कविता

दूध के करजा चुकाले रे

छत्तीसगढ़ के धुर्रा माटी, माथ म तैंहा लगा ले रे। थाम के तिरंगा हाथ मा, वन्दे-मातरम् गा ले रे ।। बइरी दुस्सासन, ताकत हे आज, भारत माँ के अँँचरा ल। डंडा मार के दूर भगाबे, आतंकवाद के कचरा ल।। जा बेटा आज, दूध के करजा चुकाले रे…. राष्ट्र धरम ले बढ़के, अउ कोनो धरम ईमान […]

कविता

झांझ – झोला

आगी कस अंगरा, दहकय रे मंझनिया । धूकनी कस धूकथे, संझा का बिहनिया ।। हरके बरजे कस, पाना नई खरके । आंखी तरेंरे जब, कडके मंझनिया ।। आगी कस अंगरा ………………… टूकूर – टूकूर देखे, नवा – नवा बहुरिया । भुकूर – भुकूर लागे, धनी मोर लहरिया ।। आगी कस अंगरा ………………… चूह चुहागे पछीना, […]