चौपई छंद दोहा

उत्तर कांड के एक अंश छत्तीसगढी म

अब तो करम के रहिस एक दिन बाकी कब देखन पाबों राम लला के झांकी हे भाल पांच में परिन सबेच नर नारी देहे दुबवराइस राम विरह मा भारी दोहा – सगुन होय सुन्दर सकल सबके मन आनंद। पुर सोभा जइसे कहे, आवत रघुकुल चंद।। महतारी मन ला लगे, अब पूरिस मन काम कोनो अव […]

अनुवाद दोहा

अनुवाद : उत्तर कांड के एक अंश

अब तो करम के रहिस एक दिन बाकी। कब देखन पाबो रामलला के झांकी॥ है भाल पाँच में परिन सवेचन नारी। देहे दुबराइस राम बिरह मां भारी॥ सगुन होय सुन्दर सकल सबके मन आनंद। पुर सोथा जइसे कहे, आवत रघुकुल चन्द्र॥ महतारी मन ला लगे अब पूरिस मन काम। कोनो अब कहतेच हवय आवत बन […]

गीत

पितर पाख मा साहित्यिक पुरखा के सुरता : पद्मश्री मुकुटधर पाण्डेय

हाट्स एप ग्रुप साहित्‍यकार में श्रीमती सरला शर्मा अउ अरूण निगम ह पितर पाख मा पुरखा मन के सुरता कड़ी म हमर पुरखा साहित्‍यकार पद्मश्री मुकुटधर पाण्डेय के रचना प्रस्‍तुत करे रहिन हे जेला गुरतुर गोठ के पाठक मन बर सादर प्रस्‍तुत करत हन – छायावाद के जन्मदाता मुकुट धर पाण्डे ल आखर के अरघ, कालिदास […]