कविता

मया करबे त करले अउ आन कविता : सोनु नेताम “माया”

अजब गजब के अब्बड़ नखरा तैंय ह झन देखा न वो अंतस भितर म तोर का हे ओला तैय बने बता न वो काबर तैंय मुहुं फुलाथस तोर बिचार ल सुना न वो रहि रहि के भरमात रथस अपन संग मोला रेंगा न वो मया करे बर कुछु सोचत होबे पांव म पांव मिलाके चल […]

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ओनहारी-सियारी

हरुना धान लुवागे संगी अब ओनहारी घलो उतेरबोन कन्हार माटी चिक्कट चिक्कट ओनहारी बर बिजहा खोजबोन लाख लाखड़ी जिल्लो बिजहा ओनहारी सियारी उपजाबोन धान-पान घलो लुवा टोरागे हांक दुन नांगर जोतबोन पाग आय उतेरा के हरिया हरिया बोबोन अरसी मसुर चना बटर कोढ़ियाके कोढ़ा देबोन खातु कचरा दवा दवई बने पेढ़ाय बर छितबोन कियारी बनाके […]

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पताल के भाव

हाय रें हाईबिरिड पताल तोरो अलगेच अलग भाव बेचावत हे पचास साठ रुपया मंहगाई बढ़गे कांव-कांव अमीरहा गरीबहा मनखे बर सबो बर हे एक भाव गरीब आदमी कईसे नपाहि बिसावत हे एक पाव बड़े आदमी खा खाके निकालत हे अपन पेट अंडा मुरगी मांस बरोबर भोगा गेहे एकर रेट देसी बिदेसी हाई बिरिड मंहगाई म […]

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स्वक्छता अभियान

चल मोर संगी चल मोर साथी चलवं स्वक्छता अभियान चलाबो गांव देहात अउ नगर सहर ल निरमल सुघ्घर गांव बनाबो धरके निकलबो बाहरी खरेरा खोर गली ल बाहरत जाबो ओंटा-कोंटा नाली साफ करत जुरमिलके नवा बिहान लाबो साफ सुथरा रखबो गंवई-गांव ल घुरवा गड्डा खनके पटवाबो जब्बर सुघ्घर मोर गंवई-गांव घर के कचरा बाहिर निकलवाबो […]

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लुए टोरे के दिन आगे

पियंर पियंर डोली खार धान बाली लहलहावत हे लुए टोरे के दिन आगे मांथ ल नवावत हे रापा धरके कांदी छोले बियारा ल चतरावत हे जुड़ा ड़ाढ़ी सुमेला बंडी बईलागाड़ी ल सम्हारावत हे पेरा पुरा के पैरा डोरी बर बरके बनावत हे धान लुए बर हंसिया,बेठ लोहार कर पजवावत हे पात धरके चापे चाप करपा […]

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पुन्नी मेला घुम आतेन

कातिक पुन्नी के मेला भराय चल न मयारु घुमेल जातेन भोले बाबा बर असनान करबो फुलपान केला जल चढ़ातेन लगे रथयं अब्बड़ रेला दरस करके घलो आतेन फोड़तेन नरियर अउ भेला मनके मनौती मांग लेतेन खांसर बईला म बईठके होहो तोतो हांकत दउंड़ातेन संगी जहुंरिया संग जोराके महादेव घाट मेला जातेन लाई मुर्रा चना फुटेना […]

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सुआ नाचेल जाबो

सुआ नाचेल जाबो संगी चलो सुआ नाचेल जाबो तरी हरी मोर सुअना नहा नरी नहा न गाबो संगी संगवारी जुर मिलके माटी के सुआ बनाबो माटी के सुआ शोभा बरनी हरियर रंग म रंगाबो सखी सहेली टोली बनाके चलो सुआ नाचेल जाबो तरी हरी मोर सुअना नहा नरी नहा न गाबो एके रंगके झम्मक लुगरा […]

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देवारी तिहार आवत हे

हरियर हरियर लुगरा पहिरके दाई बहिनी मन नाचत हे आरा पारा खोर गली मोहल्ला सुवा गीत ल गावत हे सुग्हर संदेश के नेवता देवत देवारी तिहार आवत हे घर अंगना कोठा कुरिया पेरौवसी माटी म छबावत हे जाला जक्कड़ खोंदरा कुरिया निसैईनी चड़के झटावत हे लाली सफेद पिंवरी छुही घर अंगना ल लिपावत हे कोल्लर […]

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सुरता तोर आथे

पहाति बिहानिया हो चाहे, संझाति बेरा के बुड़त संझा हो! काम बुता म मन नी लागे, भईगे सुरता तोर आथे! का करवं तोर बिन, ऐको कन मन नई लागे! हर घड़ी बेरा कुबेरा, सुसक सुसक्के रोवाथे! बईहा पगला दीवाना होगेवं, मया म तोर मयारु! अब तो अईसे लागथे, तोर बिन कईसे रहि पांहु! जिनगी जिए […]

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मोर गांव के बजार

आबे वो गोई मोर गांव के बजार, घुमाहुं तोला मैंय हटरी बजार! संगे जाबो मोर गांव के बजार, पहिराहुं तोला वो नवलखिया के हार! खवाहुं तोला मैंय जलेबी मिठई, सुरता राखबे मोर रुद्रीनवागांव के बजार! अउ खवाहुं चना मुर्रा लाई, हफ्ता दिन बुधवार भराथे मोर गांव के बजार! कान बर खिंनवा,हाथ बर चुरी! नाक बर […]