे

देवारी आगे रे भइया, देवारी आगे ना।। घर घर दिया बरय मोर संगी, आंधियारी भगागे ना। देवारी आगे रे भइया —–।। कातिक अमावस के दिन भइया, देवारी ल मनाथे । सुमता के संदेश ले के, बारा महीना मा आथे।। गाँव शहर के गली खोर ह, जगमगागे न ।। देवारी आगे रे भइया —–।। घर दुवार […]

कविता

छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया

छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया, गुरतुर बोली मीठ भाखा हे । कोन करिया कोन गोरिया, छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया । गाँव गवई के हमन रहइया, माटी के हावय घर अऊ कुरिया । बर पीपर हे तरिया नदिया, बाग बगीचा घन अमरइया । मन निरमल हे गंगा जइसे, सब ला मया करइया । धोती कुरता पटकू पहिरइया, चटनी बासी […]

कविता

किसान

रदरद रदरद गिरगे पानी, चूहे परवा छानी । ठलहा काबर बइठे भइया, आगे खेती किसानी । ये गा किसान, कर ले धियान चलव खेत चलव गा । नांगर जुवाड़ी ल जोर के भइया, धर ले बिजहा धान । अदरा अदरा बइला हावय, होथे हलाकान । अब होगे बिहान , जल्दी उठव किसान चलव खेत चलव […]