जीवन परिचय

रायपुर नगर निगम के मयारू : ठाकुर प्‍यारे लाल

अगस्त सन् 1937 म जब ठाकुर प्‍यारे लाल साहब रायपुर मुनिसपल कमेटी के अध्यक्ष चुने गीन तब मुनिसिपल कमेटी म डेढ़ लाख रूपिया के करजा रहिस। मुनिसिपल कमेटी के कर्मचारी मन के तरक्की छै-सात बछर ले रूके परे रहिस। इही हालत स्कूल के गुरूजी मन के घलोक रहिस। शहर के सड़क उखर गए रहिस, स्कूल […]

जीवन परिचय

मोर संग चलव रे ..

पं. दीनदयाल उपाध्याय : व्यक्तित्व अउ कृतित्व – संजीव तिवारी जनम अउ शिक्षा – कभू-कभू धरती के जनमानस ल नवा दिशा देहे अऊ जुग बलदे के उदीम ल पूरा करे बर युग पुरूष मन के जनम होथे। ओ मन संकट के समय म जनम लेहे के बाद घलोक अपन जनमजात चमत्कारिक प्रतिभा ले बड़े ले […]

जीवन परिचय

सुरता : डॉ. विमल कुमार पाठक

डॉ. विमल कुमार पाठक सिरिफ एक साहित्यकार नइ रहिन। उमन अपन जिंदगी म आकाशवाणी म उद्घोषक, मजदूर नेता, कॉलेज म प्रोफेसर, भिलाई स्टील प्लांट म कर्मचारी, पत्रकार अउ कला मर्मज्ञ संग बहुत अकन जवाबदारी निभाईन। आकाशवाणी रायपुर के शुरुआती दौर म उंखर पहिचान सुगंधी भैया के रूप म रहिस अउम केसरी प्रसाद बाजपेई उर्फ बरसाती […]

जीवन परिचय

श्रद्धांजलि – गीत संत: डॉ. विमल कुमार पाठक

हमर जइसे कबके उबजे कोलिहा का जाने खलिहान मन के सामरथ म डॉ. विमल कुमार पाठक के व्यक्तित्व अउ कृतित्व के उपर बोलना आसान नइ हे. तभो ले हम बोले के उदीम करत हन आप मन असीस देहू. एक मनखे के व्यक्तित्व के महत्व अउ ओखर चिन्हारी अलग अलग लोगन मन बर अलग अलग होथे. […]

संपादकीय

गुनान गोठ : पाठक बन के जिए म मजा हे

एक जमाना रहिस जब मैं छत्तीसगढ़ी के साहित्यकार मन ल ऊंखर रचना ले जानव। फेर धीरे-धीरे साहित्यकार मन से व्यक्तिगत परिचय होत गीस। महूँ कचरा-घुरुवा लिख के ऊंखर तीर बइठे बर बीपीएल कारड बनवा लेंव। समाज म अलग दिखे के सउंख एक नसा आय, लेखन एकर बर सहज-सरल जुगाड़ आय। घर के मुहाटी भिथिया म […]

शब्‍दकोश

छत्तीसगढ़ी के सर्वनाम

मैं / मैं हर (मैं) – मैं दुरूग जावत रहेंव/ मैंं हर दुरूग जावत रहेंव। हमन (हम) – हमन काली रईपुर जाबो। तैं / तें हर (तुम) – तैं का करत हस? / तैं हर का करत हस? तुमन (आप लोग) – तुमन कहां जावत हव। (बहुवचन)/ तुमन बने दिखत हव। (एकवचन) ओ / ओ […]

मुहावरे शब्‍दकोश

छत्तीसगढ़ी भांजरा

छत्तीसगढ़ी के मुहावरे अकल लगाना = विचार करना अंगठी देखाना = उंगली दिखाना अंग म लगना = अंग में लगना अंगरी जरना = उंगली जलना अंधियारी कुरिया = अंधेरी कोठरी अइसे के तइसे करना = ऐसी की तैसी करना अकल के अंधवा होना = अक्ल का अंधा होना अजर-गजर खाना = अलाय–बलाय खाना अद्धर करना […]

लोकोक्तियाँ शब्‍दकोश

छत्तीसगढ़ी हाना

छत्तीसगढ़ी कहावतें (हाना / लोकोक्तियाँ) अँधरा पादै भैरा जोहारै (अंधा पादे, बहरा जुहार करे) अँधरा खोजै दू आँखी (अंधा खोजे दो आँख) अँधवा म कनवा राजा (अँधों में काना राजा) अक्कल बडे के भैंस (अक्ल बडी की भैंस) अड्हा बइद प्रान घात (अनाडी वैद्य प्राण घातक होता है) अपन आँखी म नींद आथै (अपनी आँखों […]

मानकीकरन रिश्ते-नाते शब्‍दकोश

छत्तीसगढ़ी भाषा में रिश्ते-नाते

दाई / महतारी / दइ = माँ (Mother) ददा = पिता (Father) बबा = दादा (Paternal Grandfather) डोकरीदाई = दादी (Paternal Grandmother) कका = चाचा (Father’s Younger Brother) काकी = चाची (Father’s Younger Brother’s Wife) नानी / आजी, ममादाई = नानी (Maternal Grandmother) नाना /आजा बबा = नाना (Maternal Grandfather) मौसी दाई = सौतेली माँ […]

जीवन परिचय

गरीबों का सहारा है, वही ठाकुर हमारा है : ठाकुर प्यारेलाल सिंह

ठाकुर प्यारेलाल सिंह छत्तीसगढ़ म मजदूर मन के अधिकार खातिर आंदोलन के बाना उचईया पहिली मनखे रहिन। इंकर जनम 21 दिसम्बर 1891 को राजनांदगांव जिलाा के दैहान गांव म होए रहिस। इंखर पिताजी के नाम दीनदयाल सिंह अउ माताजी के नाम नर्मदा देवी रहिस। इंखर पढ़ई-लिखई राजनांदगांव अउ रायपुर म होईस। नागपुर अउ जबलपुर म […]