कविता

धिक्कार हे

सुकमा जाय मा कांपत हे पोटा दिल्ली ले कहत हे चुनौती स्वीकार हे बंद करव अब फोकटे बोल बचन नेता जी तुंहला बड़ धिक्कार हे कतेक घव बार-बार ये बात ला दोहराहु बोलते रहि जहु फेर कुछू नइ कर पाहु दम हे ता थोरकु बने दम ला दिखावव दिल्ली वाले नेता आपो ग्राउंड जिरो ले हो आवव आतंक वाले […]

गोठ बात

असमिया धुन मा छत्तीसगढ़िया राग, छत्तीसगढ़ मा होइस पहुना संवाद

आवा दे बेटी फागुन तिहार … मारबो बोकरा करबो शिकार …… हे वोति कोन सेन रे मुना महुआ रे ………..। धुन असमिया हे … फेर बोल छत्तीसगढ़ी। अइसनेहे साझा संस्कृति ले रचे बसे हे लाखन परदेसी छत्तीसगढ़िया मन के जिनगी। वो छत्तीसगढ़िया मन के जिनगी जेन डेढ़ सौ बछर पहली असम राज खाय-कमाय बर गइन […]

गोठ बात

ना बन बाचत हे ना भुइयां, जल के घलोक हे छिनइयां

छत्तीसगढ़ हा पूरा देस मा एक ठिन अइसे राज हरय जिहां तीन जिनिस के कभु कमी नइ रहे हे। ये तीन जिनिस हरय बन, भुइयां अउ पानी। छत्तीसगढ़ मा जेन कोति भी जाहु, उत्ती ले लेके बुढ़ती अउ रक्क्छहु ले लेके भंडार कोति। सबो दिसा मा भरपुर बन, भुइयां अउ पानी मिलही। अउ इही बन […]

व्यंग्य

अब मंतरी मन बर रेड सिग्नल … लाल बत्ती खतरा हे !

रेड सिग्नल वइसे खतरा के निसान माने जाथे। फेर इही खतरा के निसान कोन जनि कब ले नेता-मंतरी ले के अधिकारी मन बर रुतबा के चिन्हारी बनगे मैं तो नइ जानव आप मन जानव होहु त समझ लेहु। वइसे सच तो इही हरय के लाल सिग्नल हा खतरा के ही निसानी हरय। जनता मन ला […]

कविता

छत्तीसगढ़ म मउत “अमर” हे 

छत्तीसगढ़ म मउत “अमर” हे  कोनो मरत हे त कसूर हमर हे आंखी फूटिस, गरभ फूटिस  उल्टी-दस्त म परान ह छूटिस पीलिया-डायरिया म मरगे झारा-झारा बता भला का जिम्मेदारी हमर हे छत्तीसगढ़ म मउत “अमर” हे  कोनो मरत हे त कसूर हमर हे मै थोड़ेव मांगे रहेव सीएम ले पूछ स्वास्थ बिभाग म होवय चाहे […]